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भविष्य मालिका मूलतः उड़िया (ओड़िया) भाषा में रचित एक प्राचीन ग्रंथ है। इस ग्रंथ की रचना 15वीं-16वीं शताब्दी में संत अच्युतानंद दास और अन्य पंचसखा मुनियों द्वारा की गई थी। भविष्य मालिका के मूल पाठ में “पाकिस्तान” शब्द का प्रयोग नहीं मिलता, क्योंकि इस ग्रंथ की रचना के समय (लगभग 500 वर्ष पूर्व) ‘पाकिस्तान’ नाम का कोई देश अस्तित्व में ही नहीं था। मूल ओड़िया पदों में इस क्षेत्र और वहां के शासकों का उल्लेख “यवन” (Yavana), “म्लेच्छ” (Mlechha), “पश्चिम देश” या “उत्तर-पश्चिम सीमा” के रूप में किया गया है।

 

हालांकि पंडित काशीनाथ मिश्र ने अपनी पुस्तक ‘भविष्य मालिका पुराण’ में ओड़िया के प्राचीन पदों का हिंदी अनुवाद और व्याख्या करते हुए आधुनिक देश ‘पाकिस्तान’ नाम का प्रत्यक्ष संदर्भ दिया है। प्राचीन मूल ओड़िया लिपियों में ‘पाकिस्तान’ शब्द न होकर ‘यवन राष्ट्र’, ‘म्लेच्छ देश’ और ‘सिंधु क्षेत्र’ लिखा है, लेकिन पंडित काशीनाथ मिश्र ने अपने हिंदी अनुवाद ‘भविष्य मालिका पुराण’ में इन सभी पदों को सीधे पाकिस्तान से जोड़कर ही व्याख्यायित किया है। व्याख्या में जिस मुख्य पद का हवाला दिया जाता है, वह सिंधु क्षेत्र के विनाश से जुड़ा है:- “सिंधु नदी कुलि ध्वंस हेब म्लीछ…।” सिंधु नदी का क्षेत्र पाकिस्तान में ही है।

 

पाकिस्तान से संबंधित मुख्य 5 बातें:

संत अच्युतानंद दास और पंचसखाओं द्वारा रचित भविष्य मालिका (उड़िया ग्रंथ) में कलयुग के अंत और तीसरे विश्व युद्ध के संदर्भ में कई भविष्यवाणियां की गई हैं। इनमें पाकिस्तान और भारत के संबंधों तथा उसके अंत को लेकर भी 5 प्रमुख बातें प्रमुखता से बताई गई हैं। 

 

1. भारत-पाकिस्तान के बीच भीषण युद्ध: भविष्य मालिका के अनुसार, पाकिस्तान भारत पर आक्रमण करेगा और दोनों देशों के बीच एक अत्यंत विनाशकारी युद्ध छिड़ेगा। इस युद्ध का मुख्य कारण कश्मीर और सिंधु जल बनेगा।

 

2. 13 इस्लामिक देशों का गठबंधन: युद्ध के दौरान पाकिस्तान भारत के खिलाफ 13 मुस्लिम/इस्लामिक राष्ट्रों और चीन के साथ मिलकर एक बड़ा सैन्य गठबंधन बनाएगा। ये सभी देश एकजुट होकर भारत को घेरने की कोशिश करेंगे।

 

3. तीसरे विश्व युद्ध (WW3) का रूप लेना: भारत और पाकिस्तान का यह क्षेत्रीय संघर्ष धीरे-धीरे फैलेगा और अंततः तृतीय विश्व युद्ध में बदल जाएगा। इसमें परमाणु हथियारों और मिसाइलों का इस्तेमाल होने का उल्लेख है।

 

4. पाकिस्तान का पूर्ण विनाश व नक्शे से मिटना: ग्रंथ के अनुसार, इस युद्ध के अंत में भारत एक प्रचंड महाशक्ति बनकर उभरेगा। पाकिस्तान युद्ध में पराजित होगा और उसका अस्तित्व एक स्वतंत्र देश के रूप में समाप्त हो जाएगा; वह कई टुकड़ों में बंट जाएगा।

