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-दोषियों को मिले कठोर सजा, लेकिन अफवाहों से बचें: रविंद्र तिवारी
-अयोध्या यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा, दान श्रद्धा का प्रतीक है, उसकी कीमत राशि से नहीं भावना से होती है
-श्रीराम की नगरी की गरिमा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था बनाए रखने की समाज से अपील

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दानपात्र से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी ने लोगों से संयम, विवेक और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने मंदिर की व्यवस्था या श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कुछ लोगों की कथित गलती के आधार पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और श्रीराम मंदिर की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
रविंद्र तिवारी ने अपने हालिया अयोध्या प्रवास का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह स्वयं अयोध्या जनपद के निवासी हैं और हाल ही में अपने गृह जनपद गए थे। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि पहले की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम दिखाई दी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान ट्रेन से लेकर हवाई यात्रा तक कई स्थानों पर लोगों के बीच श्रीराम मंदिर के दानपात्र में हुई कथित चोरी की चर्चा सुनने को मिली। अनेक लोग इस विषय पर अलग-अलग तरह की बातें कर रहे थे, जिनमें से कई तथ्यों पर आधारित नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में बिना आधिकारिक पुष्टि के निष्कर्ष निकालना समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा कर सकता है। यदि जांच एजेंसियां किसी मामले की जांच कर रही हैं, तो जनता को धैर्य रखते हुए जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। अफवाहों और अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर किसी धार्मिक संस्था या आस्था के केंद्र के बारे में नकारात्मक माहौल बनाना उचित नहीं है। रविंद्र तिवारी ने कहा कि श्रीराम मंदिर में दान करने वाला प्रत्येक श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार योगदान देता है। कोई श्रद्धालु 11 रुपये चढ़ाता है, कोई 101 रुपये, तो कोई लाखों या करोड़ों रुपये का दान करता है। लेकिन भगवान के दरबार में दान की राशि नहीं, बल्कि श्रद्धा और भावना का महत्व होता है। इसलिए दान को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में किसी एक घटना के आधार पर पूरे मंदिर प्रबंधन या करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर सवाल खड़े करना समाज में अनावश्यक विभाजन और भ्रम पैदा कर सकता है।

वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी ने समाज के सभी वर्गों से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास करने से बचें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह सत्यापित तथ्यों पर भरोसा करे, जांच एजेंसियों के निष्कर्षों का सम्मान करे और ऐसी किसी भी अफवाह को आगे न बढ़ाए, जिससे धार्मिक सौहार्द और सामाजिक विश्वास प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने अपराध किया है तो उसे कानून के दायरे में रहकर कठोर दंड अवश्य मिलना चाहिए, लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, श्रीराम मंदिर की गरिमा और अयोध्या की प्रतिष्ठा को किसी भी कीमत पर आघात नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सत्य सामने आएगा और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे श्रीराम की नगरी की मर्यादा, मंदिर की पवित्रता और देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान बनाए रखें।

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