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Ground Report Saharanpur Masjid: सहारनपुर के एक मस्जिद को हटाने का अदालत ने आदेश दे दिया है. दरअसल मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए उसे 30 दिन के भीतर हटाने का आदेश दिया है. अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण किया गया है.

सहारनपुर: सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर संकट के बादल नजर आ रहे हैं, क्योंकि हिंदू संगठन के एक पदाधिकारी ने कुछ समय पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मस्जिद के वैध होने की शिकायत की थी, जिसके बाद सहारनपुर में नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने कलक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए उसे 30 दिन के भीतर हटाने का आदेश दिया है.

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण किया गया है. इसके साथ ही सरकारी भूमि के कब्जे और उपयोग की एवज में 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने के भी निर्देश दिए गए हैं.

मस्जिद को हटाने का आदेश
सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष ने दावा किया कि यह मस्जिद करीब 150 वर्ष पुरानी है, लेकिन अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका. नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए उसे निर्धारित अवधि के भीतर हटाने का आदेश दिया.

डेढ़ वर्ष पूर्व की गई थी शिकायत
यह मामला तब सामने आया जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने वर्ष 2024 में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर मस्जिद का निर्माण किया गया है. साथ ही परिसर में बने डाकघर और अन्य कमरों का किराया भी मस्जिद समिति की ओर से वसूला जाता रहा है. शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई और 16 अप्रैल 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया. मामला खसरा संख्या 539, पठानपुरा स्थित कलक्ट्रेट कचहरी परिसर की 315 वर्ग मीटर भूमि से संबंधित था.

30 दिनों के भीतर हटाने का आदेश
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि कचहरी और कलक्ट्रेट परिसर के रूप में दर्ज पाई गई, जो राज्य सरकार में निहित है. प्रशासन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल विनय चौहान और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अवनीश त्यागी ने पक्ष रखा. अदालत ने सभी साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए 30 दिनों के भीतर हटाने और 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जमा कराने का आदेश पारित किया.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें

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