 

5. अखंड भारत का पुनर्गठन: पाकिस्तान के पतन और युद्ध के समापन के बाद, वह भूभाग पुनः भारत का हिस्सा बन जाएगा और इस प्रकार अखंड भारत का निर्माण होगा तथा पूरे क्षेत्र में सनातन संस्कृति की पुनः स्थापना होगी।

 

1. यवन (मुस्लिम राष्ट्र/शासक) द्वारा आक्रमण का पद

ओड़िया भविष्य मालिका में भारत पर होने वाले अंतिम युद्ध का वर्णन करते हुए संत अच्युतानंद लिखते हैं:

“यवन जेते हेबे एकत्रीभुत,

उत्तरे-पश्चिमे करिबे पात।

कटक नगर रे पडिब ढऊँ,

भारत वर्ष रे किछि न थिब अऊँ।”

अर्थ: उत्तर और पश्चिम दिशा से सभी यवन (म्लेच्छ/विदेशी शत्रु बल) एकजुट होकर भारत पर आक्रमण करेंगे। (शोधकर्ता इस ‘पश्चिम और उत्तर’ के गठबंधन को पाकिस्तान, उसके सहयोगी इस्लामिक देशों और चीन से जोड़कर देखते हैं।)

 

2. 13 म्लेच्छ राष्ट्रों का संघ

युद्ध में भारत के विरुद्ध बनने वाले महासंघ के विषय में ग्रंथ में लिखा है:

“तेरश म्लेच्छ जे एकत्रित हेबे,

भारत माता को पीडा से देबे।

पूर्वे ओ पश्चिमे घेरिबे आसि,

सत्य धर्म हेब अंत रे प्रकाशि।”

अर्थ: 13 म्लेच्छ/अधार्मिक देश एकजुट होकर भारत माता को पीड़ा देने का प्रयास करेंगे। वे पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं से घेरेंगे, लेकिन अंततः सत्य और धर्म की विजय होगी। (यहां पश्चिमी सीमा के मुख्य सूत्रधार के रूप में पाकिस्तान का संदर्भ माना जाता है।)

 

3. यवन शासन/सत्ता के अंत का पद

यवन (शत्रु) शक्तियों के पराभव और उनके विनाश के संबंध में पद है:

“यवन कुल जे हेबे विनाश,

धर्म राज्य पुनि हेब प्रकाश।

सिंधु नदी कुलि ध्वंस हेब म्लीछ,

रहिय न थिबे किछि न थिबे पछि।”

अर्थ: अधर्म में लिप्त यवन कुल का विनाश होगा और पुनः धर्म राज्य की स्थापना होगी। सिंधु नदी के तट (जो वर्तमान पाकिस्तान में है) पर म्लेच्छों का विनाश होगा और वहां कुछ शेष नहीं बचेगा।

 

महत्वपूर्ण तथ्य (शोधकर्ताओं का दृष्टिकोण)

शब्दों का अनुवाद: भविष्य मालिका के आधुनिक व्याख्याकार ओड़िया शब्दों ‘यवन’, ‘म्लेच्छ’ और ‘सिंधु पार’ का अनुवाद आधुनिक परिप्रेक्ष्य में ‘पाकिस्तान’ और उसके सहयोगी देशों के रूप में करते हैं।

भौगोलिक संदर्भ: ग्रंथ में “सिंधु नदी”, “गांधार” (कंधार/अफगानिस्तान) और “पश्चिम सीमा” के जिन क्षेत्रों में युद्ध का उल्लेख है, वे आज पाकिस्तान और उसके आसपास के भूभाग में आते हैं।

ध्यान दें: यह विवरण पौराणिक ग्रंथों व मान्यताओं पर आधारित लोक-भविष्यवाणियां हैं।)

 

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