Last Updated:
IIT गुवाहाटी के रिसर्चर्स ने पानी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का सस्ता और असरदार तरीका खोजा है. इसके लिए उन्होंने एक खास कैटलिस्ट तैयार किया है. यह नया कैटलिस्ट नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा. अभी तक हाइड्रोजन बनाने के लिए महंगे मेटल्स का इस्तेमाल होता था. अब सस्ते निकल सॉल्ट के जरिए इसे बनाया जा सकेगा.
IIT गुवाहाटी के रिसर्चर्स ने खोजा पानी से सस्ता ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का नायाब तरीका. (AI Generated Photo)
नई दिल्ली: IIT गुवाहाटी के रिसर्चर्स ने एनर्जी सेक्टर में बड़ा धमाका कर दिया है. उन्होंने पानी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का एक बेहद सस्ता और नया कैटलिस्ट डेवलप किया है. यह खोज भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को एक नई रफ्तार देगी. पूरी दुनिया क्लीन एनर्जी की तरफ तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में हाइड्रोजन को एक बहुत अहम विकल्प माना जा रहा है. जब हाइड्रोजन से एनर्जी बनती है तो सिर्फ पानी निकलता है. इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है. पेट्रोलियम फ्यूल्स की तरह इससे प्रदूषण नहीं फैलता है. यह एक बहुत बड़ा फायदा है. इस नई तकनीक से सस्टेनेबल एनर्जी सोर्सेज की तरफ हमारा ट्रांजिशन काफी आसान हो जाएगा. लंबे समय से वैज्ञानिक एक सस्ते विकल्प की तलाश में थे. अब जाकर उन्हें कामयाबी मिली है.
अभी तक कैसे बनती है हाइड्रोजन और इसमें क्या दिक्कतें आती हैं?
हाइड्रोजन का इस्तेमाल फ्यूल सेल्स में काफी ज्यादा होता है. फर्टिलाइजर्स बनाने जैसे कई इंडस्ट्रियल प्रोसेस में भी यह काम आती है. लेकिन अभी 90 से 95 परसेंट तक हाइड्रोजन फॉसिल फ्यूल्स से बनती है. नेचुरल गैस से ‘ग्रे’ और ‘ब्लू’ हाइड्रोजन बनाई जाती है. वहीं कोयले से ‘ब्राउन’ और ‘ब्लैक’ हाइड्रोजन का प्रोडक्शन होता है. इन तरीकों से भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसेस निकलती हैं. इससे हाइड्रोजन इस्तेमाल करने का पर्यावरण वाला फायदा पूरी तरह से खत्म हो जाता है.
पानी हाइड्रोजन का सबसे साफ सोर्स है. लेकिन पानी से इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन निकालने के लिए अच्छे कैटलिस्ट चाहिए होते हैं. अभी जो सबसे असरदार कैटलिस्ट मौजूद हैं वो बहुत महंगे नोबल मेटल्स से बनते हैं. इस वजह से उनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना काफी मुश्किल हो जाता है.
IIT के वैज्ञानिकों ने इस खर्च को कम करने के लिए क्या कमाल किया?
इस महंगे खर्च की समस्या को सुलझाने के लिए रिसर्चर्स ने एक शानदार तरीका निकाला. IIT गुवाहाटी की टीम ने पानी से हाइड्रोजन अलग करने के लिए निकल सॉल्ट का इस्तेमाल किया. निकल सॉल्ट काफी सस्ता होता है और बाजार में आसानी से मिल जाता है. लेकिन सिर्फ निकल सॉल्ट से हाइड्रोजन का प्रोडक्शन ज्यादा अच्छा नहीं होता है. इसमें स्टैबिलिटी की भी काफी कमी होती है. इसलिए रिसर्चर्स ने निकल सॉल्ट को एन्थ्रेसीन बेस्ड ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल के साथ मिला दिया.
इस स्टडी को लीड करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर अक्शई कुमार ने कहा, ‘हमने कोऑर्डिनेशन पॉलीमर बेस्ड कैटलिस्ट को रूम टेम्परेचर पर ही सिंथेसाइज किया’. इसके लिए टीम ने खास अल्ट्रासोनिक वेव्स की मदद ली.
About the Author
दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
और पढ़ें
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||


