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Sonbhadra Shahganj Peda: सोनभद्र के शाहगंज का मशहूर पेड़ा आज भी अपने पारंपरिक स्वाद के लिए विश्व प्रसिद्ध है. आजादी के पहले से लकड़ी और उपले की भट्टी पर शुद्ध खोए से बनने वाले इस पेड़े के दीवाने अंग्रेज भी थे, जो इसे पैक कराकर लंदन ले जाते थे. आज भी मिर्जापुर, बिहार और एमपी समेत कई राज्यों से लोग ₹12 प्रति पीस मिलने वाले इस पेड़े का स्वाद चखने आते हैं. जानिए इसकी पूरी कहानी.

सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित शाहगंज का पेड़ा अपने बेमिसाल स्वाद के लिए आज भी देश-दुनिया में मशहूर है. शाहगंज में बनने वाले इस पारंपरिक पेड़े की दीवानगी का आलम यह था कि इसके मुरीद अंग्रेज भी हुआ करते थे. स्वाद का आनंद लेने के लिए न सिर्फ अंग्रेज यहां आते थे, बल्कि इस पेड़े को पैक कराकर अपने साथ लंदन तक लेकर जाते थे. आज भी इस पेड़े ने अपनी वही पुरानी क्वालिटी, शुद्धता और पारंपरिक स्वाद को बखूबी संजोकर रखा है.

शाहगंज में बनने वाला पेड़ा कई सालों से लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. आजादी से पहले से यहां पर पेड़े को तैयार किया जा रहा है. पेड़े को तैयार करने की विधि बेहद प्राचीन है. इसकी सोंधी खुशबू और खास मुलायमपन इसके स्वाद को कई गुना तक बढ़ा देता है.

पेड़ा बनाने वाले सुंदरम मोदनवाल ने बताया कि कई वर्षों से यहां पेड़ा बनाने का काम चल रहा है. बिल्कुल शुद्ध देसी तरीके से पेड़े को तैयार किया जाता है. पेड़े को बनाने के लिए आधुनिक गैस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि लकड़ी और उपले की भट्टी का प्रयोग इसे बनाने के लिए किया जाता है.

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पेड़े को बनाने के लिए पूरी तरह शुद्ध खोए का इस्तेमाल किया जाता है. शुद्ध खोए को घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिसके बाद चीनी, इलायची इत्यादि मिलाकर इसे तैयार किया जाता है. पेड़े का स्वाद, इसकी खुशबू और इसकी बनावट ही इसे सबसे अलग और बेहद खास बनाती है.

शाहगंज बाजार के साथ ही यहां पर आने वाले यात्री भी बिना पेड़े का स्वाद लिए बगैर वापस नहीं जाते हैं. मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली, झारखंड, बिहार व मध्य प्रदेश राज्य सहित आसपास के जनपदों से लोग यहां पहुंचते हैं और पेड़े का शानदार स्वाद लेकर वापस जाते हैं.

त्योहारों, शादियों के सीजन या फिर मांगलिक पर्वों पर इसकी मांग बढ़कर दोगुनी हो जाती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी खासी डिमांड रहती है और इसका स्वाद भी हमेशा लाजवाब रहता है.

बाजार में यह पेड़ा प्रति पीस 12 रुपये और 220 रुपये किलो की दर से बिक्री किया जाता है. इसे तैयार करने की प्राचीन परंपरा, लाजवाब स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता ही इसकी असली पहचान है, जो शाहगंज के पेड़े को आज भी विश्व प्रसिद्ध बनाती है.

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