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Paddy crop fertilizer : धान की फसल में दोपहर के समय यूरिया डालना बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है. तेज धूप और ज्यादा तापमान की वजह से यूरिया पौधे को मिलने की जगह हवा में उड़कर बेकार हो जाता है. इससे किसानों की लागत तो बढ़ती ही है, पैदावार भी घट जाती है. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन लोकल 18 से बताते हैं कि खाद डालने के समय का सही ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अगर आप दोपहर की कड़क धूप में यूरिया का छिड़काव करेंगे तो 30% से 50% तक यूरिया वाष्पीकरण के जरिए हवा में उड़कर नष्ट हो सकता है. धूप तेज में यूरिया के दाने धान के पौधों की पत्तियों पर चिपक जाते हैं, जो पत्तियों को जला देते हैं. खाद बेकार जाने से किसानों का पैसा पानी में बह जाता है
शाहजहांपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन लोकल 18 से बताते हैं कि दोपहर के वक्त जब सूरज की तेज किरणें खेत पर पड़ती हैं, तो मिट्टी का तापमान बहुत बढ़ जाता है. यूरिया जैसे ही इस गर्म और नमी वाली मिट्टी के संपर्क में आता है, वह तेजी से अमोनियम कार्बोनेट में बदलने लगता है. इसके बाद यह केमिकल अमोनिया गैस का रूप ले लेता है. हवा के साथ मिलकर यह गैस उड़ जाती है और पौधों तक नहीं पहुंच पाती है.
अगर आप दोपहर की कड़क धूप में यूरिया का छिड़काव करते हैं, तो लगभग 30% से 50% तक यूरिया वाष्पीकरण यानी अमोनिया वॉलेटलाइजेशन के जरिए हवा में उड़कर नष्ट हो जाता है. इसका मतलब यह हुआ कि आपकी आधी खाद बिना किसी काम के बेकार हो जाती है. पौधे इसका इस्तेमाल ही नहीं कर पाते हैं और आपकी मेहनत पर पानी फिर जाता है.
दोपहर में धूप तेज होने पर यूरिया के दाने यदि धान के पौधों की पत्तियों पर चिपक जाते हैं, तो वे पत्तियों को जला देते हैं. पत्तियों पर भूरे धब्बे पड़ जाते हैं जिससे उनकी प्रकाश संश्लेषण यानी भोजन बनाने की क्षमता कम हो जाती है. इससे पौधा कमजोर होने लगता है और उसकी ग्रोथ एकदम रुक जाती है, जिससे आपकी पूरी फसल प्रभावित होती है.
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यूरिया का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाने के कारण पौधों को जरूरी नाइट्रोजन सही मात्रा में नहीं मिल पाती है. पौधे कमजोर रह जाते हैं और धान की बालियां अच्छी नहीं बनती हैं. खाद बेकार जाने से किसानों का पैसा पानी में बह जाता है और कम उपज मिलने से मुनाफा बहुत ज्यादा घट जाता है. यह दोहरी मार किसान पर पड़ती है.
कड़क धूप में यूरिया डालने से मिट्टी के ऊपरी हिस्से में केमिकल का संतुलन अचानक बिगड़ जाता है. तेज गर्मी और यूरिया के एक साथ मिलने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और फायदेमंद बैक्टीरिया मरने लगते हैं. ये सूक्ष्मजीव जमीन की उर्वरता बनाए रखने में मदद करते हैं. इनके नष्ट होने से खेत की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है.
शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन के मुताबिक, जब यूरिया वाष्पीकृत होकर अमोनिया गैस बनता है, तो वह सीधे हमारे वायुमंडल में घुल जाता है. इससे आसपास की हवा दूषित होती है और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है. कुछ नाइट्रोजन गैस बनकर उड़ती है जो ग्रीनहाउस प्रभाव को बढ़ाती है. इसलिए गलत समय पर खाद डालना पर्यावरण के लिहाज से भी ठीक नहीं माना जाता है.
डॉ. हादी हुसैन बताते हैं कि धान की फसल में यूरिया हमेशा सुबह के समय या फिर शाम के वक्त ही छिड़कना चाहिए, जब धूप कम हो. खाद डालते समय खेत में हल्का पानी या नमी होनी चाहिए. इससे यूरिया आसानी से घुलकर जड़ों तक पहुंच जाता है और उड़ता नहीं है. सही समय पर खाद डालने से पौधों को 90% तक पोषण पूरी तरह मिल पाता है.
डॉ. हादी हुसैन बताते हैं कि यूरिया को बेकार होने से बचाने के लिए नीम कोटेड यूरिया का ही इस्तेमाल करें. यह धीरे-धीरे घुलता है और लंबे समय तक पौधों को पोषण देता है. खाद को हमेशा दो से तीन बार में थोड़ा-थोड़ा करके दें. यूरिया छिड़कने के तुरंत बाद हल्का पानी लगाने से खाद सीधे जड़ों में चली जाती है और नुकसान से पूरी तरह बचाव होता है.
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