-आईवीएफ लाखों दंपतियों के जीवन में भर रहा नई उम्मीद और नई मुस्कान: डॉ. अर्चना शर्मा
गणेश अस्पताल बना मातृत्व की नई उम्मीद का केंद्र, आधुनिक आईवीएफ उपचार से बदल रही हजारों परिवारों की जिंदगी
-सही समय पर जांच और वैज्ञानिक उपचार से मातृत्व की राह हुई आसान
-स्वस्थ जीवनशैली और आधुनिक चिकित्सा का मेल बढ़ा रहा सफलता की उम्मीद
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। हर दंपति के जीवन का सबसे खूबसूरत सपना माता-पिता बनने का होता है, लेकिन बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित खानपान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण आज बांझपन के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे समय में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक लाखों दंपतियों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। विश्व आईवीएफ दिवस (25 जुलाई) के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि संतान प्राप्ति में देरी होने पर शर्म या सामाजिक संकोच के कारण उपचार टालने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं, क्योंकि सही समय पर शुरू किया गया उपचार सफलता की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। गाजियाबाद स्थित गणेश अस्पताल की चेयरपर्सन एवं वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि आईवीएफ केवल एक चिकित्सा तकनीक नहीं, बल्कि उन हजारों-लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो वर्षों से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग सामाजिक दबाव और भ्रांतियों के कारण इलाज कराने से बचते थे, लेकिन अब जागरूकता बढऩे के साथ अधिक से अधिक दंपति वैज्ञानिक उपचार को अपनाकर सफल परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि यदि कोई दंपति एक वर्ष तक नियमित वैवाहिक जीवन के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता है, तो उसे बिना देरी किए स्त्री और पुरुष दोनों की चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। वहीं यदि महिला की आयु 35 वर्ष से अधिक है, तो छह महीने तक गर्भधारण न होने की स्थिति में ही विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है। उनका कहना है कि समय पर जांच से समस्या की सही पहचान हो जाती है और उचित उपचार शुरू होने से सफल गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि आईवीएफ एक अत्याधुनिक प्रजनन तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित कर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह प्रक्रिया उन दंपतियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होती है, जिनमें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण संभव नहीं हो पाता। डॉ. अर्चना शर्मा के अनुसार कई चिकित्सकीय परिस्थितियों में आईवीएफ प्रभावी उपचार विकल्प साबित होता है।
इनमें महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब का बंद या क्षतिग्रस्त होना, पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता कम होना, एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या, बढ़ती उम्र के कारण प्रजनन क्षमता में कमी, बार-बार गर्भपात होना तथा लंबे समय तक कारण स्पष्ट न होने के बावजूद गर्भधारण न होना प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी आईवीएफ को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं और भ्रांतियां मौजूद हैं, जबकि यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, सुरक्षित और प्रभावी उपचार पद्धति है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अप्रमाणित उपचार, झाड़-फूंक या अंधविश्वास के चक्कर में समय न गंवाएं, बल्कि योग्य स्त्री एवं प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लेकर उचित उपचार शुरू करें। डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर भी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान और शराब से दूरी, मोटापे पर नियंत्रण तथा मानसिक तनाव को कम करना दंपतियों के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवनशैली का संयोजन संतान प्राप्ति की संभावना को और अधिक मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि संतान न होने की स्थिति में निराश होने की आवश्यकता नहीं है। आज चिकित्सा विज्ञान इतनी उन्नत हो चुका है कि अधिकांश मामलों में सही समय पर जांच और उचित उपचार के माध्यम से दंपति माता-पिता बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। उपचार में देरी करने से जहां सफलता की संभावना प्रभावित होती है, वहीं मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है। विश्व आईवीएफ दिवस का उद्देश्य समाज में बांझपन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना तथा आधुनिक और वैज्ञानिक उपचार पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दंपति समय पर चिकित्सकीय सलाह लें और सही उपचार अपनाएं, तो मातृत्व और पितृत्व का सपना अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी और सफलता के साथ साकार किया जा सकता है।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||


