विनोद तावड़े बिहार चुनाव में दिखा चुके हैं कमाल
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को मिली बड़ी जीत में विनोद तावड़े क बड़ा योगदान माना जाता है. 202 सीटों के प्रचंड बहुमत को हासिल करने के लिए विनोद तावड़े ने सबसे बड़ा काम एनडीए के तमाम घटक दलों के बीच सामंजस्य बिठाकर किया. बतौर बिहार प्रभारी तावड़े ने नीतीश कुमार, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी को सीट शेयरिंग के दौरान समय रहते मना लिया. माना जाता है कि चिराग पासवान जब अपनी डिमांड पर अड़े नजर आए तो नित्यानंद राय को उनके घर भेजने का आइडिया विनोद तावड़े का ही था. तावड़े को बखूबी मालूम था कि नित्यानंद राय का चिराग पासवान के घर से व्यक्तिगत रिश्ता है. इससे अलावा विनोद तावड़े ने ही लोक गायिका मैथिली ठाकुर समेत कई युवा नेताओं को चुनाव से ठीक पहले पार्टी से जोड़ा और उन्हें चुनाव में भी उतारा, जिसका सीधा फायदा गठबंधन को हुआ.
केरल चुनाव में भी जी जान से लड़े विनोद तावड़े
बिहार में शानदार सफलता दिलाने के बाद विनोद तावड़े को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने केरल चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी. विनोद तावड़े भलीभांति समझ रहे थे कि केरल में उनकी पार्टी बीजेपी संगठन स्तर पर ही काफी कमजोर है, इसलिए बड़ी सफलता की गुंजाइश बेहद कम है. इसके बाद भी विनोद तावड़े वहां जी जान लगाकर मेहनत करते रहे, जिसके चलते बीजेपी यहां नेमोम, कझाकूटम और चतन्नूर सीट जीत पाई.
हरियाणा में भी तावड़े ने दिलाई जीत
2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में विनोद तावड़े ने प्रभारी रहते हुए मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ एंटी इंकंबेसी होने के बाद भी पार्टी की जीत फिक्स की. इससे पहले इसके अलावा 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी बीजेपी ने विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया. बीजेपी प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू बड़े अंतर से जीतकर राष्ट्रपति बनीं. 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में भी राधाकृष्ण की जीत फिक्स करने की जिम्मेदारी तावड़े को मिली जिसे उनहोंने बखूबी निभाया.
बचपन से ही विनोद तावड़े में है संगठन चलाने का हुनर
यूपी में पिछले छह महीने से सक्रिय हैं विनोद तावड़े
विनोद तावड़े पिछले छह महीने से पूरे उत्तर प्रदेश में सक्रिय दिख रहे हैं. पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट विस्तार में भी विनोद तावड़े का असर दिखा था. इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जब अपनी टीम की घोषणा की तो उसमें भी विनोद तावड़े का प्रभाव दिखा था. इसके बाद से लोग अनुमान लगा रहे थे कि हो सकता है कि यूपी प्रभारी का जिम्मा विनोद तावड़े को मिल सकता है.
तेजस्वी को हराया अब अखिलेश की बारी
विनोद तावड़े ने अपनी रणनीति को जमीन पर उतारकर बिहार चुनाव में तेजस्वी यादव को बुरी तरह से धराशायी किया. सरकार बनाने का दावा कर रहे तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी महज 25 सीटों पर सिमट गई. अब विनोद तावड़े को समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव को हराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. गौर करने वाली बात यह है कि बिहार में भी तेजस्वी यादव का कांग्रेस के साथ गठबंधन था तो ठीक उसी तरह यूपी में अखिलेश यादव का भी राहुल गांधी की पार्टी से गठबंधन है. आरजेडी की तरह ही सपा के मुस्लिम+यादव कोट वोटबैंक हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि विनोद तावड़े का बिहार वाला अनुभव उत्तर प्रदेश में सौ फीसदी काम करेगा.
विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत तय करनी है तो उन्हें सबसे पहले पार्टी के भीतर के तमाम नेताओं की नाराजगी को दूर कर सबको एक टीम के रूप में तैयार करना होगा. दूसरी बड़ी चुनौती गठबंधन के घटकदलों के बीच सीट शेयरिंग को आराम से निपटाना होगा. वहीं उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बीजेपी की केंद्र और राज्य की टीम के बीच एक अच्छे सेतु का रोल निभाना होगा.
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