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Pali Government School Ground Report : पाली के आऊवा स्थित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में 26 में से 18 शिक्षक पद खाली हैं. 323 छात्रों को सिर्फ 8 शिक्षक पढ़ा रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है. 18 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि कक्षा पहली से बारहवीं तक के कुल 323 विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी मात्र 8 शिक्षकों पर आन पड़ी है.

पाली. सरकार कागजों पर बड़े-बड़े दावे करती है. स्कूलों पर ‘अंग्रेजी माध्यम’ के चमचमाते बोर्ड लगाए जाते हैं, लेकिन इन दावों के पीछे की कड़वी हकीकत कुछ और ही है. पाली जिले का ऐतिहासिक गांव आऊवा का स्कूल इन सारे दावों की पोल खोल रहा है. रिपोर्ट की इस वीडियो में जो आप स्कूल देख रहे हैं, यह आऊवा का सरकारी महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय है. कहने को यह 12वीं तक का बड़ा स्कूल है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यहाँ शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है. इस स्कूल में कुल 26 पदों पर लोग होने चाहिए थे. लेकिन धरातल पर 26 में से 18 यानी की आधे से भी ज्यादा पद खाली पड़े हैं. सिर्फ 8 शिक्षकों के भरोसे कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के 323 छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है.

आऊवा स्थित महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है. कागजों में तो यह विद्यालय एक बेहतरीन अंग्रेजी माध्यम संस्थान के रूप में दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. इस प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी की वजह से यहाँ पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है.

स्कूल में कुल कितने छात्र
विद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक ढाँचे की स्थिति बेहद चिंताजनक है. यहाँ कुल 26 पदों पर अलग-अलग लोग होने चाहिए थे. जिनमें से 18 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि कक्षा पहली से बारहवीं तक के कुल 323 विद्यार्थियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी मात्र 8 शिक्षकों पर आन पड़ी है. इन 8 में भी केवल एक उप-प्राचार्य, एक व्याख्याता और छह तृतीय श्रेणी शिक्षक शामिल हैं, जो इतने बड़े स्कूल का संचालन करने को मजबूर हैं.

विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को उठाना पड रहा खामियाजा 
शिक्षकों की इस भारी किल्लत से सबसे ज्यादा नुकसान बोर्ड परीक्षा के छात्रों और विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है. हालात इतने खराब हैं कि विज्ञान वर्ग के 35 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए विषयवार व्याख्याता ही नहीं हैं और उन्हें तृतीय श्रेणी शिक्षकों से पढ़ना पड़ रहा है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलने से निराश होकर कई छात्र स्कूल से अपनी टीसी यानी कि ट्रांसफर सर्टिफिकेट कटवाने के लिए मजबूर हो रहे हैं. इसका साफ सा मतलब यह है कि वे किसी बेहतरीन स्कूल में अपना नाम लिखवाना चाह रहे हैं.

कितने पद और कौनसे खाली 
रिक्त पदों की सूची देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि संकट कितना गहरा है. विद्यालय में प्रधानाचार्य के अलावा अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के व्याख्याता पद खाली हैं. इसके अलावा सेकेंड ग्रेड के सामाजिक अध्ययन, संस्कृत, विज्ञान व गणित के शिक्षक, लेवल-2 के दो पद, लाइब्रेरियन, कंप्यूटर अनुदेशक और एलडीसी तक के पद खाली पड़े हैं. कुल मिलाकर, बुनियादी शिक्षा सुविधाओं के अभाव में गाँव के ये बच्चे अपने मौलिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यदि समय रहते इन रिक्त पदों को नहीं भरा गया, तो बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम और बच्चों का शैक्षणिक करियर दोनों ही बुरी तरह प्रभावित होंगे.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…

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