1964 में आया ये गाना आज भी काफी पसंद किया जाता है. लेकिन क्या आप जानचे हैं कि ‘लग जा गले’ की कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब इसे पहली बार फिल्म के निर्देशक राज खोसला ने पसंद नहीं किया. राज खोसला को मदन मोहन ने ये गाना सुनाया. लेकिन, उन्होंने इस गाने को रद्दी समझकर रिजेक्ट कर दिया था.
जब मनोज कुमार के पास पहुंचे मदन मोहन
मदन मोहन को अपनी धुन पर भरोसा था. उन्होंने फिल्म के लीड एक्टर मनोज कुमार का दरवाजा खटखटाया और उनसे कहा, ‘मनोज… जरा राज को समझाओ. यह धुन बहुत खास है, इसे एक बार फिर ध्यान से सुनें.’ मनोज कुमार ने मदन मोहन के हुनर पर भरोसा जताया और राज खोसला से दोबारा उस गाने को सुनने की गुजारिश की. मनोज कुमार के कहने पर राज खोसला ने जब दोबारा उस धुन को सुना, तो वे हैरान रह गए. उन्हें तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने सोचने लगे- ‘मैंने इतना खूबसूरत गाना पहली बार में रिजेक्ट कैसे कर दिया था?’
राज खोसला ने फिल्म को डायरेक्ट किया था. फिल्म की IMDb रेटिंग 7.5 है.
राग पहाड़ी पर तैयार हुआ गीत
इस गीत की खूबसूरती सिर्फ इसके बोल में नहीं, बल्कि इसकी धुन में भी छिपी है. संगीतकार मदन मोहन ने इसे राग पहाड़ी के आधार पर तैयार किया था. पहाड़ी संगीत की एक खासियत यह है कि इसमें प्रकृति, दूरी, विरह और पुकार का भाव आसानी से महसूस होता है. इसे सरल भाषा में समझें तो जैसे पहाड़ की एक तरफ कोई खड़ा होकर दूसरी तरफ अपने किसी करीबी को आवाज दे रहा हो. उस आवाज में दूरी भी है और मिलने की बेचैनी भी. ‘लग जा गले’ की धुन में भी कुछ ऐसा ही भाव सुनाई देता है. शायद यही कारण है कि गीत सुनते हुए खुशी के साथ एक हल्की उदासी भी मन में उतर जाती है.
रिलीज के वक्त हुआ फ्लॉप, आज है ब्लॉकबस्टर
इस गीत को आवाज दी लता मंगेशकर ने. लेकिन 1964 में रिलीज हुई फिल्म ‘वो कौन थी’ के इस गीत को रिलीज के तुरंत बाद लोगों की सरहना नहीं मिली. यह उस समय के टॉप चार्ट्स में भी बड़ा हिट नहीं बना. लेकिन कुछ गानों की किस्मत उनके रिलीज वाले साल से तय नहीं होती. समय उनके लिए असली पहचान लेकर आता है. ‘लग जा गले’ के साथ भी यही हुआ. धीरे-धीरे लोगों ने इस गीत को दोबारा सुना, इसकी धुन को पहचाना और इसके शब्दों में छिपे प्रेम और विरह को महसूस किया. रेडियो, टेलीविजन और बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इसे नई पीढ़ियों तक पहुंचाया. देखते ही देखते यह गीत सिर्फ पुरानी फिल्मों का एक गाना नहीं रहा, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में शामिल हो गया.
हर दौर में फिट बैठता है ये गाना
आज ‘लग जा गले’ सुनते हुए सबसे खास बात यह महसूस होती है कि यह गीत किसी एक दौर का नहीं है. प्रेम में इंतजार हो, बिछड़ने का डर हो या किसी खास मुलाकात को आखिरी बार जी लेने की इच्छा थी. इसके भाव हर दौर में लोगों को अपने लगते हैं. मदन मोहन की धुन, राजा मेहदी अली खान के शब्द और लता मंगेशकर की आवाज ने मिलकर ऐसा गीत बनाया, जिसे समय भी पुराना नहीं कर सका.
1964 में आई थी ‘वो कौन थी’
1964 में रिलीज हुई फिल्म वो कौन थी? हिंदी सिनेमा की यादगार मिस्ट्री-थ्रिलर फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म में मनोज कुमार और साधना लीड रोल में थे. साधना ने फिल्म में रहस्यमयी अंदाज में दर्शकों को खूब लुभाया. फिल्म की सबसे बड़ी पहचान इसका संगीत बना. ‘लग जा गले’ के अलावा ‘नैना बरसे रिमझिम रिमझिम’ और ‘जो हमने दास्तां अपनी सुनाई’ जैसे गीत भी बेहद लोकप्रिय हुए.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



