Image Slider

नई दिल्ली.  रक्षाबंधन का त्योहार आते ही घरों में एक अलग तरह की रौनक दिखाई देने लगती है. कहीं बहनें भाई की कलाई पर राखी सजाने की तैयारी करती हैं, तो कहीं दूर बैठे भाई-बहन बचपन की पुरानी यादों में लौट जाते हैं. लेकिन इस त्योहार की भावनाओं को अगर किसी एक आवाज और गीत में समेटना हो, तो सबसे पहले दिमाग में सिर्फ एक ही गाना आता है. वो गाना ‘भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ है. करीब 7 दशक पहले आया यह गीत आज भी जब राखी के मौके पर बजता है तो बचपन की अनगिनत यादें ताजा हो जाती हैं.

करीब 7 दशक पहले 1959 में फिल्म ‘छोटी बहन’ आई थी जिससे ये गाना ‘भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ निकला था. नंदा और महमूद स्टारर फिल्म छोटी बहन की कहानी एक भाई-बहन की जोड़ी के इर्द-गिर्द बुनी गई थी. इसमें बलराज साहनी ने भी अहम रोल अदा किया था. फिल्म का निर्देशन एल. वी. प्रसाद ने किया था और संगीत की जिम्मेदारी शंकर-जयकिशन की जोड़ी के पास थी.

भाई-बहन की कहानी बनी क्लासिक कल्ट

‘छोटी बहन’ की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां रिश्तों, जिम्मेदारियों और भाई-बहन के प्यार को बेहद भावुक तरीके से दिखाया गया है. नंदा का किरदार मीना अपने भाइयों से गहरा लगाव रखता है. फिल्म की कहानी में परिवार के उतार-चढ़ाव के बीच भाई-बहन का रिश्ता लगातार भावनाओं का केंद्र बना रहता है.

अमर हो गया गीत

गाना ‘भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना’ खूबसूरती से इस रिश्ते की बारीकी को बयां करता है. इस गीत की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है. लता मंगेशकर की आवाज में बहन का प्यार, उम्मीद और हल्की-सी भावुकता वाला ये गाना सीधे दिल को छू जाता है. गीतकार शैलेंद्र ने इस गाने में किसी भारी-भरकम शब्दावली का सहारा नहीं लिया. उन्होंने बस एक बहन के दिल की वह बात लिख दी, जो शायद हर बहन अपने भाई से कहना चाहती है. राखी बांधते हुए बहन की सबसे बड़ी इच्छा यही होती है कि भाई इस रिश्ते को हमेशा निभाए और उसे कभी न भूले.

इस गाने के बोल कुछ ऐसे हैं, ‘भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना, भैया मेरे, छोटी बहन को न भुलाना, देखो ये नाता निभाना, निभाना, भैया मेरे…ये दिन ये त्योहार खुशी का, पावन जैसे नीर नदी का भाई के उजले माथे पे, बहन लगाए मंगल टीका, झूमे ये सावन सुहाना, सुहाना, भैया मेरे…’

बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही ‘छोटी बहन’

लता मंगेशकर की आवाज ने इन शब्दों में ऐसी मासूमियत भर दी कि गीत सुनते हुए लगता है जैसे कोई बहन सचमुच अपने भाई के सामने बैठकर उससे मन की बात कर रही हो. दशकों बाद भी राखी के मौके पर ये गाना अपने आप ही सबके जहन में आ जाता है.

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||