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होमखेलक्रिकेटवैभव सूर्यवंशी को गुमनाम गेंदबाज ने किया आउट, कौन हैं बिश्वोरजीत कोंथौजम

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Who is Bishworjit Konthoujam: बिश्वोरजीत कोंथौजम ने उस वक्त सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने वैभव सूर्यवंशी को आउट कर दिया. दिलचस्प बात यह है कि कभी बॉक्सिंग रिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाले बिश्वोरजीत का पहला प्यार क्रिकेट नहीं था. कंधे की चोट के बाद उन्होंने बॉक्सिंग छोड़कर क्रिकेट को अपनाया. मणिपुर के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने और इंग्लैंड के क्लब में खेलने वाले पहले खिलाड़ी बनने के बाद, अब दलीप ट्रॉफी में वैभव का विकेट लेना उनके संघर्षपूर्ण सफर का एक नया अध्याय बन गया है.

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बिश्वोरजीत कोंथौजम ने वैभव सूर्यवंशी को बनाया अपना शिकार.

नई दिल्ली. तेज गेंदबाज बिश्वोरजीत कोंथौजम इस समय सुर्खियों में हैं. बेंगलुरु में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल मुकाबले में नॉर्थ ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे इस गेंदबाज ने वैभव सूर्यवंशी को अपना शिकार बनाया. यह मुकाबला कई मायनों में खास रहा, क्योंकि यह वैभव सूर्यवंशी का दलीप ट्रॉफी डेब्यू था. ईस्ट जोन के नए उप-कप्तान वैभव ने पारी की शुरुआत अभिमन्यु ईश्वरन के साथ की थी. हालांकि, पहली पारी में वह कुछ खास कमाल नहीं कर सके और सस्ते में पवेलियन लौटे गए.

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने अपनी पारी की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की और आते ही दो शानदार चौके जड़े. दोनों ही चौके उन्होंने बिश्वोरजीत कोंथौजम (Bishworjit Konthoujam) की गेंदों पर लगाए. पहला चौके के लिए उन्होंने बिश्वोरजीत की अंदर आती गेंद को मिड-विकेट की दिशा में खेला, जबकि अगली ही गेंद पर कवर ड्राइव लगाकर एक और बेहतरीन चौका बटोरा. लेकिन बिश्वोरजीत ने जल्द ही शानदार वापसी करते हुए इस 15 वर्षीय वैभव को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. वैभव ने पॉइंट के ऊपर से कट शॉट खेलने का प्रयास किया, लेकिन गेंद सीधी गली में खड़े फील्डर के हाथ में चली गई. वैभव अपनी पहली पारी में केवल 6 गेंदों पर 2 चौकों की मदद से 8 रन बनाकर आउट हो गए.

बिश्वोरजीत कोंथौजम ने वैभव सूर्यवंशी को बनाया अपना शिकार.

बॉक्सिंग के रिंग से क्रिकेट की पिच तक का सफर
बिश्वोरजीत कोंथौजम के लिए क्रिकेट तक का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट उनका पहला प्यार नहीं था. साल 2025 में ‘इम्फाल रिव्यू ऑफ आर्ट्स एंड पॉलिटिक्स’ (IRAP) को दिए गए एक इंटरव्यू में इस 30 वर्षीय तेज गेंदबाज ने बताया था कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक मुक्केबाज के रूप में की थी. 2014-15 के सत्र के दौरान उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में आयोजित एक बॉक्सिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था और उसमें गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उस टूर्नामेंट से लौटने के बाद बिश्वोरजीत को कंधे में चोट लग गई, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक आराम करने की सलाह दी गई. ठीक उसी दौरान उनके स्थानीय इलाके में एक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा था. मणिपुर क्रिकेट एसोसिएशन के मौजूदा सचिव लैशराम रोरेन ने उन्हें देखा और क्रिकेट को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने ही बिश्वोरजीत को एक तेज गेंदबाज के रूप में आगे बढ़ने की सलाह दी. इसके बाद उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया. उन्होंने बॉक्सिंग से धीरे-धीरे दूरी बनानी शुरू कर दी और अपना पूरा ध्यान क्रिकेट पर केंद्रित कर दिया. उन्होंने कई स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट खेले और अपनी टीम को कई खिताब जिताए.

घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड और उपलब्धियां.
बिश्वोरजीत के करियर में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2018-19 का घरेलू सत्र रहा, जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मणिपुर क्रिकेट एसोसिएशन को पूर्ण मान्यता दी. इसके बाद मणिपुर के खिलाड़ियों के लिए रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट्स में खेलने के रास्ते खुल गए. बिश्वोरजीत ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया. उन्होंने 2018-19 रणजी ट्रॉफी सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए मणिपुर के लिए सबसे ज्यादा विकेट चटकाए. उन्होंने मात्र 8 मैचों में कुल 30 विकेट अपने नाम किए. इसके बाद साल 2025 में उन्होंने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब वे लिस्ट-ए क्रिकेट में 50 विकेट पूरे करने वाले नॉर्थ ईस्ट जोन के पहले क्रिकेटर बने.

इंग्लैंड में इतिहास रचने वाले मणिपुर के पहले खिलाड़ी
साल 2025 में इस दाएं हाथ के मीडियम पेसर ने एक और बड़ी छलांग लगाई. उन्होंने इंग्लैंड के प्रतिष्ठित क्लब ‘टाइनेमाउथ क्रिकेट क्लब’ के साथ करार किया और वे इंग्लैंड के किसी क्लब से खेलने वाले मणिपुर के पहले क्रिकेटर बन गए. क्लब के साथ जुड़ने के बाद बिश्वोरजीत ने कहा था कि यह उपलब्धि सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे मणिपुर और भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा था कि इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव से उन्हें अपनी गेंदबाजी और कौशल को निखारने का मौका मिलेगा, जिसका फायदा वे अपने राज्य के युवाओं को दे सकेंगे. उनका मुख्य उद्देश्य इस अवसर का उपयोग करके मणिपुर और पूरे देश के युवा क्रिकेटरों के लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते तैयार करना है. दलीप ट्रॉफी के इस बड़े मंच पर वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज का विकेट लेना बिश्वोरजीत कोंथौजम के अब तक के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक सफर का एक और शानदार अध्याय बन गया है.

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…

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