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टर्बुलेंस से फ्लाइट की सीलिंग डैमेज हो गई थी। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था।
एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही फ्लाइट के कैप्टन का साइकोएक्टिव सब्सटेंस के लिए किए गए डोप टेस्ट में सैंपल पॉजिटिव आने का दावा किया गया है। यह टेस्ट 4 अगस्त को फ्लाइट के दिल्ली पहुंचने के बाद किया गया था। हालांकि, एयर इंडिया ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
दरअसल, 4 अगस्त को एयर इंडिया की एयरबस A320 फ्लाइट टर्बुलेंस, यानी तेज हवा के झटकों में फंस गई थी। इस दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया। पायलट ने स्थिति संभाली और फ्लाइट को सुबह 11:07 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया। विमान में 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। जांच पूरी होने तक प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट क्रू को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।
विमान की छत में दरारें…2 तस्वीरें…
एयर इंडिया ने कहा- टेस्ट हुआ, नतीजे हमें नहीं मिले
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि हमें जानकारी है कि लागू प्रोटोकॉल के तहत उड़ान के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग की गई थी। हालांकि, टेस्ट के नतीजे एयर इंडिया के साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए हम किसी भी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि एयरलाइन सिविल एविएशन नियमों के तहत क्रू मेंबर्स का नियमित ड्रग टेस्ट कराती है। यह किसी खास उड़ान और ऑपरेशनल घटना से अलग प्रक्रिया है। जरूरत के मुताबिक हम संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करते रहेंगे।
आंख-गर्दन में चोटें, घायलों की 5 तस्वीरें
घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट से बाहर लाया गया।
एक एयर होस्टेस की गर्दन में चोट लगी। उसे गले में नेक ब्रेस पहनाया गया।
पैसेंजर को सिर में चोट लगी है। उसे स्ट्रैचर पर एयरपोर्ट से बाहर लाया गया।
चोट लगने के बाद पैसेंजर प्लेन में ही हाथ बांधे नजर आया।
डीजीसीए जांच में कई पहलुओं को देख रहा
सूत्रों के मुताबिक, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) इस मामले की हर पहलू से जांच कर रहा है। जांच में यह देखा जा रहा है कि टर्बुलेंस के दौरान स्थिति से निपटने का तरीका सही था या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह घटना सिर्फ खराब मौसम की वजह से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
टर्बुलेंस में अचानक कई फीट नीचे आ सकता है विमान
टर्बुलेंस का मतलब है हवा का बहाव अचानक बदल जाना, जिससे विमान को झटके लगने लगते हैं। इस दौरान विमान कुछ समय के लिए ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं हिल सकता है और कभी-कभी कुछ फीट नीचे भी आ जाता है। इसी वजह से यात्रियों को लगता है कि विमान गिर रहा है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता।
टर्बुलेंस तीव्रता के लिहाज से तीन तरह के होते हैं
हल्के टर्बुलेंस: इसमें प्लेन 1 मीटर तक ऊपर-नीचे होता है। यात्रियों को पता भी नहीं चलता।
मध्यम टर्बुलेंस: इसमें जहाज 3-6 मीटर तक ऊपर-नीचे होते हैं। इससे ड्रिंक गिर सकता है।
गंभीर टर्बुलेंस: इसमें जहाज 30 मीटर तक ऊपर-नीचे होते हैं। सीट बेल्ट न लगाए रहने पर पैसेंजर उछलकर गिर सकते हैं।
क्या टर्बुलेंस की वजह से प्लेन क्रैश हो सकता है?
आधुनिक तकनीक और बेहतर सुरक्षा सिस्टम की वजह से आज टर्बुलेंस से विमान हादसे की आशंका काफी कम हो गई है। हालांकि, बेहद गंभीर टर्बुलेंस या खराब मौसम में दुर्घटना का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।
हालांकि, आज के आधुनिक विमान हर तरह के टर्बुलेंस को झेलने के हिसाब से बनाए जाते हैं। पायलटों को भी ऐसी परिस्थितियों से सुरक्षित तरीके से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
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