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सावन माह के दौरान प्रतिदिन संध्या महाआरती, विशेष पूजन और भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा. वहीं प्रत्येक सावन सोमवार को विशेष अभिषेक, रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और पूजन होगा. सुबह से देर शाम तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचेंगे.
सावन का पावन महीना शुरू होते ही खरगोन शहर के अधिष्ठाता भगवान सिद्धनाथ महादेव मंदिर में भक्तों की आस्था का अद्भद संगम देखने को मिलेगा. इस बार सावन को लेकर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं. गुरु पूर्णिमा से ही प्रतिदिन महाआरती, भगवान का आकर्षक श्रृंगार और महाप्रसादी का वितरण शुरू हो गया है. करीब पौने 400 साल पुराने इस मंदिर की धार्मिक मान्यताएं और इतिहास इसे जिले के प्रमुख शिवालयों में न सिर्फ शामिल करते करता है बल्कि विशेष स्थान भी देता है.
इस बार मंदिर में सावन माह के दौरान प्रतिदिन संध्या महाआरती, विशेष पूजन और भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा. वहीं प्रत्येक सावन सोमवार को विशेष अभिषेक, रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक और पूजन होगा. सुबह से देर शाम तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचेंगे. सावन के धार्मिक आयोजनों के बाद 30 अगस्त को भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (भादो की दूज) पर 58वां शिवडोला निकाला जाएगा. इस भव्य धार्मिक यात्रा में खरगोन शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे.
सुबह 4 बजे खुलेंगे मंदिर के पट
मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र भावसार एवं पुजारी ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार को प्रातः 4 बजे मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे. पूरे दिन श्रद्धालु भगवान श्री सिद्धनाथ का दूध, दही, शहद और जल से अभिषेक करेंगे. भक्त भगवान सिद्धनाथ के समक्ष शीश नवाकर अपने घर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे. मंदिर परिसर में स्थापित बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का भी विशेष महत्व है, जिनके दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
गुरु पूर्णिमा से शुरू हुई महाआरती
शहर के प्राचीन सिद्धनाथ महादेव मंदिर में गुरु पूर्णिमा से प्रतिदिन रात 9 बजे महाआरती आयोजित की जा रही है, जो पड़वा तक लगातार चलेगी. महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसादी वितरित की जा रही है. हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल हो रहे है. सावन के महीने में मंदिर की रौनक भी बढ़ गई है. मंदिर परिसर में रंगरोगन और आकर्षक विद्युत सज्जा का कार्य भी किया गया है.
1651 में हुई थी मंदिर की स्थापना
सिद्धनाथ महादेव मंदिर खरगोन के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है. मान्यता है कि इसकी स्थापना सन 1651 में मल्लिवाल परिवार द्वारा कराई गई थी. मंदिर में स्थापित शिवलिंग नाग की समाधि पर विराजमान है और उसी नाग के नाम से इस मंदिर की पहचान बनी. मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और चमत्कार इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाते हैं. और यही वजह है कि, श्रावण माह में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं. उनका मानना है कि भगवान यहां साक्षात विराजित है.
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