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Ganga Varuna Elevated Corridor Varanasi : वाराणसी में आने वाले समय में सफर का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा. शहर के बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और आसपास के बड़े शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी दो बड़ी परियोजनाएं बनाई जाएंगी. इन दोनों प्रोजेक्ट को वाराणसी के विकास के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इन दोनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 25 हजार करोड़ रुपये मानी जा रही है. आज केंद्रीय कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसके बारे में डिटेल्‍ड जानकारी साझा की.

इन दोनों परियोजनाओं के जरिए वाराणसी को प्रयागराज, जौनपुर, लखनऊ, गाजीपुर, चंदौली, मीरजापुर और बिहार की ओर जाने वाले रास्तों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. खास बात यह होगी कि बाहर से आने वाले वाहनों को शहर के भारी ट्रैफिक में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे. आइए जानते हैं कि आखिर ये दोनों कॉरिडोर क्या हैं और इनसे वाराणसी को क्या फायदा मिलेगा.

क्या है गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर?
गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर गंगा नदी के समानांतर बनने वाली छह लेन की एलिवेटेड रोड होगी. इसकी लंबाई करीब 46 किलोमीटर होगी. यह नेशनल हाईवे-19 (NH-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. इस कॉरिडोर के जरिए अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, नमो घाट और काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंच आसान हो जाएगी. इस प्रोजेक्ट के बनने के बाद वाराणसी के कई हिस्सों के बीच सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद है. अभी जहां कई बार करीब 60 मिनट तक का समय लग जाता है, वहीं इसके बनने के बाद यह सफर लगभग 20 मिनट में पूरा हो सकेगा. कॉरिडोर पर वाहनों की औसत रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखने की योजना है.

इस परियोजना की सबसे खास बात यह होगी कि इसे इस तरह तैयार किया जाएगा कि गंगा नदी और घाटों के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान न पहुंचे. इसमें केबल स्टेड ब्रिज यानी तारों पर टिके पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है. इसके अलावा पर्यटकों के लिए व्यूपॉइंट और दर्शक गैलरी भी बनाई जाएंगी, जहां से लोग गंगा और घाटों का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे. गंगा पार करने के लिए तीन पैदल झूला पुल भी बनाए जाने की योजना है.

कहां से कहां तक जाएगा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर?
गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर विश्व सुंदरी पुल के बाएं छोर से शुरू होगा. यहां से यह सामने घाट पुल तक पहुंचेगा. इसके बाद रामनगर की तरफ करीब छह किलोमीटर का सफर तय करते हुए नमो घाट तक जाएगा. नमो घाट से आगे इसे वाराणसी रिंग रोड के गंगा पुल से जोड़ा जाएगा. इसके बनने से चंदौली, मीरजापुर, गाजीपुर और बिहार की तरफ से आने वाले वाहनों को वाराणसी शहर के अंदर प्रवेश किए बिना ही आगे जाने का रास्ता मिल जाएगा. इससे शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होगा.

इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 12,600 करोड़ रुपये बताई जा रही है. यह वाराणसी रिंग रोड, वाराणसी बाईपास और NH-2 गंगा ब्रिज को जोड़ने का काम करेगा. नमो घाट पर इसका डबल डेकर स्ट्रक्चर भी खास आकर्षण होगा, जिसमें ऊपर रेलवे लाइन और नीचे छह लेन हाईवे होगा.

क्या है वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर?
वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी की वरुणा नदी के समानांतर बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य शहर के अंदर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करके वाहनों को रिंग रोड और नेशनल हाईवे की ओर पहुंचाना है.
यह कॉरिडोर हरहुआ-राजातालाब रिंग रोड क्षेत्र से शुरू होकर नमो घाट तक जाएगा. इसकी कुल लंबाई करीब 43.2 किलोमीटर होगी. इसमें मुख्य हिस्सा करीब 21.15 किलोमीटर का फोर लेन लिंक कनेक्टर होगा, जबकि बाकी हिस्सा छह लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. यह कॉरिडोर नेशनल हाईवे-31 (NH-31) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. इस परियोजना पर करीब 11 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसमें कई फ्लाईओवर, लूप, रैंप और लिंक रोड बनाए जाएंगे.

किन इलाकों और गांवों से होकर गुजरेंगे कॉरिडोर?
गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए समना, डोमरी, सीरगोवर्धनपुर, छितुपुर, किला कोहना, कोरौटा, रामनगर, भगवानपुर, सुजाबाद, नगवा, नदेसर और वारिदपुर जैसे गांवों की जमीन से जुड़ी प्रक्रिया प्रस्तावित है. वहीं वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी सदर और पिंडरा तहसील के करीब 41 गांवों से होकर गुजरेगा. इसमें कुडुहना, रस्तमसर, परशुरामपुर, सराय, पिररां, बड़ागांव प्रथम, छपरी, लोहरापुर, रनियापुर, छितौनी, इंदरपुर, सिरिस्ता, चौका, जेतुपुर, काजी सरसौलपुर, अटहरपुर, मकदूमपुर, भटके, करनजापुर और कटेसर समेत कई गांव शामिल हैं.

पिंडरा तहसील के महादेवपुर, सरायखांपुर, दहेपुर, दुर्गापुर, प्रतापट्टी, मंगापुर, सहदुल्लीनगर, परसियापुर, समाद, कोर्राज, अहिरान, अनेनपुर, करोंमा, धनेसी, बंजरपट्टी, बरसांडी, कोर्राजपुर, भगवानपुर और बाजिदपुर जैसे गांवों की जमीन भी परियोजना से जुड़ी है.

2028 तक पूरा करने की तैयारी
इन परियोजनाओं को साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इनके तैयार होने के बाद लखनऊ, प्रयागराज और जौनपुर की तरफ से आने वाले लोगों को वाराणसी शहर के जाम से राहत मिलेगी. लोग बिना शहर के भारी ट्रैफिक में फंसे काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्य प्रमुख स्थानों तक आसानी से पहुंच सकेंगे. गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर सिर्फ सड़क परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि वाराणसी की भविष्य की कनेक्टिविटी को बदलने वाली योजनाएं हैं. इनके जरिए शहर में ट्रैफिक कम करने के साथ पर्यटन, व्यापार और विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.

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