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शाहदरा रेलवे स्टेशन पर शनिवार सुबह सिर्फ 35 वर्षीय पंकज धामा की हत्या नहीं हुई, बल्कि सिस्टम और समाज… दोनों बेनकाब हो गए। योग एक्सप्रेस के दो मिनट के ठहराव में मामूली विवाद इतनी बर्बर हिंसा में बदल गया कि दिल्ली मेट्रो के गार्ड की जान सुरक्षाकर्मी और सैकड़ों लोगों के सामने चली गई। सवाल यह है कि अगर पिटने वाला उनका अपना होता, तो क्या भीड़ तब भी मूकदर्शक बनी रहती। इससे बड़ा सवाल रेलवे से है, जो अरबों के बजट के बावजूद एक एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं करा सकी। नतीजतन घायल गार्ड को ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाया गया।

 35 वर्षीय पंकज धामा आईपी एक्सटेंशन मेट्रो स्टेशन पर ड्यूटी पूरी करने के बाद वह अपने गांव लौटने के लिए शाहदरा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। शनिवार सुबह ट्रेन संख्या 19031 योग एक्सप्रेस निर्धारित समय से 34 मिनट देरी से शाहदरा स्टेशन पहुंची। सप्ताहांत होने के कारण स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी-खासी भीड़ थी। हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले यात्रियों की संख्या भी अधिक बताई जा रही है।

रेलवे पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार ट्रेन के कोच के दरवाजे पर यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान विवाद शुरू हुआ। सामान्य तौर पर पहले उतरने वाले यात्रियों को रास्ता दिया जाता है। इसी दौरान कहासुनी बढ़ गई और कुछ ही क्षणों में मामला हाथापाई तक पहुंच गया। रेलवे सूत्रों के अनुसार योग एक्सप्रेस सुबह 5:19 के बजाय 5:53 बजे शाहदरा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर पहुंची थी और दो मिनट बाद 5:55 बजे रवाना हो गई। डीसीपी रेलवे के अनुसार मुजफ्फरनगर स्टेशन से पकड़े गए सभी आरोपी छात्र हैं।

सूचना दी तो क्यों नहीं पहुंची एंबुलेंस 

घटना के समय प्लेटफॉर्म पर आरपीएफ का जवान मौजूद था लेकिन वह बचाव नहीं कर सका। आरपीएफ का कहना है कि एंबुलेंस को सूचना दी गई थी लेकिन घायल पंकज को ई-रिक्शा से जीटीबी अस्पताल ले जाया गया। हैरत है कि व्यस्त रेलवे स्टेशन पर गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही रहती है और सुबह का समय सबसे व्यस्त समय होता है। इसके बावजूद आपात स्थिति में घायल को निजी साधन के भरोसे अस्पताल भेजा गया। 

मां करती रहीं इंतजार, पत्नी गई थी देहरादून 

दिल्ली के शाहदरा रेलवे स्टेशन पर जिस समय पंकज को छात्र पीट रहे थे उस समय उनके निज निवास मोहल्ला औरंगाबाद शेखपुरा पर उनकी मां कविता इंतजार कर रही थी। उन्होंने पंकज को फोन किया तो किसी और ने उठाया और बेटे की मौत की खबर दी। इतना सुनते ही पंकज के परिवार वालों में चीख-पुकार मच गई। दिल्ली में पोस्टमार्टम के बाद शनिवार दोपहर परिवार वाले शव लेकर आए और यहां अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने बताया कि पंकज की सात साल पहले बड़ौत की पूजा के साथ शादी हुई थी।

पंकज का एक बेटा सम्राट (5)और डेढ़ साल की बेटी मिष्ठी है। पंकज का साला ऋषि देहरादून में नौकरी करता है। गर्मियों की छुट्टी पर दस दिन पहले पूजा दोनों बच्चों को लेकर अपने भाई के यहां देहरादून चली गई थी। शनिवार सुबह पंकज की हत्या की खबर मिलते ही बदहवास हालत में पत्नी पूजा बच्चों को साथ ससुराल पहुंची। उनके परिवार में छोटा बेटा सन्नी, बेटी पायल, पंकज की पत्नी और उसके दो बच्चे रह गए हैं।

हमलावरों को नहीं रोक पाया जवान 

घटना के समय रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का एक जवान मौके पर था। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि जवान ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन हमलावरों को प्रभावी ढंग से रोक नहीं सका। घटना से संबंधित वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पुलिसकर्मी युवकों को रोकते दिख रहा है लेकिन युवकों की जगह वह पंकज का हाथ पकड़ रहा है। पंकज प्लेटफार्म पर जब गिर गए उन्हें तुरंत उठाने का प्रयास करने के बजाय पुलिसकर्मी उन्हें हाथ पकड़कर घसीटता दिखाई दिया। 

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