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सिर्फ वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा लेने से शादी मान्य नहीं हो जाती है। महिला की ‘पत्नी का दर्जा देने की मांग’ वाली याचिका को खारिज करते हुए पटना हाईकोर्ट ने कहा, ‘शादी की मान्यता के लिए सिंदूरदान और सात फेरे का होना जरूरी है।’ क्या है पूरा मामला, पटना हाईकोर्ट का आदेश क्या है, शादी की मान्यता के लिए क्या जरूरी है, जानेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः पत्नी का दर्जा मांगने का पूरा मामला क्या है? जवाबः मुजफ्फरपुर के रहने वाले सुरेश चौधरी से दुर्गावती की शादी 22 मई 1990 को हुई। दो बच्चे थे। 28 नवंबर 1997 को सुरेश की मृत्यु हो गई। दुर्गावती का दावा है कि पति की मौत के बाद दोनों परिवारों की सहमति से 2002 में देवर सचिता चौधरी से हिन्दू रीति-रिवाज से शादी कर ली। फैमिली कोर्ट के इसी फैसले को दुर्गावती ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दी। सवाल-2ः महिला के वकील ने हाईकोर्ट में क्या दलीलें दी? जवाबः दुर्गावती के वकील बिजय शंकर चौबे ने तर्क दिया कि सीवान फैमिली कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और फैसला सुना दिया। शादी के कई सालों बाद एक वैध विवाह को शून्य घोषित करना न्याय का हनन है। सवाल-3ः पटना हाईकोर्ट ने किस आधार पर याचिका खारिज कर दी? जवाबः 5 अगस्त 2026 को जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दुर्गावती यह साबित करने में फेल रही कि सचिता के साथ उसका कथित विवाह आवश्यक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह ने फैसला सुनाते हुए 6 बातें कही… सवाल-4ः …तो क्या रीति-रिवाज से शादी करने वालों का विवाह ही वैध है? जवाबः बिल्कुल। इसे पटना हाईकोर्ट के ताजा फैसले और अप्रैल 2024 में आए सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से समझिए। दो कॉमर्शियल पायलट्स के तलाक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा था… इन कमेंट्स के साथ बेंच ने संविधान के आर्टिकल-142 का हवाला देते हुए कहा कि दोनों पायलट्स कानून के मुताबिक शादीशुदा नहीं हैं। कोर्ट ने उनके मैरिज सर्टिफिकेट को भी रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने उनके तलाक की प्रक्रिया और पति व उसके परिवार पर लगाया गया दहेज का केस खारिज कर दिया। खास बात है कि 5 अगस्त को दुर्गावती के केस का फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इस जजमेंट को भी कोट किया है। सवाल-5ः …और जिन्होंने सिर्फ रजिस्टर्ड मैरिज की है, क्या वह वैध शादी है? जवाबः नहीं। इसे सुप्रीम कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट के फैसले से समझिए। अप्रैल 2024 में दो पायलटों के तलाक मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा था… जून 2026 में ब्रिटेन में रहने वाले एक लड़के और अहमदाबाद की युवती की शादी के मामले की सुनावाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने कहा…

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