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देश और राजस्थान के सबसे कुख्यात और एक-दूसरे के खून के प्यासे करीब 90 हार्डकोर अपराधी अजमेर की जेल में बंद हैं।

अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में इस वक्त बारूद के ढेर पर चिंगारी जैसी स्थिति बनी हुई है। देश और राजस्थान के सबसे कुख्यात और एक-दूसरे के जानी-दुश्मन करीब 90 हार्डकोर अपराधी इस जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं। इनमें लॉरेंस, रोहित गोदारा, आनंदपाल सिंह (AP

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हाल ही में जेल के भीतर कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की हत्या ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। इस मर्डर के बाद ‘भास्कर’ ने जेल में बंद इन हार्डकोर अपराधियों के गैंग कनेक्शन, उनकी पुरानी रंजिश और जेल के अंदर सुरक्षा के जमीनी हालातों की कड़ियां खंगाली हैं।

संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, जेल में बंद टॉप गैंगस्टर्स की दोस्ती और दुश्मनी का पूरा गणित।

एक-दूसरे के खून के प्यासे गैंगस्टर

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में इस समय कुल 90 हार्डकोर कैदी बंद हैं। इनमें गैंगस्टर लॉरेंस गैंग से उसका भांजा सचिन थापन, बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के मर्डर की साजिश रचने वाला गैंगस्टर कपिल पंडित, जयपुर में कई वारदातें कर चुका रितिक बॉक्सर, जगतपाल, सुमित विश्नोई, सुभाष बानूड़ा, दिनेश डाबर, और अजयपाल सिंह शामिल हैं।

रोहित गोदारा गैंग के इशारे पर राजू ठेहट और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपी भी इसी जेल में हैं। इनमें सतीश पहलवान, जतिन, विक्रम गुर्जर, मनीष बच्चियां, रोहित सिंह, रामवीर, उधम सिंह और नितिन फौजी जैसे कुख्यात बदमाश हैं।

कोटा का कुख्यात गैंगस्टर शिवराज सिंह हाड़ा और उसकी गैंग का गौरव, लोकेश और शराफत इसी जेल में है। शिवराज गैंग की जानी दुश्मन माने जाने वाली भानुप्रताप गैंग का नंदू शूटर भी इसी जेल में बंद हैं। इनमें से कई गुट एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं।

किशनगढ़ के पूर्व विधायक नाथूराम सिनोदिया के मर्डर सहित दूसरी कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाला बलभाराम जाट, कुलदीप जघीना हत्याकांड में शामिल रहे विष्णु जाट, पंकज, रविंद्र और आदित्य, कुख्यात धन सिंह, श्रवण सिंह सोढा, इमरान मोगली, शादाब टोंक, राजू फौजी, बांसवाड़ा के गैंगस्टर भाई इम्तियाज और सिराज भी इसी हाई सिक्योरिटी जेल में कैद हैं।

कन्हैयालाल हत्याकांड के दोनों आरोपी रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद, प्रकाश विश्नोई सांचौर, टेरर फंडिंग मामले में पकड़ा गया अल्तमश फरीदी, अमन अली और राजस्थान का सबसे बड़ा सीरियल रेपिस्ट सिकंदर उर्फ जीवाणु भी इसी जेल में बंद है।

हाल ही में जेल में मारा गया डकैत जगन गुर्जर का छोटा भाई डकैत पप्पू गुर्जर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में ही बंद है, जो हर पल अपने भाई की मौत का बदला लेने की आग में झुलस रहा है।

लॉरेंस वर्सेज रोहित गोदारा गैंग : दोस्ती-दुश्मनी में बदली

बीकानेर के कपूरीसर का रहने वाला गैंगस्टर रोहित गोदारा पहले लॉरेंस विश्नोई के लिए ही काम करता था। लॉरेंस विश्नोई जेल में बंद था, तब रोहित गोदारा फर्जी पासपोर्ट पर विदेश भाग गया। वहां उसने लॉरेंस के सबसे करीबी रहे गोल्डी बराड़ के साथ मिलकर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित कई स्टेट में मर्डर-फिरौती की वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया था। पंजाबी सिंगर सिद्धू मुसेवाला मर्डर में भी ये जुगलबंदी शामिल रही थी। साल 2024-2025 के आस-पास लॉरेंस गैंग में फूट पड़ गई।

