-निवेश से पहले लक्ष्य, समयावधि और जोखिम क्षमता को समझना जरूरी: रविंद्र तिवारी
-नियमित निवेश के जरिए लंबी अवधि में आर्थिक लक्ष्यों को मजबूत करने पर जोर
-म्यूचुअल फंड में रिटर्न निश्चित नहीं, इसलिए सोच-समझकर और अनुशासन के साथ करें निवेश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। आज के समय में केवल पैसा बचाकर रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बचत को सही दिशा में निवेश करना भी जरूरी हो गया है। बढ़ती महंगाई और भविष्य की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए निवेशकों को अपनी आय और बचत के अनुरूप ऐसी रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिससे लंबे समय में धन का निर्माण किया जा सके। म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में धन सृजन का एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसमें निवेश करने से पहले जोखिम क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और निवेश की अवधि को समझना बेहद जरूरी है। वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी के अनुसार, निवेश का उद्देश्य केवल आज की जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए मजबूत आधार तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बैंक की सावधि जमा पर ब्याज दरें करीब छह से सात प्रतिशत के आसपास देखने को मिल रही हैं। महंगाई और कर को ध्यान में रखने के बाद वास्तविक लाभ इससे कम हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को अपनी पूरी बचत किसी एक विकल्प में रखने के बजाय अलग-अलग निवेश साधनों पर विचार करना चाहिए।
रविंद्र तिवारी ने बताया कि नियमित निवेश के लिए व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी एक उपयोगी माध्यम हो सकता है। इसके जरिए निवेशक अपनी आय के अनुसार हर महीने एक निश्चित राशि निवेश कर सकता है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान एक साथ बड़ी राशि लगाने के बजाय नियमित रूप से निवेश करने की आदत बनती है। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के निवेश में अनुशासन और निरंतरता काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि जिन निवेशकों के पास एकमुश्त बड़ी राशि उपलब्ध है, वे ऋण आधारित कोष से चरणबद्ध तरीके से शेयर आधारित कोष में राशि स्थानांतरित करने की रणनीति पर भी विचार कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में पूरी राशि एक साथ बाजार में लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश किया जाता है। हालांकि, ऐसी रणनीति अपनाने से पहले निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति को समझना चाहिए।
वित्तीय सलाहकार ने कहा कि पांच वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए निवेश करने वाले लोग अपनी शोध, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर विभिन्न श्रेणियों के म्यूचुअल फंड का अध्ययन कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर एचडीएफसी फ्लेक्सी कैप फंड, पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड, निप्पॉन इंडिया लार्ज कैप फंड और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लार्ज कैप फंड जैसे विकल्पों का अध्ययन करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केवल अध्ययन के लिए उदाहरण हैं और किसी भी निवेश निर्णय से पहले व्यक्तिगत वित्तीय सलाह लेना उचित है। रविंद्र तिवारी ने कहा कि म्यूचुअल फंड में बाजार से जुड़ा जोखिम होता है और इसमें मिलने वाला रिटर्न निश्चित या गारंटीड नहीं होता।
इसलिए केवल पिछले प्रदर्शन को देखकर निवेश करना उचित नहीं है। निवेशक को योजना की प्रकृति, जोखिम, शुल्क, निवेश अवधि और अपने वित्तीय उद्देश्य को समझकर ही निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा, विवाह, घर खरीदने, सेवानिवृत्ति या भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जैसे लक्ष्यों के लिए समय रहते निवेश शुरू करना बेहतर हो सकता है। छोटी राशि से नियमित निवेश की शुरुआत भी लंबे समय में बड़ा वित्तीय आधार तैयार करने में मदद कर सकती है। उनका कहना है कि बचत जरूरी है, लेकिन बचत को लक्ष्य आधारित और अनुशासित निवेश में बदलना धन सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
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