दिल्ली हाईकोर्ट न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने मंगलवार आठ वर्ष दस माह के बच्चे नयन मिश्रा की याचिका पर दिल्ली सरकार, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, भारत सरकार और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले को 25 सितंबर को निपटारे के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
यह याचिका बच्चे के मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए तत्काल और निर्बाध चिकित्सा उपचार की मांग करती है। याचिका अधिवक्ता अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष के माध्यम से दायर की गई है। नयन मिश्रा एसीएएन जीन से जुड़ी वृद्धि संबंधी विकार से पीड़ित है और चिकित्सकों ने उसे वृद्धि हार्मोन इंजेक्शन की सलाह दी है।
याचिका में बताया गया है कि निर्धारित उपचार के बावजूद बार-बार रुकावट आती रही। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने तीन वर्ष के इलाज का अनुमान नौ लाख रुपये बताया है। गरीब माता-पिता इतना खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता बच्चा भी न्यायालय में उपस्थित था।
यह है मामला
नयन मिश्रा का जन्म 21 अक्तूबर 2017 को हुआ। नवंबर 2022 में उसे पहली बार चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय ले जाया गया। जुलाई 2024 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भेजा गया जहां जेनेटिक जांच के बाद वृद्धि हार्मोन चिकित्सा की सलाह मिली। 11 अक्तूबर 2024 को पहली खुराक दी गई। इसके बाद इलाज कई बार बाधित हुआ। 27 जुलाई 2026 को अंतिम इंजेक्शन मिला जिसके बाद उपचार बंद हो गया। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है।
पिता ने बिहार के मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष और प्रधानमंत्री चिकित्सा राहत कोष से सहायता मांगी थी। 19 अगस्त 2026 को कानूनी नोटिस भेजा गया था लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। याचिका में अनुच्छेद 14 और 21 के तहत जीवन तथा स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए निरंतर इलाज सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



