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जौनपुर: ‘डीएम अंकल, रास्ते में बहुत कीचड़ है, हम स्कूल नहीं जा पा रहे हैं… प्लीज हमारी सड़क बनवा दीजिए.’ यह गुहार किसी बड़े आंदोलन या बड़े नेताओं की नहीं, बल्कि उन मासूम स्कूली बच्चों की है, जिन्हें हर दिन स्कूल जाने के लिए कीचड़ से भरे खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है. सड़क की जर्जर हालत और जलजमाव के कारण बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो चुका है. कीचड़ भरे रास्ते पर फिसलकर गिरना, यूनिफॉर्म खराब होना और स्कूल देर से पहुंचने पर शिक्षकों की डांट सुनना-ये सब इन मासूमों की दैनिक दिनचर्या बन चुका है. यह दर्द केराकत तहसील के क्षत्रियपुर गांव के बच्चों का है.

गिरे तो बच्चे हंसते हैं, यूनिफॉर्म खराब होती है 

दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली मासूम छात्रा दृष्टि विश्वकर्मा ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा डीएम अंकल हम लोगों को आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है. आप रोड बनवा दीजिए. रास्ते में कीचड़ भरा रहता है, हम गिर जाते हैं तो दूसरे बच्चे हंसते हैं. एक हफ्ते पहले भी गिरी थी और दो-तीन दिन पहले भी. दृष्टि का स्कूल गांव से लगभग ढाई किलोमीटर दूर है, जहां उसे रोज पैदल जाना पड़ता है.
वहीं छठी कक्षा की छात्रा आंचल विश्वकर्मा ने बताया कि सड़क खराब होने की वजह से वैन भी गांव तक नहीं आ पाती. आंचल ने कहा आने-जाने में रोज परेशानी होती है. कभी हम गिर जाते हैं तो ड्रेस गंदी हो जाती है, स्कूल पहुंचने पर टीचर डांटती हैं. चक्के स्थित स्कूल जाने के दौरान कई बार गिर चुके हैं.

4 सालों से प्रशासन बेखबर, ग्रामीण झेल रहे दंश

स्थानीय निवासी दीपक कुमार ने बताया कि यह समस्या पिछले 4 वर्षों से बनी हुई है. गांव में विश्वकर्मा, मौर्या, मिश्रा और अन्य परिवारों की बड़ी आबादी रहती है, लेकिन मुख्य रास्ते की स्थिति नारकीय हो चुकी है.

दीपक कुमार ने बताया कि बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो कीचड़ में गिरकर चोटिल हो जाते हैं. यूनिफॉर्म खराब होने पर स्कूल में डांट पड़ती है. हम लोग एसडीएम, सीओ, कोतवाल, चौकी इंचार्ज और डीएम साहब तक कई बार लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई.

खुद मलबा बिछाया तो मिली धमकी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया और कीचड़ हद से ज्यादा बढ़ गया, तो ग्रामीणों ने अपने स्तर पर रास्ते पर राविश (मलबा) बिछाकर चलने लायक बनाने की कोशिश की. लेकिन आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने आकर उन्हें काम रोकने के लिए धमकाया और स्थिति को वैसा ही छोड़ने का दबाव बनाया. फिलहाल डीएम सैमुअल पॉल से मिलकर गुहार लगाई है और डीएम ने जल्द ही रोड सही कराने का आश्वासन भी दिया है.

मासूमों की यह पुकार अब जिला प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है क्या इन बच्चों को एक सुरक्षित रास्ता और बेहतर शिक्षा का अधिकार मिल पाएगा या फिर इन्हें यूं ही कीचड़ में गिरते-संभलते स्कूल जाना पड़ेगा?

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