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होमफोटोकृषिधान की पौध उखाड़ने से पहले क्यों जरूरी है यह एक काम? वैज्ञानिकों ने बताई वजह

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Paddy Farming: खरीफ सीजन के रफ्तार पकड़ते ही देश भर में धान की रोपाई का काम जोरों पर है. कृषि एक्सपर्ट ने किसानों के लिए धान की नर्सरी से पौध उखाड़ने और उनकी रोपाई को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा है, ताकि पौधों की शुरुआती बढ़त बेहतर हो और बंपर पैदावार मिल सके. पौध उखड़ते समय की गई गलती तो नुकसान हो सकता है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ हादी हुसैन खान ने बताया कि धान नर्सरी उखाड़ने से पहले खेत की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है. पौध उखाड़ने से ठीक एक दिन पहले पौध वाले बेड में पर्याप्त मात्रा में पानी लगा दें. ऐसा करने से सूखी मिट्टी पूरी तरह से मुलायम और गीली हो जाती है, जिससे पौधों को बाहर खींचते समय उनकी कोमल जड़ों पर अतिरिक्त तनाव या खिंचाव नहीं पड़ता है.

अक्सर देखा जाता है कि जल्दबाजी में पौध उखाड़ते समय उसकी जड़ें टूट जाती हैं, जिससे मुख्य खेत में रोपाई के बाद पौधे सूखने लगते हैं. इससे बचने के लिए पौधों को हमेशा जड़ के बिल्कुल पास से, यानी तने के निचले हिस्से से धीरे से पकड़कर ऊपर की तरफ खींचना चाहिए. इस सावधानी से जड़ें सुरक्षित रहती हैं और मिट्टी आसानी से अलग हो जाती है.

सुरक्षित निकाली गई पौध को बहुत अधिक समय तक खुले में नहीं रखना चाहिए. उखाड़ी गई पौध की रोपाई हर हाल में 24 घंटे के भीतर मुख्य खेत में पूरी हो जानी चाहिए. अगर रोपाई में ज्यादा देरी होती है, तो पौधों में नमी की कमी हो जाती है और मुख्य खेत की मिट्टी में उनकी जड़ें सही ढंग से स्थापित नहीं हो पाती हैं.

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धान की सफल रोपाई के लिए मुख्य खेत को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है. खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करने के बाद उसमें पानी भरकर पडलिंग करके लगाना चाहिए. ऐसा करने से खेत की मिट्टी समतल हो जाती है और पानी रोकने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे रोपे गए नए पौधों को शुरुआती दिनों में भरपूर नमी और पोषण मिलता रहता है.

खेत में पौधों को बेतरतीब ढंग से लगाने के बजाय वैज्ञानिक विधि का पालन करना चाहिए. रोपाई करते समय लाइन से लाइन की दूरी लगभग 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. इसके अलावा, एक स्थान पर हमेशा 2 से 3 स्वस्थ पौधे ही लगाने चाहिए, ताकि भविष्य में कल्लों का विकास सही ढंग से हो सके और फसल घनी हो.

धान की रोपाई संपन्न होने के बाद शुरुआती एक हफ्ते तक खेत में पानी का स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है. नए रोपे गए पौधों की जड़ों को जमाने के लिए खेत में कम से कम 2 से 3 इंच पानी हमेशा भरा रहना चाहिए. यह पानी पौधों को तेज धूप और गर्मी से बचाता है, जिससे पौधे बिना झुलसे तेजी से मिट्टी पकड़ लेते हैं.

पौधों की रोपाई के तुरंत बाद उन्हें पोषक तत्वों की सख्त जरूरत होती है. किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की अनुशंसित मात्रा का इस्तेमाल करें. जिंक सल्फेट की उचित मात्रा का प्रयोग भी इस समय बेहद फायदेमंद साबित होता है, जो पौधों को बीमारियों से बचाता है और उनकी हरियाली तथा ग्रोथ को बढ़ाता है.

धान की रोपाई के शुरुआती 15 से 20 दिनों के भीतर खेत में खरपतवार उगने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. ये अनचाहे पौधे मुख्य फसल का पोषण छीन लेते हैं. इससे बचाव के लिए रोपाई के तुरंत बाद उचित खरपतवार नाशक का छिड़काव पानी में करना चाहिए और समय-समय पर खेत की निगरानी करते रहना चाहिए ताकि कीटों का प्रकोप न हो.

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