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होमखेलक्रिकेटटेस्ट में सबसे ज्यादा बार 0 पर आउट होने वाले दाएं हाथ के 5 बल्लेबाज

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5 right hand batsman most duck in test: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कई महान गेंदबाजों ने अपनी धारदार गेंदबाजी से दिग्गजों को छकाया, लेकिन जब बल्ला थामकर मैदान पर उतरे, तो अनचाहे रिकॉर्ड दर्ज करा बैठे. टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा बार ‘डक’ यानी शून्य पर आउट होने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाजों की लिस्ट में कर्टनी वॉल्श सबसे आगे हैं. उनके बाद क्रिस मार्टिन , ग्लेन मैक्ग्रा, इशांत शर्मा और शेन वॉर्न का नाम आता है. गेंद से कमाल करने वाले इन दिग्गजों के लिए क्रीज पर टिकना हमेशा चुनौती बना रहा.

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नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट को खेल का सबसे कठिन प्रारूप माना जाता. यहां हर गेंद एक नई परीक्षा होती है और जरा सी चूक बल्लेबाज की गिल्लियां बिखेर देती है. जब बात निचले क्रम के गेंदबाजों की आती है, तो उनके लिए क्रीज पर टिकना किसी जंग से कम नहीं होता. कई बार ये खिलाड़ी गेंदबाजी में तो इतिहास रच देते हैं, लेकिन बल्ले से शून्य पर पवेलियन लौटने का अनचाहा रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करा बैठते हैं. बात जब टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा बार ‘डक’ यानी शून्य पर आउट होने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाजों की आती है, तो लिस्ट में दुनिया के एक से बढ़कर एक दिग्गज गेंदबाजों के नाम सामने आते हैं. इन खिलाड़ियों ने गेंद से विरोधी टीमों को घुटनों पर ला दिया, लेकिन जब बल्ला थामकर मैदान पर उतरे, तो किस्मत ने बार-बार इनका साथ छोड़ दिया.

वेस्टइंडीज के महान तेज गेंदबाज कर्टनी वॉल्श (Courtney Walsh) का नाम टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है. 1984 से 2001 के बीच अपने लंबे और शानदार करियर में वॉल्श ने 132 टेस्ट मैचों की 185 पारियों में बल्लेबाजी की. इस दौरान वह 61 बार नाबाद रहे और 7.54 की औसत से 936 रन बनाए. लेकिन इसके साथ ही उनके नाम एक ऐसा अनचाहा कीर्तिमान भी जुड़ा, जिसे कोई याद नहीं रखना चाहेगा. वॉल्श अपने टेस्ट करियर में रिकॉर्ड 43 बार शून्य के स्कोर पर आउट हुए. दाएं हाथ के बल्लेबाजों में ही नहीं, बल्कि टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा डक पर आउट होने का रिकॉर्ड आज भी वॉल्श के ही नाम दर्ज है.

क्रिस मार्टिन के लिए बल्ला बना महज एक औपचारिकता
न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज क्रिस मार्टिन (Chris Martin) की जब भी बात होती है, तो उनकी धारदार स्विंग गेंदों के साथ-साथ उनकी अनूठी बल्लेबाजी शैली भी याद आती है. मार्टिन जब बल्लेबाजी करने आते थे, तो ड्रेसिंग रूम का माहौल ही बदल जाता था. 2000 से 2013 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 71 टेस्ट मैच खेलने वाले मार्टिन ने 104 पारियों में सिर्फ 123 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 12 रन रहा. उनका बल्लेबाजी औसत महज 2.36 का रहा. मार्टिन अपने करियर में 36 बार बिना खाता खोले पवेलियन लौटे. उनकी कुल पारियों के मुकाबले डक का यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, जिसने उन्हें इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर ला खड़ा किया.

कंगारू स्पीड ग्लेन मैक्ग्रा का ‘शून्य’ से नाता
ऑस्ट्रेलिया के सर्वकालिक महान तेज गेंदबाजों में शुमार ग्लेन मैक्ग्रा (Glenn McGrath) अपनी सटीक लाइन और लेंथ के लिए जाने जाते थे. मैक्ग्रा ने 1993 से 2007 तक ऑस्ट्रेलिया के स्वर्ण युग में 124 टेस्ट मैच खेले. 138 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 51 बार नाबाद रहकर 641 रन बनाए. हालांकि उनका एक अर्धशतक (61 रन) काफी मशहूर हुआ, लेकिन बल्लेबाजी में वह अक्सर संघर्ष करते ही दिखे. मैक्ग्रा अपने करियर में 35 बार शून्य के स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौटे. गेंद से बल्लेबाजों को छकाने वाले मैक्ग्रा खुद क्रीज पर ज्यादा देर टिकने में नाकाम रहे.

इशांत शर्मा भारतीय गेंदबाजी की रीढ़ का अनचाहा सफर
भारतीय तेज गेंदबाजी के मजबूत स्तंभ रहे इशांत शर्मा (Ishant Sharma) ने अपनी सटीक उछाल से दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया. 2007 से 2021 के बीच भारत के लिए 105 टेस्ट मैच खेलने वाले इशांत ने 142 पारियों में बल्लेबाजी की. इस दौरान 47 बार नाबाद रहते हुए उन्होंने 8.26 की औसत से 785 रन बनाए. लॉर्ड्स टेस्ट में उनका बनाया गया 57 रनों का अर्धशतक आज भी भारतीय प्रशंसकों के जेहन में ताजा है. हालांकि, निचले क्रम पर बल्लेबाजी के दौरान इशांत भी 34 बार बिना कोई रन बनाए आउट हुए, जिसके चलते वह सबसे ज्यादा डक पर आउट होने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाजों की लिस्ट में चौथे स्थान पर हैं.

शेन वॉर्न का 3000 से ज्यादा रन, फिर भी 34 डक का साया
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज लेग स्पिनर शेन वॉर्न (Shane Warne) इस सूची के बाकी खिलाड़ियों से काफी अलग हैं. वॉर्न केवल एक महान गेंदबाज ही नहीं थे, बल्कि निचले क्रम के एक उपयोगी और आक्रामक बल्लेबाज भी थे. 1992 से 2007 के बीच 145 टेस्ट मैचों की 199 पारियों में वॉर्न ने 17.32 की बेहतरीन औसत से 3154 रन बनाए, जिसमें 12 अर्धशतक शामिल थे. हालांकि वह कभी टेस्ट शतक नहीं बना सके और उनका सर्वोच्च स्कोर 99 रन रहा. इतने सारे रन बनाने के बावजूद, लंबे करियर और लगातार आक्रामक रुख अपनाने के कारण वॉर्न भी अपने करियर में 34 बार शून्य पर आउट हुए.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…

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