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-ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आवास, हॉस्टल और पुस्तकालय बनाने को मंजूरी

-पतवाड़ी व बिरौंडी में श्रमिक आवास, इकोटेक-11 में श्रमिक हॉस्टल बनेगा

-सेक्टर अल्फा-1 में बनेगा पुस्तकालय, छात्रों को तैयारी में मिलेगी सुविधा

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक विकास में अहम भागीदारी निभाने वाले अप्रवासी श्रमिकों को बेहतर जीवन शैली देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने तीन अहम फैसले लिए हैं। शासन के निर्देश पर प्राधिकरण बोर्ड ने ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आवास, लेबर हॉस्टल और सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने को मंजूरी दे दी है। ग्रेटर नोएडा में ये तीनों ही परियोजनाएं अब मूर्त रूप में आ सकेंगी। औद्योगिक शहर ग्रेटर नोएडा में अपना और अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में अप्रवासी श्रमिक आते हैं। एक वक्त के बाद वे यहां अपने लिए आशियाना बनाकर रहने की ख्वाहिश रखते हैं। बिल्डर फ्लैटों की कीमत ऐसे लोगों के पहुंच से दूर होती है, जिससे अपने घर का सपना पूरा नहीं हो पाता है। कई बार वे अनधिकृत कालोनियों में अपनी गाढ़ी कमाई लगा देते हैं। इस समस्या के हल के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पतवाड़ी और बिरौंडी गांव में ईडब्ल्यूएस फ्लैट बनाने जा रहा है।

इसकी जमीन चिंहित हो गई है। सभी औपचारिकता पूरी कर इसी साल के अंत तक निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य जनपदों और राज्यों से आने वाले निर्माण श्रमिकों तथा परिवारों को सुविधायुक्त बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। बोर्ड बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार (वर्चुअल), ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, ग्रेनो प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव, यीडा के ओएसडी शैलेंद्र सिंह, ग्रेनो प्राधिकरण के जीएम वित्त स्वतंत्र गुप्ता, जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह, ग्रेनो प्राधिकरण की ओएसडी गुंजा सिंह, ओएसडी अभिषेक पाठक, ओएसडी गिरीश झा, ओएसडी मुकेश कुमार सिंह, ओएसडी अजय शर्मा आदि अधिकारीगण मौजूद रहे।

ट्रांजिट लेबर हॉस्टल

रोजगार की तलाश में ग्रेटर नोएडा आने पर अप्रवासी श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तत्काल अस्थाई आवास की होती है। होटल बहुत महंगा पड़ता है। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ट्रांजिट हॉस्टल योजना के लिए के अंतर्गत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से सेक्टर ईकोटेक-06 व ईकोटेक-11 में 3000-3000 वर्ग मीटर भूमि चिंहित कर ली गई है। प्राधिकरण यह भूखंड श्रम विभाग को निशुल्क ट्रांसफर कर देगा। श्रम विभाग इसका निर्माण करेगा। इस हॉस्टल में अप्रवासी मजदूर बहुत कम किराया देकर रोजगार तलाश सकेंगे और रोजगार मिलने के बाद वे अपने लिए स्थाई आवास तलाश सकेंगे। प्राधिकरण बोर्ड के इस फैसले से हजारों अप्रवासी श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

सेक्टर अल्फा वन में बनेगी पब्लिक लाइब्रेरी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने तीसरा अहम फैसला सेक्टर अल्फा वन में पब्लिक लाइब्रेरी बनाने का लिया है। यह लाइब्रेरी 1360 वर्ग मीटर में होगी, जिसमें से 440 वर्ग मीटर में तीन मंजिला लाइब्रेरी बनेगी और बाकी एरिया में पार्किंग, शौचालय व अन्य सुविधाएं होंगी। इस लाइब्रेरी में छोटे बच्चों, छात्रों, युवाओं और सीनियर सिटीजन, सभी के लिए किताबेें उपलब्ध होंगी। इससे उन छात्रों को अधिक लाभ मिलेगा, जो पैसे देकर किताबें नहीं खरीद सकते। वे यहां न्यूनतम शुल्क देकर किताबें ईशु करा सकेंगे और अपनी परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे। इसका निर्माण कार्य भी इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे ग्रेनो, नोएडा व यीडा सिटी

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में 130 मीटर चौड़ी सड़क को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (नेशनल हाइवे-24) से जोड़ने की दिशा में कवायद तेज हो गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखा गया। इस पर सहमति बन गई है। नोएडा व यीडा की सहमति लेकर परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराने के लिए एनएचएआई को जिम्मा सौंपा था। एनएचएआई के सर्वेक्षण में दो वैकल्पिक मार्ग सामने आए। पहले विकल्प में एक मूर्ति से नाले तक डबल डेकर सड़क प्रस्तावित की गई, जबकि दूसरे में शाहबेरी से नाले के साथ लिंक रोड जोड़ने का प्रस्ताव है।

इस सड़क को बनाने के लिए बनी समिति ने पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से एक मूर्ति तक डबल डेकर सड़क बनाने का निर्णय लिया है, जिसकी लागत 756.01 करोड़ रुपये होगी। दूसरे चरण में शेष सड़क का निर्माण पूरा किया जाएगा। परियोजना की लागत यमुना एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्राधिकरण समान रूप से वहन करेंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इस फैसले से 130 मीटर चौड़ी सड़क से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी।