गोल्डी बराड़, लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा साथ मिलकर देश-विदेश में धमकी, फिरौती, मर्डर जैसी वारदातों को अंजाम देते थे।

गोल्डी बराड़, लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा साथ मिलकर देश-विदेश में धमकी, फिरौती, मर्डर जैसी वारदातों को अंजाम देते थे।

लॉरेंस के भाई अनमोल विश्नोई को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया था। लॉरेंस को तब शक हुआ कि गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा ने अनमोल की मदद नहीं की, बल्कि उसके लीगल केस में लापरवाही बरती और कई अहम जानकारी भी लीक की। इसके बाद लॉरेंस ने गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा से अपनी राहें अलग कर लीं। इसके बाद लॉरेंस गैंग और गोल्डी-रोहित गैंग ने वारदातों की जिम्मेदारी भी अलग-अलग लेनी शुरू कर दी। इसी के बाद दोनों गैंग एक-दूसरे के खून की प्यासी हो गई।

अजमेर जेल में गैंगस्टर लॉरेंस की गैंग में शामिल और उसका सगा भांजा सचिन थापन, कपिल पंडित, ऋतिक बॉक्सर, जगतपाल, सुमित विश्नोई, सुभाष बानूड़ा, दिनेश डाबर और अजयपाल सिंह के अलावा लॉरेंस का साथ देने वाले कई बदमाश हैं। राजू ठेहट और सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड को अंजाम देने वाले सतीश पहलवान, जतिन, विक्रम गुर्जर, मनीष बच्चियां, रोहित सिंह, रामवीर, उधम सिंह और नितिन फौजी जैसे कुख्यात रोहित गोदारा गैंग के माने जाते हैं। आशंका है कि कभी भी वर्चस्व की जंग हो सकती है।

शिवराज सिंह वर्सेज भानू प्रताप गैंग : 17 साल पुरानी गैंगवार, जेल में भी रहता है डर

12 मई 2009 को चित्तौड़गढ़ के मेनाल एरिया में भानु प्रताप गैंग ने शिवराज सिंह हाड़ा के भाई बृजराज सिंह हाड़ा की हत्या कर दी थी। जेल में बंद शिवराज ने इसका बदला लिया। अप्रैल 2011 में पेशी पर ले जाते समय भानु प्रताप पर फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में गैंगस्टर भानु प्रताप सिंह, कमांडो प्रकाश और सोहनलाल की हत्या कर दी थी।

दोनों गैंग में दुश्मनी का खेल यहीं नहीं थमा। इसके बाद भानु प्रताप गैंग को लीड कर रहे हिस्ट्रीशीटर रणवीर चौधरी ने 25 अप्रैल 2011 को शिवराज गैंग के रमेश जोशी को मौत के घाट उतार दिया था।

इसके बाद शिवराज गैंग के गुर्गों ने कोटा के श्रीनाथपुरम स्टेडियम में 22 दिसंबर 2019 को भानु प्रताप गैंग को लीड कर रहे रणवीर चौधरी की हत्या कर दी।

वर्तमान में कुख्यात गैंगस्टर शिवराज सिंह हाड़ा गैंग के गौरव, लोकेश और शराफत के साथ ही दुश्मन भानु प्रताप गैंग का नंदू शूटर भी इसी जेल में बंद है। जेल सूत्रों की मानें तो इन दोनों गैंग के बीच रंजिश कभी भी गैंगवार में बदल सकती है।

कैदियों को रखने की व्यवस्था चाक-चौबंद, लेकिन कई दिक्कतें

जेल सूत्रों के मुताबिक, इन हार्डकोर कैदियों को हाई सिक्योरिटी जेल में रखने के लिए कई चीजों का ध्यान रखा जाता है। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर कई कमजोरियां भी रहती हैं।

