वास्तु में इन मूर्तियों का बताया गया है विशेष महत्व
इस बारे में लोकल 18 को जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि वास्तु में कुछ ऐसी दिव्य मूर्तियों का विशेष महत्व बताया गया है, जिन्हें सही स्थान और श्रद्धा के साथ रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. उनका कहना है कि ये मूर्तियां केवल सजावट का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सफलता का प्रतीक मानी जाती हैं.
सफेद हाथी की मूर्ति को माना जाता है शुभ
उन्होंने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य प्रवेश द्वार के भीतर या घर के किसी उपयुक्त स्थान पर सफेद हाथी की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है. हाथी को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी उपस्थिति घर में शुभता और समृद्धि का संकेत देती है. मान्यता है कि यह मूर्ति सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, परिवार के सदस्यों का आत्मविश्वास बढ़ाती है और घर के वातावरण को शांत एवं ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होती है. यही कारण है कि कई लोग इसे अपने ऑफिस या कार्यस्थल की डेस्क पर भी रखते हैं, ताकि कार्यक्षेत्र में सफलता और नए अवसर प्राप्त हों.
गरुड़ की मूर्ति को माना जाता है सुरक्षा का प्रतीक
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को वैदिक ग्रंथों में साहस, शक्ति और बाधाओं पर विजय का प्रतीक माना गया है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार यदि घर के मुख्य द्वार या उचित स्थान पर गरुड़ की मूर्ति स्थापित की जाए, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने में सहायक मानी जाती है. इसके साथ ही परिवार के सदस्यों में आत्मबल, साहस और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता बढ़ाने का भी प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि गरुड़ की मूर्ति घर के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखती है.
कछुए की मूर्ति से जुड़ी है समृद्धि की मान्यता
उन्होंने बताया कि वास्तु शास्त्र में कछुए की मूर्ति को अत्यंत शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कछुआ भगवान विष्णु के कूर्म अवतार का प्रतीक है, इसलिए माना जाता है कि इसे घर या कार्यस्थल पर रखने से वास्तु दोषों का प्रभाव कम होता है और आर्थिक स्थिरता के साथ धन-धान्य में वृद्धि के योग बनते हैं. साथ ही यह मूर्ति सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर घर के वातावरण को संतुलित बनाए रखने में सहायक मानी जाती है.
श्रद्धा के साथ करें स्थापना
पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि किसी भी मूर्ति का शुभ प्रभाव तभी माना जाता है, जब उसे स्वच्छ स्थान, उचित दिशा और पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित किया जाए. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तु उपाय आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें अपनाने के साथ घर में सकारात्मक सोच, आपसी प्रेम और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है.
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