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नई दिल्ली (NEET UG 2026 Paper Leak). देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट यूजी 2026’ के पेपर लीक मामले में बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है. अदालत ने इस पूरे मामले का विस्तृत आदेश जारी कर दिया है. इससे स्पष्ट हो गया है कि इस धांधली को अंजाम देने के लिए कितना बड़ा जाल बिछाया गया था. 12 अगस्त 2026 को स्पेशल जज अजय गुप्ता की तरफ से सुनाए गए फैसले में साफ कहा गया है कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) सभी 13 आरोपी इस पेपर लीक सिंडिकेट का हिस्सा थे.

अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ ऐसे भारी और पक्के सबूत मिले हैं, जिनसे सीधे तौर पर इस साजिश में उनकी भागीदारी नजर आती है. सबसे चौंकाने वाली बात है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के जिन 3 विषय विशेषज्ञों पर पेपर की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही भरोसा तोड़ा. इन लोगों ने न केवल गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन किया, बल्कि पैसों के लालच में नीट यूजी पेपर लीक करवा दिया. जानिए अदालत के इस आदेश में और कौन-कौन से बड़े खुलासे हुए हैं.

13 आरोपियों ने मिलकर बनाया था नीट यूजी पेपर लीक सिंडिकेट

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सभी 13 आरोपियों ने आपस में मिलकर आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रची थी. इस गिरोह का हर सदस्य पेपर को लीक करने, उसे आगे बांटने और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने में बराबर का भागीदार था. किसी ने पेपर बाहर निकाला तो किसी ने उसे मार्केट में बेचने का काम संभाला.

NTA के 3 सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स पर गंभीर आरोप

मामले में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब अदालत ने माना कि 3 विषय विशेषज्ञों ने एनटीए के साथ धोखा किया है. इन एक्सपर्ट्स ने परीक्षा से जुड़ी कोई भी सामग्री किसी से शेयर न करने का लिखित हलफनामा दिया था. कोर्ट के मुताबिक, उनका यह कदम न केवल ‘आपराधिक विश्वासघात’ (Criminal Breach of Trust) है, बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ‘आपराधिक दुराचार’ की श्रेणी में भी आता है.

कोचिंग की आड़ में लाखों में बेचा गया पेपर

अदालत के आदेश में कहा गया है कि मुख्य आरोपी (A-1 से A-3) अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर अवैध कमाई के चक्कर में पड़े थे. इन्होंने कोचिंग देने के बहाने लीक हुए प्रश्नपत्रों और उनके जवाबों को अन्य आरोपियों और उम्मीदवारों को मोटी रकम में बेचा.. यानी पढ़ाई कराने के नाम पर धांधली का पूरा व्यापार चलाया जा रहा था.

सबूत मिटाने के लिए नष्ट किए गए फोन और डिवाइस

अदालत ने यह भी नोट किया कि जैसे ही मामले की भनक लगी, आरोपियों ने सबूत छिपाने की हर मुमकिन कोशिश की. उन्होंने नीट यूजी पेपर लीक से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, चैट और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस (मोबाइल, लैपटॉप आदि) को नष्ट कर दिया या फिर कहीं गायब कर दिया. हालांकि, जांच में उनके खिलाफ फिर भी पुख्ता सबूत हाथ लग गए.

नए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत संज्ञान

कोर्ट ने माना कि आरोपियों की ये तमाम गतिविधियां नए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ (Public Examinations Act) के तहत सीधे-सीधे अपराध की श्रेणी में आती हैं. इसके अलावा, अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और एंटी-पेपर लीक कानून की सख्त धाराओं के तहत इस पूरे मामले पर संज्ञान (Cognizance) लिया है. अब इन सभी 13 आरोपियों पर अदालत में सख्त मुकदमा चलाया जाएगा.

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