-अधिक मास की अंतिम एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना से मिलेगी अक्षय पुण्य की प्राप्ति
-प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि और सोमवती अमावस्या सहित 10 दिनों तक बनेंगे विशेष धार्मिक संयोग
-धार्मिक अनुष्ठानों के बाद खुलेंगे शुभ मांगलिक कार्यों के द्वार, श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व का समय
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। ज्येष्ठ अधिक मास की अंतिम और अत्यंत पुण्यदायी परमा एकादशी के अवसर पर श्री शिव हनुमत धाम कष्ट निवारण धाम एवं श्री पार्थ कृष्णम ज्योतिष, वास्तु एवं कर्मकांड केंद्र, ग्रीन सिटी बी-2, छपरौला के अध्यक्ष आचार्य पंडित श्री मनोज कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने श्रद्धालुओं को इस दुर्लभ आध्यात्मिक कालखंड के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि परमा एकादशी से लेकर सोमवती अमावस्या तक का समय सनातन धर्म में अत्यंत शुभ, पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। आचार्य मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अधिक मास में आने वाली परमा एकादशी को कमला एकादशी और पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी सामान्य एकादशियों की तुलना में अधिक फलदायी मानी गई है और इसका संयोग लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। उन्होंने कहा कि इस दिन भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना, व्रत, जप, तप और दान करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष परमा एकादशी पर शोभन योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो इसकी महत्ता को और अधिक बढ़ा रहा है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन किया गया पुण्य कर्म कई गुना फल प्रदान करता है। श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ तथा महालक्ष्मी की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
आचार्य मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि परमा एकादशी के बाद भी लगातार कई महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक तिथियां आ रही हैं, जो साधना और भक्ति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी जाती हैं। 12 जून को प्रदोष व्रत, 13 जून को मास शिवरात्रि, 14 एवं 15 जून को अमावस्या, 16 जून को करवीर व्रत, 17 जून को रंभा व्रत, 18 जून को गुरु पुष्य योग एवं उमावतार, 19 जून को महादेव पंचमी तथा 20 जून को षष्ठी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरा कालखंड विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि प्रदोष व्रत और मास शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की विशेष आराधना करें। इन दोनों तिथियों पर शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। भगवान भोलेनाथ की कृपा से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आचार्य ने आगे कहा कि 15 जून को पडऩे वाली सोमवती अमावस्या इस वर्ष का अत्यंत दुर्लभ और विशेष संयोग है। सोमवार के दिन अमावस्या का होना सनातन धर्म में अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और भगवान शिव तथा भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। जो श्रद्धालु किसी तीर्थ स्थल या गंगा स्नान के लिए नहीं जा सकते, वे अपने घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर दान-पुण्य कर सकते हैं। आचार्य मनोज कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अधिक मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ था, लेकिन अधिक मास की समाप्ति के साथ ही पुन: शुभ कार्यों का शुभारंभ हो जाएगा। ऐसे में यह समय आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ जीवन में नए शुभ कार्यों की शुरुआत का भी संकेत देता है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में व्रत, पूजा, दान और सेवा का विशेष महत्व है।
यदि श्रद्धालु इन पवित्र तिथियों का लाभ श्रद्धा और नियमपूर्वक उठाएं तो उन्हें आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। अंत में आचार्य पंडित श्री मनोज कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने समस्त श्रद्धालुओं से परमा एकादशी, प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि और सोमवती अमावस्या जैसे दुर्लभ संयोगों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह समय भक्ति, साधना और आत्मिक शुद्धि का स्वर्णिम अवसर है, जिसे श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाना चाहिए।
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