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rohit sharma retirement: कार्डिफ में रोहित को जो मैंने देखा, वह निराशाजनक था. उन्होंने 46 गेंदों का सामना किया, लेकिन गस एटकिंसन पर लगाए गए एक छक्के को छोड़ दें तो वह कभी भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आए. उन्हें एक जीवनदान भी मिला, जब एटकिंसन ने उनका कैच छोड़ दिया और गेंद चार रन के लिए चली गई.
कार्डिफ में 46 गेंदों ने लिख दी रोहित शर्मा के रिटायरमेंट की कहानी
कार्डिफ में रोहित को जो मैंने देखा, वह निराशाजनक था. उन्होंने 46 गेंदों का सामना किया, लेकिन गस एटकिंसन पर लगाए गए एक छक्के को छोड़ दें तो वह कभी भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आए. उन्हें एक जीवनदान भी मिला, जब एटकिंसन ने उनका कैच छोड़ दिया और गेंद चार रन के लिए चली गई. दरअसल, उनकी पारी की आखिरी दस गेंदें सभी डॉट रहीं, जिनमें से तीन विल जैक्स के खिलाफ थीं. एक सेट और फॉर्म में चल रहा रोहित ऐसा कभी नहीं होने देता. आप उम्मीद करते हैं कि ऐसी गेंदों में से कम से कम कुछ तो स्टैंड्स में पहुंचेंगी लेकिन कार्डिफ में ऐसा नहीं हुआ तमाम कोशिशों के बावजूद वह ऐसा नहीं कर पाए और यह देखना दर्दनाक था.
कॉमा नहीं अब फुलस्टाप की बारी!
क्या लॉर्ड्स आखिरी पड़ाव होगा? या फिर रोहित सभी मुश्किलों को चुनौती देते हुए एक आखिरी शानदार वापसी कर सकते हैं? मानसिक रूप से उनके पास कितना बचा है कि वह ऐसा कर सकें? और शायद इससे भी ज्यादा अहम सवाल यह है कि क्या उन्हें अब भी अपने खेल पर भरोसा है? इस पूरी सीरीज के दौरान जिसने भी भी रोहित को बहुत करीब से देखा है और उनके ट्रेनिंग ड्रिल्स की तारीफ की है उन्होंने नेट्स में ठीक-ठाक बल्लेबाजी की है, और जिस सेशन में उन्होंने मैच जैसी स्थिति का अभ्यास किया, वह खास तौर पर बेहद तीव्र था उन्होंने फील्डिंग पर घंटों मेहनत की है और अपनी फिटनेस पर भी शानदार काम किया है. यह सब संकेत देते हैं कि वह सच में 2027 वर्ल्ड कप खेलने का भरोसा रखते थे. लेकिन कार्डिफ में जब मैंने उन्हें जोफ्रा आर्चर के खिलाफ पुल शॉट खेलने की कोशिश करते देखा, तो मुझे लगा कि वह एक नैनो सेकंड धीमे पड़ रहे हैं. दो बार गेंद उनके शरीर पर लगी और एक बार उन्होंने कैच हवा में उछाल दिया, जो छूट गया. खेल का यही सच है. उनके जैसे महान खिलाड़ी के लिए भी एक समय के बाद चीजें मुश्किल हो जाती हैं, और कड़ी से कड़ी ट्रेनिंग भी हमेशा मैदान पर बड़े स्कोर में नहीं बदलती.
लॉर्ड्स में आखिरी लड़ाई
लॉर्ड्स सिर्फ कौशल की परीक्षा नहीं होगी। यह उनके जज्बे की भी परीक्षा होगी. रोहित जानते हैं कि रन बनाना कितना जरूरी है, और ऐसे ही समय में उनके जैसे खिलाड़ी कुछ असाधारण कर जाते हैं. एक आखिरी चमक, एक आखिरी यादगार पारी. इसे सिर्फ तर्क से नहीं समझा जा सकता. खेल कभी सिर्फ तर्क का खेल नहीं रहा. यही वह उम्मीद है जो हर रोहित समर्थक लॉर्ड्स में देखना चाहेगा. तर्क कहता है कि यह मुश्किल होगा बहुत मुश्किल लेकिन खेल कब सिर्फ तर्क पर चला है? दिग्गज इसलिए दिग्गज होते हैं क्योंकि वे तर्क को चुनौती देते हैं. वे अपनी कहानी खुद लिखते हैं. रोहित के पास लॉर्ड्स में एक और मौका होगा, ठीक वैसा ही करने का. यह एक निर्णायक पल साबित हो सकता है, और हम बस यही कामना कर सकते हैं कि वह इस संभावित आखिरी निर्णायक जंग में अपना सर्वश्रेष्ठ दें.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें
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