Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज अक्सर लोगों को सही रास्ता दिखाते हुए आध्यात्म की ओर बढ़ने की बात कहते हैं. हाल ही में उन्होंने एक ऐसी घटना का जिक्र किया, जिसने लोगों को हैरान कर दिया. उन्होंने एक बच्चे की स्थिति के बारे में और आज की युवा पीढ़ी के बारे में बात की.
संत प्रेमानंद महाराज का आध्यात्म ज्ञान
संत प्रेमानंद महाराज ने बताया कि उनके पास एक बच्चा आया था, जिसने कहा कि वह नौवीं कक्षा से शराब और गलत संगति में फंस गया है और अब वह 12वीं कक्षा में है. लड़के ने कहा, ‘इस समय मेरी हालत ऐसी हो गई है कि लगता है, पता नहीं कब खुद को नष्ट कर लूं’. महाराज जी ने कहा कि यह सिर्फ एक बच्चे की बात नहीं है, बल्कि आज हजारों बच्चों की यही स्थिति है.
क्या है बच्चों के बिगड़ने का कारण?
महाराज जी ने इसका कारण बताते हुए कहा कि बच्चों में गलत आचरण पैदा होने का सबसे बड़ा कारण आध्यात्मिकता का अभाव है. माता-पिता को खुद आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है, तो वे बच्चों को क्या शिक्षा देंगे. उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे को स्कूल में शिक्षक डांटते हैं, तो माता-पिता खुद शिक्षक को ही डांटने लगते हैं, जिससे बच्चों का हौसला बढ़ जाता है और वे गलत आचरण की ओर बढ़ने लगते हैं. जिन बच्चों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, उनसे माता-पिता अवहेलनात्मक बातें करते हैं और कई बार हिंसक व्यवहार भी अपनाते हैं.
क्या है गलत प्रवृत्तियों से निकलने का रास्ता?
उन्होंने कहा कि बिना आध्यात्म के बच्चे गलत रास्ते की ओर बढ़ेंगे और फिर चोरी-चकारी करने लगेंगे. किसी के गले से चेन या कानों से कुंडल निकालते समय उन्हें जरा भी दया नहीं आएगी कि सामने वाले को कितना कष्ट होगा. संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि नई पीढ़ी जो बिगड़ रही है, वह आध्यात्म के जरिए ही सुधर सकती है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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