जयपुर के पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड में जान गंवाने वालों के परिवार की तो दुनिया ही उजड़ गई।
जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में 9 जून (मंगलवार) की सुबह हुए अवैध पटाखा फैक्ट्री हादसे में सिर्फ मजदूरों की मौत नहीं हुई है। इस भीषण अग्निकांड ने कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली है।
किसी का बेटा गया तो किसी का भाई, किसी ने अपने दोस्त को खोया है तो किसी ने पति को। कुल मिलाकर 7 परिवारों की दुनिया उजड़ गई। हादसे के बाद से पूरी बस्ती में सिर्फ चीखें, सिसकियां और अपनों को खोने का दर्द गूंज रहा है।
इसी इलाके के राक्ष्या की ढाणी के रहने वाले याकूब के करीम नगर-बी स्थित मकान नंबर-88 में यह अवैध फैक्ट्री चल रही थी। याकूब के साथ ही फैक्ट्री संचालक फिरोज भी फरार है। इस घने रिहायशी इलाके में हुए ब्लास्ट ने एक बच्चे और दो सगे भाइयों समेत 8 लोगों को मौत की नींद सुला दिया।
दैनिक भास्कर की टीम हादसे के शिकार परिवारों के घर पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर आंखें नम हो गईं।
आगे बढ़ने से पहले हादसे की ये 3 तस्वीरें देखिए…
जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में 9 जून की सुबह अवैध पटाखा फैक्ट्री की आग में झुलसे दो युवक तड़पते रहे थे।
झुलसने के बाद एक युवक अवैध पटाखा फैक्ट्री के पास ही कुछ इस तरह से तड़पता रहा था।
झुलसे लोग जमीन पर गिरकर तड़पते रहे, कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।
मेरा बच्चा बहुत भोला था, मैं उसके बिना जिंदा नहीं रह पाऊंगी
16 साल का मोहम्मद रब्बिल तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। स्कूल की छुट्टियां होने के कारण वह अक्सर फैक्ट्री के आसपास चला जाता था, क्योंकि वहां उसके कुछ दोस्त काम करते थे। 9 जून की सुबह वह घर से सिर्फ इसलिए निकला था कि वह वहां काम करने वालों को पानी पिला सके। इस हादसे में रब्बिल की भी जान चली गई।
मां नाजमीन बानो बदहवास हैं। कहती हैं- सुबह बेटा घर आया और बोला कि गोदाम वालों ने पानी मंगवाया है। वह दो बोतल पानी लेकर गया था। कुछ देर बाद आग की खबर आई। मैं भागकर मौके पर पहुंची, लोग झुलसी हालत में बाहर निकल रहे थे, लेकिन मेरा रब्बिल कहीं नहीं था। मेरा बच्चा बहुत भोला था, उसने कोई गुनाह नहीं किया था। मेरे छोटे बच्चों को ले जाओ, पर मेरा बड़ा बेटा मुझे वापस दे दो… उसके बिना मैं जिंदा नहीं रह पाऊंगी।
मोहम्मद रब्बिल की मां नाजमीन बानो को संभालती हुई नानी।
पिता बीमार, घर का सहारा चला गया
रब्बिल के पिता सिकंदर कुरैशी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्हें नियमित रूप से खून चढ़ाना पड़ता है। परिवार पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, अब इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। रोते-रोते बार-बार बेहोश हो रही मां नाजमीन जब भी होश में आती, मोबाइल में रब्बिल की तस्वीर देख फूट-फूटकर रो पड़ती। नानी ने रुंधे गले से कहा- मैंने उसे अपने बच्चे की तरह पाला था, मेरा रब्बिल जरूर आएगा।
दोनों सगे भाइयों के शव देख भाई बेसुध हुआ
इस हादसे का शिकार दो सगे भाई आजीम (18) और बिलाल (30) भी हुए हैं। सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में भाई का शव लेने पहुंचे छोटे भाई राशिद खान की आंखों के आंसू सूख चुके थे।
राशिद ने बताया कि छोटा भाई आजीम पिछले दो साल से इस फैक्ट्री में काम कर रहा था। बड़ा भाई बिलाल सिलाई का काम करता था। 9 जून को बिलाल सिर्फ अपने भाई आजीम से मिलने फैक्ट्री आया था। दोनों बैठकर बातें कर रहे थे कि अचानक जोरदार धमाका हुआ और दोनों आग की लपटों में घिर गए।
बिलाल अपने पीछे पत्नी और 3 साल व 1 साल की दो मासूम बेटियों को छोड़ गया है। 18 साल के आजीम की शादी की बात चल रही थी। परिवार उसके सेहरे के सपने बुन रहा था, लेकिन एक झटके में सब खाक हो गया।
SMS हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में बिलाल और आजीम के छोटे भाई राशिद खान।
बचपन की दोस्ती, मौत भी जुदा नहीं कर सकी
हादसे में जान गंवाने वाले समीर खान (20) और आजीम (18) बचपन के पक्के दोस्त थे। दोनों गली-मोहल्ले में साथ घूमते थे, साथ बड़े हुए और बाद में एक ही फैक्ट्री में काम करने लगे।
9 जून की सुबह जब फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ, तो दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को नाजुक हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। नियति का खेल देखिए- बचपन के इन दोनों दोस्तों ने अस्पताल में महज कुछ ही मिनटों के अंतराल में एक साथ दम तोड़ दिया।
घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
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