Lata Mangeshkar Vs Asha Bhosle : स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और बहन आशा भोसले के बीच जितना प्रेम था, प्रोफेशनल लाइफ में उतनी ही प्रतिस्पर्धा भी थी. कई बार ऐसा हुआ कि जिस गाने को लता मंगेशकर ने गाने से इनकार कर दिया, आशा भोसले ने उसी सॉन्ग को अपनी मखमली आवाज से अमर कर लिया. कई बार तो उन्होंने लता मंगेशकर से ज्यादा पैसे भी लिए. 60 के दशक में ऐसा ही एक गाना था जिसे लता नहीं गा सकीं. आशा भोसले ने गाना गाने के लिए हामी तो भर दी लेकिन पांच गुना पैसा ज्यादा लेने की शर्त रख दी. फिल्म सुपरहिट साबित हुई. यह गाना कौन सा था और लता मंगेशकर ने उसे गाने से क्यों इनकार कर दिया था, आइये जानते हैं….
60 के दशक में शम्मी कपूर पर्दे पर छाए हुए थे. उनका डांसिंग स्टाइल, एक्टिंग का अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आता था. 1964 में शम्मी कपूर की एक ऐसी फिल्म आई थी जिसका एक गाना लता मंगेशकर ने गाने से इनकार कर दिया था. इस गाने को मोहम्मद रफी-आशा भोसले की आवाज में रिकॉर्ड किया गया. गाना बहुत ही सेंसुअल था. आशा भोसले ने गाना जरूर गाया लेकिन लता दीदी से पांच गुना ज्यादा पैसे लिए थे. यह फिल्म थी ‘राजकुमार’ आई थी जिसका डायरेक्शन के. शंकर ने किया था. फिल्म म्यूजिकल थी. फिल्म में शम्मी कपूर के अपोजिट साधना नजर आई थीं. इसके अलावा, पृथ्वीराज कपूर, प्राण, ओम प्रकाश भी अहम भूमिकाओं में थे.
यह फिल्म इसलिए भी खास थी क्योंकि कहानी मनमोहन देसाई ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले-डायलॉग रामानंद सागर ने लिखे थे. रामानंद सागर ने बहुत हद तक कहानी भी बदल दी थी और वो चाहते थे स्टोरी का क्रेडिट उन्हें मिले लेकिन प्रोड्यूसर ने ऐसा नहीं किया. मनमोहन देसाई ने आगे चलकर ‘धरम-वीर’, ‘परवरिश’ ‘अमर अकबर एंथोनी’ जैसी सुपरहिट मसाला फिल्में बनाईं, वहीं रामानंद सागर ने 1987 मे रामायण जैसा कालजयी धारावाहिक बनाया.
‘राजकुमार’ का सबसे बड़ी यूएसपी म्यूजिक था जिसे शंकर-जयकिशन ने कंपोज किया था. गीतकार हसरत जयपुरी-शैलेंद्र ने लिखे थे. फिल्म 20 अक्टूबर 1964 को रिलीज हुई थी. शम्मी कपूर-साधना की जोड़ी पर्दे पर छा गई थी. हर गाना हिट था. फिल्म के पॉप्युलर गाने थे : जानेवाले जरा होशियार (मोहम्मद रफी), तुमने किसी की जान को जाते हुए देखा है (मोहम्मद रफी), इस रंग बदलती दुनिया में (मोहम्मद रफी), तुमने पुकारा और हम चले आए (मोहम्मद रफी-सुमन कल्याणपुर) , आ जा आई बहार (लता मंगेशकर).
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फिल्म का एक गाना लता मंगेशकर ने गाने से इनकार कर दिया था. यह गाना था ‘दिलरुबा दिल पे तू ये सितम किए जा’ जिसे आशा भोसले-मोहम्मद रफी ने गाया था. गाना बहुत ही सेंसुअल था. लता मंगेशकर ने जब इस सॉन्ग को गाने से इनकार कर दिया तो शंकर-जयकिशन आशा भोसले के पास पहुंचे. आशा ने कहा कि वो गाना तो गा देंगी लेकिन लता दीदी से पांच गुना ज्यादा पैसे लेंगे. शंकर जयकिशन ने यह बात शम्मी कपूर को बताई. शम्मी कपूर ने गाने को बोल देखे और कहा कि आशा सही कह रही हैं. गाना सेंसुअल है, इसलिए जो पैसे वो मांग रही हैं, दे दीजिए.
‘राजकुमार’ फिल्म की कहानी में राजसी ठाठबाट था. जबर्दस्त कॉमेडी भी थी. फिल्म में शम्मी कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर ने भी काम किया था. वो पर्दे पर शम्मी के पिता बने हुए थे. शम्मी कपूर पेरिस से पढ़कर घर लौटते हैं और अजीबो-गरीब हरकते करते हैं. राजकुमार को पता चल जाता है कि उसकी सौतेली मां मनोरमा और सेनापति नरपत सिंह (प्राण) महल के खिलाफ साजिश रच रहे हैं. दुश्मनों को गुमराह करने के लिए शम्मी कपूर सनकी इंसान जैसा बर्ताव करते हैं.
फिल्म की शूटिंग चेन्नई के आसपास ऊटी के घने जंगलों-झरनों के आसपास हुई थी. फिल्म का सबसे लोकप्रिय आइकॉनिक गाना ‘आ जा आई बहार’ झील के किनारे ही फिल्माया गया था. लता मंगेशकर ने इस गाने को अमर बना दिया. शम्मी कपूर ने अपनी आंखों और चेहरे के एक्प्रेशन से रोमांस को पर्दे पर उतारा था.
‘राजकुमार’ फिल्म का बजट 75 लाख रुपये के करीब था. फिल्म ने 1.5 करोड़ की कमाई की थी. यह एक मैसिव हिट फिल्म साबित हुई थी. यह 1964 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मूवी की लिस्ट में पांचवें नंबर पर थी.
वैसे इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म राज कपूर की ‘संगम’ थी. 1964 में शम्मी कपूर छाए रहे. वो सोलो लीड स्टार थे. इसी साल उनकी ‘कश्मीर की कली’ फिल्म भी मैसिव हिट रही थी.
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