जेल में जब कोई कैदी आता है तो उसका और उसकी गैंग का पूरा रिकॉर्ड पुलिस के पास होता है। इंटेलिजेंस इनपुट भी लिया जाता है। इसके बाद उसे विरोधी गैंग से अलग ब्लॉक में ही बैरक या सेल अलॉट की जाती है।

  • जेल सोर्सेज की मानें तो एक ही ब्लॉक में कम से कम 5 और अधिकतम 6 सेल होती हैं। केवल दिन में ही सेल को अनलॉक किया जाता है। अधिकतर समय एक ब्लॉक के कैदियों का आपस में मिलना व बातचीत करना होता रहता है।
  • कई बार कैदियों की शिफ्टिंग और अलॉटमेंट में रसूख का असर भी रहता है। साइको कैदियों को लेकर जेल में कोई अलग से विशेष सुविधा नहीं है। उनका तो अंदाजा भी लगाना मुश्किल होता है कि वो कब क्या कर बैठेंगे?
  • कई मामलों में जेल स्टाफ की मिलीभगत भी सामने आ जाती है, जिसके सहारे हार्डकोर गैंगस्टर बड़ी क्राइम प्लानिंग कर लेते हैं।
  • कई बार सीसीटीवी कैमरे भी टेक्निकल खराबी की वजह से बंद हो जाते हैं, जिसका फायदा जेल में बंद गैंगस्टर उठाते हैं।
आरोप है कि 29 जून को कुलदीप जघीना मर्डर के आरोपी विष्णु जाट ने डकैत जगन गुर्जर की तौलिए से गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

आरोप है कि 29 जून को कुलदीप जघीना मर्डर के आरोपी विष्णु जाट ने डकैत जगन गुर्जर की तौलिए से गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में टोटल 4 वार्ड हैं और इनमें करीब 16 ब्लॉक हैं। हर ब्लॉक में कम से कम 5 सेल (कोठरी) और अधिकतम 6 सेल (कोठरी) मिलाकर टोटल 88 सेल (कोठरी) हैं। एक सेल में अधिकतम 3 कैदियों को रखा जा सकता है और इस लिहाज से यहां की कुल क्षमता 264 कैदियों को रखने की है। वर्तमान में यहां 90 हार्डकोर कैदी बंद है।

जेल की सुरक्षा पर क्या बोले डीजी जेल अशोक राठौड़?

राजस्थान के डीजी जेल अशोक राठौड़ कहते हैं- साइको कैदियों और बंदियों को लेकर जेल में कोई अलग से साइक्लॉजिकल मॉनिटरिंग जैसी स्पेशल ट्रीटमेंट की सुविधा तो नहीं है। लेकिन जेल में बंद सभी कैदियों के आपराधिक बैकग्राउंड, इनके स्वभाव, दुश्मनी के अलावा हर डिटेल को चेक करने के बाद ही सेल दी जाती है।

हार्डकोर क्रिमिनल्स की गैंग्स राइवलरी का भी ध्यान रखते हुए ही उन्हें जेल में अलग-अलग बंद रखा जाता है। ऐसे कैदियों और बंदियों की मॉनिटरिंग भी जेल प्रशासन करता रहता है। अब इसी बीच इनके बीच अगर अचानक कोई नई दुश्मनी पनपती है, या किसी बात को लेकर उनमें कोई विवाद होता है तो उसको तत्काल समझना मुश्किल हो जाता है।

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अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को डकैत जगन गुर्जर की हत्या हो गई। भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने जगन गुर्जर की टॉवल (तौलिए) से गला दबाकर मर्डर किया। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर बैरक नंबर 5 में बंद थे। पढ़ें पूरी खबर…

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अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को हुई डकैत जगन गुर्जर की हत्या महज आवेश में आकर किया गया अपराध नहीं था, बल्कि जेल के भीतर वर्चस्व की लड़ाई और लगातार मिल रहे तानों का नतीजा है। पढ़ें पूरी खबर…

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