ग्रेटर नोएडा से ईस्टर्न पेरिफेरल तक बनेगी 105 मीटर चौड़ी सड़क

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए 105 मीटर चौड़ी सड़क को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। ग्रेटर नोएडा फेस-1 में इस सड़क का करीब 6 किलोमीटर हिस्सा पहले ही बन चुका है। अब फेस-2 में ग्राम जुनपत से ईस्टर्न पेरिफेरल तक करीब 12 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होना है। इस सड़क के अलाइनमेंट में ईस्टर्न पेरिफेरल तक रेलवे लाइन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लिंक लाइन और जीटी रोड आएंगे। इन स्थानों पर तीन ओवरब्रिज बनाया जाएगा। सड़क को 10 लेन तथा चार सर्विस लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस सड़क के लिए आवश्यक भूमि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा, जबकि निर्माण पर आने वाला खर्च एनएचएआई वहन करेगा। सड़क के दायरे में ग्रेटर नोएडा फेस-1, फेस-2 और डीएनजीआईआर क्षेत्र की भूमि शामिल है। डीएनजीआईआर क्षेत्र का विकास नोएडा प्राधिकरण कर रहा है। इसलिए इस क्षेत्र में आने वाली भूमि का अधिग्रहण नोएडा प्राधिकरण करेगा। भूमि अधिग्रहण की लागत नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 50: 50 के अनुपात में वहन करेंगे। इस प्रस्ताव पर भी बोर्ड ने मुहर लगा दी है।

रिठौरी में रेलवे लाइन पर बनेगा फुटओवर ब्रिज

ग्रेटर नोएडा। ग्राम रिठौरी के निवासियों को रेलवे लाइन पार करने में आ रही समस्या से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की पहल पर गांव में फुटओवर ब्रिज के निर्माण को बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस फुटओवर ब्रिज को बनाने के लिए वर्ष 2022 में सांसद डॉ. महेश शर्मा का पत्र प्राधिकरण को प्राप्त हुआ, जिस पर प्राधिकरण की तरफ से डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुरोध किया गया। इसके बाद दोनों महकमों की टीम ने संयुक्त निरीक्षण कर फुटओवर ब्रिज बनाने पर सहमति जताई। इसे बनाने का खर्च ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को वहन करेगा। रेलवे लाइन के ऊपर निर्माण के लिए रेलवे से स्वीकृति व एनओसी भी लेनी होगी। फुटओवर ब्रिज में रैंप, सीढ़ियों और लिफ्ट का प्रावधान किया गया है। इस प्रस्ताव पर बोर्ड ने मुहर लगा दी है।

ग्रेटर नोएडा में आवासीय भूखंडों पर निर्माण के लिए 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा की आवासीय भूखंड योजनाओं के आवंटियों को भवन निर्माण पूरा कर कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक अंतिम अवसर दिया गया है। ऐसे आवंटियों को 30 जून 2028 तक अतिरिक्त समय देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है, जिनके भूखंडों पर अभी निर्माण पूरा नहीं हुआ है या कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया गया है। यह समय विस्तार वर्तमान में प्रचलित विलंब शुल्क के साथ अप्रूव्ड किया गया है। इस अवधि के बाद आवंटन भी अगर किसी ने कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र नहीं ले लिया तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।

एनडीआरएफ के लिए 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित करने का फैसला

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा में आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए एनडीआरएफ के रीजनल रेसपोंस सेंटर (क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र) के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आवासीय सुविधा उपलब्ध कराएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने एनडीआरएफ 8वीं वाहिनी, गाजियाबाद के रीजनल रेसपोंस सेंटर सेक्टर ओमीक्रॉन-1ए में 30 फ्लैट निशुल्क आवंटित करने का प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। इसके लिए एनडीआरएफ की तरफ से भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। प्रस्ताव के अनुसार यहां तैनात कर्मी परिवार सहित निवास नहीं करेंगे, बल्कि आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई के लिए टीम के रूप में तैनात रहेंगे। आवासों का उपयोग कैंप, परिसर और स्टाफ कार्यालय के रूप में किया जाएगा। टीम की तैनाती रोटेशन के आधार पर होगी। इस फैसले से प्राकृतिक आपदा, औद्योगिक दुर्घटना, भवन गिरने, बाढ़ सहित अन्य आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आएगी।

मैकेनिकल स्वीपिंग से ग्रेटर नोएडा की सड़कों की सफाई होगी और बेहतर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर धूल-मिट्टी के नियंत्रण और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सीएक्यूएम व आईआईटी रुड़की के सुझाव पर ग्रेटर नोएडा सेंट्रल एवं ईस्ट क्षेत्र में सड़कों की पांच वर्ष के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग से कराने कराया जाएगा। इसके लिए मशीनरी प्राधिकरण उपलब्ध कराएगा और मशीनों का संचालन एवं रखरखाव आदि की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्टर पर होगी। आईआईटी रुड़की के एस्टीमेट पर प्राधिकरण ने दोनों जोन के लिए टेंडर निकाला। दोनों जोन में सड़कों की सफाई के लिए कॉन्ट्रैक्टर का चयन कर लिया गया है। बता दें कि सेंट्रल जोन के अंतर्गत सेक्टर-ईटा-1, डेल्टा-1, 2, 3, केपी-4, जीटा-1, ईटा-2, बेगमपुर, बोड़ाकी, मकौड़ा, मलकपुर, मुबारकपुर, पाली, साकीपुर, लखनावली आदि गांव हैं, जबकि ईस्ट जोन में सेक्टर-36, 37, म्यू-1, ज्यु 1, 2, 3, चाई-5, अस्तौली, डाबरा, चुहड़पुर, घरबरा, घोड़ी -बछेड़ा, जुनपत, जुनैदपुर, घंघोला देवला, अजायबपुर, अटाई मुरादपुर, दाउदपुर, खेरली, लड़पुरा, लुक्सर, मायचा, कनारसी, कासना, खानपुर, पौवारी, सलेमपुर गुर्जर, विरौंडी, विरौंडा आदि गांव शामिल हैं।

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