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गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार काला नमक धान तराई क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के लिए काफी उपयुक्त है. इसकी खुशबू और स्वाद इसे सामान्य धान से अलग बनाते हैं, बाजार में इसका मूल्य भी अन्य किस्मों की तुलना में अधिक मिलता है. सरकार भी इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. सांबा मसूरी देश की लोकप्रिय धान किस्मों में से एक है. इसका चावल हल्का, मुलायम और स्वादिष्ट होता है. होटल और घरेलू उपयोग दोनों में इसकी मांग बनी रहती है.

गोरखपुर: धान की खेती में अच्छी पैदावार का आधार सही बीज का चयन माना जाता है. रोपाई से लगभग 25 से 30 दिन पहले नर्सरी में बीज तैयार किए जाते हैं, ताकि समय पर खेत में रोपाई की जा सके. पूर्वांचल और तराई क्षेत्र की जलवायु को देखते हुए कुछ धान की किस्में किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित होती हैं. इनकी बाजार में मांग भी अच्छी रहती है और स्वाद के कारण उपभोक्ता इन्हें पसंद करते हैं.

काला नमक चावल है पूर्वांचल की पहचान

गोरखपुर और आसपास के तराई क्षेत्र में काला नमक धान की विशेष पहचान है. गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के प्रोफेसर अनुपम दुबे के अनुसार काला नमक धान तराई क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के लिए काफी उपयुक्त है. इसकी खुशबू और स्वाद इसे सामान्य धान से अलग बनाते हैं, बाजार में इसका मूल्य भी अन्य किस्मों की तुलना में अधिक मिलता है. सरकार भी इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. सांबा मसूरी देश की लोकप्रिय धान किस्मों में से एक है. इसका चावल हल्का, मुलायम और स्वादिष्ट होता है. होटल और घरेलू उपयोग दोनों में इसकी मांग बनी रहती है. यह किस्म किसानों को अच्छा उत्पादन देने के साथ बाजार में बेहतर कीमत भी दिलाती है.

सरयू-52 पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बोई जाने वाली किस्मों में शामिल है. यह कम समय में तैयार हो जाती है और रोगों के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील मानी जाती है. इसकी पैदावार अच्छी होती है, इसलिए छोटे और बड़े दोनों किसान इसे पसंद करते हैं.

पूसा बासमती है सुगंधित किस्म की चावल

जहां सिंचाई और खेत की स्थिति बेहतर होती है, वहां किसान पूसा बासमती जैसी सुगंधित किस्मों का भी चयन कर सकते हैं. इन किस्मों का निर्यात बाजार मजबूत है और सामान्य धान की तुलना में अधिक लाभ मिलने की संभावना रहती है. पूर्वांचल में नरेंद्र-97, नरेंद्र-359 और स्वर्णा जैसी किस्में भी काफी लोकप्रिय हैं. ये किस्में मौसम की अनिश्चितताओं को सहन करने में सक्षम मानी जाती हैं और अच्छी पैदावार देती हैं. कई किसान मुख्य फसल के रूप में इनका उपयोग करते हैं.

नर्सरी की तैयारी है सबसे अहम

रोपाई से लगभग एक माह पहले नर्सरी तैयार कर लेनी चाहिए. बीज उपचार के बाद ही बुवाई करने से रोगों का खतरा कम होता है और पौधे मजबूत बनते हैं. स्वस्थ पौध तैयार होने पर रोपाई के बाद फसल की वृद्धि भी बेहतर होती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल के किसान यदि अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार काला नमक, सरयू-52, सांबा मसूरी, नरेंद्र सीरीज और स्वर्णा जैसी उन्नत किस्मों का चयन करें तो उत्पादन बढ़ाने के साथ बेहतर मुनाफा भी प्राप्त कर सकते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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