हिमाचल प्रदेश में कई टूरिस्ट ब्यास समेत दूसरी नदियों के किनारे पहुंचकर सेल्फी लेने और फोटो खिंचवाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। साइड बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी को नजरअंदाज किया जा रहा है। टूरिस्टों से बार-बार नदी में न उतरने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है। लोकल लोग भी टूरिस्टों को नदी से दूरी बनाने को कहते हैं, लेकिन सेल्फी और रोमांच के चक्कर में टूरिस्ट खतरे को नजरअंदाज कर रहे हैं। प्रदेश में मानसून सीजन को देखते हुए इन दिनों पावर प्रोजेक्ट के बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है। डैम में बरसात के दौरान किसी भी खतरे से बचने के लिए पानी की फ्लशिंग की जा रही है। ऐसे में बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। नदी किनारे मौजूद लोगों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्र के कारण तेज होता है पानी का बहाल पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों का बहाव सामान्य दिखने के बावजूद तेज होता है। पानी का बहाव कब बढ़ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। खासकर बरसात के मौसम में नदी किनारे जाना जानलेवा साबित हो सकता है। इससे पहले 8 जून को कुल्लू के मणिकर्ण में पंजाब के एक परिवार के तीन सदस्य पानी के तेज बहाव में बह गए। हालांकि, लोकल लोगों की मुस्तैदी से तीनों को बचा लिया गया था। हर साल कई टूरिस्ट ब्यास, रावी, चिनाब इत्यादि नदियों में गंवाते हैं। 24 छात्र-छात्राएं ब्यास में बह चुके हिमाचल में साल 2014 में कभी न भूला पाने वाला हादसा हो चुका है। उस दौरान मंडी जिले के लारजी जल विद्युत परियोजना के डैम से पानी छोड़े जाने के बाद थलोट में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्र-छात्राएं ब्यास नदी में बह गए थे। हादसे में 18 छात्र और 6 छात्राएं शामिल थीं। इसके बावजूद आज भी कई लोग नदी किनारे जाकर जोखिम उठा रहे हैं। प्रशासन की अपील है कि पर्यटक नदियों के किनारे सावधानी बरतें और चेतावनी वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। खूबसूरत नजारों और सेल्फी के कुछ पल जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं हो सकते। टूरिस्ट को नदी किनारे नहीं जाने की दे रही एडवाइजरी: DC डीसी कुल्लू अनुराग चंद्र ने बताया कि जिला प्रशासन बार बार टूरिस्टों को नदी किनारे नहीं जाने की एडवाइजरी जारी कर रहा है। प्रशासन ने जगह जगह साइन बोर्ड भी लगा रखे हैं, जहां साइन बोर्ड नहीं है, वहां इन्हें लगाने को कह दिया गया है
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