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-डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने 50 इलेक्ट्रॉनिक कूड़ा कलेक्शन वाहनों को दिखाई हरी झंडी, जागरूकता वीडियो का भी किया शुभारंभ
-गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए डिजिटल अभियान तेज, हर वार्ड तक पहुंचेगा स्वच्छता का संदेश
-स्मार्ट ट्रांसफर स्टेशन से प्रोसेसिंग यूनिट तक वैज्ञानिक तरीके से होगा कचरे का निस्तारण, जनभागीदारी पर रहेगा विशेष जोर
-हर घर में गीला और सूखा कचरा अलग होगा, तभी स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनेगा शहर: बृजेश पाठक

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने गुरुवार को नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने की दिशा में शुरू की गई नई पहल का शुभारंभ करते हुए कहा कि  ‘यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना शुरू कर दे तो शहर को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को सफल बनाने के लिए केवल नगर निगम के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी सबसे अधिक जरूरी है। ‘ उप मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद नगर निगम की 50 इलेक्ट्रॉनिक डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर उन्होंने शहरवासियों को कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार की गई 1 मिनट 34 सेकेंड की ज्ञानवर्धक वीडियो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर महापौर एवं नगर आयुक्त ने उन्हें नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे कचरा पृथक्करण जागरूकता अभियान की विस्तृत जानकारी भी दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि गाजियाबाद नगर निगम वैज्ञानिक एवं आधुनिक तरीके से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। घर-घर से एकत्र होने वाले कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में संग्रहित कर स्मार्ट ट्रांसफर स्टेशनों के माध्यम से प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिक अपने घरों से ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करें। यदि स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण सुनिश्चित हो जाए तो न केवल कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण आसान होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। नगर निगम अधिकारियों ने उप मुख्यमंत्री को बताया कि शहर में व्यापक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत तैयार की गई वीडियो में एक सामान्य परिवार के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि रसोई से निकलने वाला गीला कचरा तथा प्लास्टिक, कागज, कांच और धातु जैसे सूखे कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में रखना कितना आवश्यक है। वीडियो का उद्देश्य लोगों की दिनचर्या में कचरा पृथक्करण की आदत विकसित करना है, ताकि स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप मिल सके। डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। नगर निगम द्वारा आधुनिक तकनीक के माध्यम से कूड़ा संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।

उन्होंने कहा कि नई इलेक्ट्रॉनिक कूड़ा कलेक्शन गाडिय़ां घर-घर से समयबद्ध तरीके से कचरा संग्रहित करेंगी, जिससे सफाई व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। साथ ही नागरिकों को भी अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए नगर निगम का सहयोग करना चाहिए। महापौर एवं नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम लगातार वार्ड स्तर पर जनजागरूकता अभियान चला रहा है। अधिकांश परिवार अब गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन का उपयोग करने लगे हैं। निगम की टीमें घर-घर जाकर लोगों को कचरा पृथक्करण के फायदे समझा रही हैं तथा अब डिजिटल माध्यम से भी इस संदेश को अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। उनका कहना था कि जागरूकता ही स्वच्छ शहर की सबसे मजबूत नींव है। कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने नगर निगम अधिकारियों से अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि शहर के प्रत्येक वार्ड, कॉलोनी, बाजार और आवासीय क्षेत्र तक जागरूकता अभियान को और अधिक व्यापक बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि स्कूलों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा स्थानीय नागरिक समितियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए, ताकि प्रत्येक व्यक्ति कचरा पृथक्करण की आवश्यकता को समझ सके और इसे अपनी दैनिक आदत बना सके। इस अवसर पर विधायक संजीव शर्मा, पार्षद राजीव शर्मा, पार्षद पूनम सिंह, पार्षद संतोष, पार्षद दयानंद शर्मा, पार्षद नीरज गोयल सहित नगर निगम के अनेक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने शहरवासियों से अपील की कि वे गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर नगर निगम के स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। कार्यक्रम के अंत में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने विश्वास जताया कि यदि नगर निगम के प्रयासों के साथ नागरिकों का सहयोग निरंतर मिलता रहा तो गाजियाबाद स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी शहरों में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

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