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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की कोर्ट में कप‍िल स‍िब्‍बल और अभ‍िषेक मनु स‍िंघवी पेश हुए दलीलें देना शुरू क‍िया. सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर केस को खत्‍म करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री को उनके न‍िधन के करीब डेढ़ साल बाद बरी कर द‍ि‍या.

सिब्बल की 1 दलील... CJI सूर्यकांत का फैसला और मनमोहन स‍िंह बरी Zoom

कोयला घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सिंह को बरी कर द‍िया है (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के करीब डेढ़ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन (कोलगेट) मामले में उनके खिलाफ लंबे समय से चल रही कानूनी कार्यवाही का अंत कर दिया. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया.

दिलचस्प बात यह रही कि सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने बेहद संक्षिप्त दलील रखी. उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी भी मौजूद थे. इसके बाद अदालत ने कुछ ही मिनटों में अपना फैसला सुना दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सीजेआई जस्‍ट‍िस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि इस मामले में CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने के लिए ट्रायल कोर्ट के पास कोई ठोस कारण नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विशेष अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर संज्ञान लेना उचित नहीं था. इसलिए उस आदेश को रद्द किया जाता है और CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को बंद किया जाता है. इस फैसले के साथ ही डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ जारी समन और पूरी आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई.

आखिर सिब्बल ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि अब जबकि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो चुका है इसलिए अदालत अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दे कि उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां हटाई जाएं. सिब्बल ने अदालत से कहा क‍ि मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि उनके खिलाफ जो टिप्पणियां हैं, उन्हें हटा दिया जाए. इसके बाद अदालत ने मामले पर अपना आदेश सुना दिया.

2015 में क्यों जारी हुआ था समन?
यह मामला कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था. वर्ष 2015 में विशेष अदालत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को समन जारी किया था. हालांकि CBI ने जांच के बाद दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं. इसके बावजूद विशेष अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और समन जारी कर दिया. इसी आदेश को डॉ. मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

2015 में सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी थी रोक
1 अप्रैल 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा जारी समन पर रोक लगा दी थी. उस समय भी कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी थी कि कोयला ब्लॉक आवंटन पूरी तरह प्रशासनिक निर्णय था. सिब्बल ने कहा था कि किसी निजी कंपनी को कोयला ब्लॉक आवंटित करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है. यदि स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश से अलग निर्णय लिया गया, तो केवल इसी आधार पर उसे अपराध नहीं माना जा सकता.

डेढ़ साल बाद कानूनी लड़ाई का अंत
डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया था. उनके निधन के बाद भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था. अब शीर्ष अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए पूरे मामले को मेरिट के आधार पर समाप्त कर दिया है. इस फैसले का मतलब है कि कोयला घोटाले के इस मामले में डॉ.मनमोहन सिंह के खिलाफ अब कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं रहेगी.

CBI ने भी क्लोजर रिपोर्ट का समर्थन किया
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस.चीमा और विशेष लोक अभियोजक ए. कार्तिक पेश हुए. CBI ने भी अपनी क्लोजर रिपोर्ट का समर्थन किया और अदालत से उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया.

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अरुण बिंजोला

अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…

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