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-बाइक विवाद से शुरू हुई रंजिश का खूनी अंत, पिता की उकसाहट और साथियों की साजिश का हुआ पर्दाफाश
-खोड़ा पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से मुख्य आरोपी मारा गया, कई आरोपी जेल भेजे गए, फरारों की तलाश जारी
-पीडि़त परिवार को मुख्यमंत्री राहत, पांच लाख की सहायता और रोजगार का भरोसा; न्याय मिलने पर परिवार ने जताया संतोष

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। खोड़ा थाना क्षेत्र के नवनीत विहार में 17 वर्षीय छात्र सूर्या प्रताप चौहान की निर्मम हत्या से उपजे आक्रोश के बीच गाजियाबाद पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में ऐसी कार्रवाई की, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सूर्या हत्याकांड के मुख्य आरोपी और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश असद को रविवार तड़के पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस की इस कार्रवाई को न केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है, बल्कि इसे पीडि़त परिवार को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में भी देखा जा रहा है।
डीसीपी ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल के अनुसार, 28 मई को बकरीद के दिन खोड़ा क्षेत्र में 11वीं कक्षा के छात्र सूर्या चौहान की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था और पुलिस पर जल्द कार्रवाई का दबाव था। कमिश्नरेट पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई टीमों का गठन किया और लगातार दबिश, सीसीटीवी विश्लेषण, तकनीकी सर्विलांस तथा मुखबिर तंत्र के माध्यम से आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के बाद मुख्य आरोपी असद फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।

शनिवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि असद अपने साथियों से मिलने और पैसे लेकर क्षेत्र से फरार होने की योजना बना रहा है। सूचना मिलते ही खोड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम सक्रिय हो गई और खोड़ा तथा वसुंधरा क्षेत्र में व्यापक चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया। तड़के करीब चार बजे पुलिस को बाइक पर सवार असद और उसका एक साथी दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि असद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान एक पुलिसकर्मी भी गोली लगने से घायल हुआ, जबकि असद का साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने मौके से एक पिस्टल और कारतूस बरामद किए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की सतर्कता, त्वरित रणनीति और अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की कार्यशैली को सामने ला दिया। कमिश्नरेट पुलिस ने घटना के बाद लगातार अभियान चलाकर पहले कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और फिर मुख्य आरोपी तक पहुंचकर पूरे मामले की दिशा बदल दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तेजी से पुलिस ने कार्रवाई की, उससे अपराधियों के खिलाफ कानून का भय और मजबूत हुआ है।

जांच के दौरान हत्या की जो कहानी सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी फरहान ने बताया कि बकरीद के दिन सुबह सूर्या और असद के बीच बाइक चलाने को लेकर विवाद हुआ था। दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और अक्सर साथ रहते थे। मामूली कहासुनी के बाद मामला इतना बढ़ गया कि असद ने अपने पिता नवाब और साथियों के साथ मिलकर सूर्या को सबक सिखाने की योजना बना ली। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी फरहान ने हत्या में इस्तेमाल होने वाला चाकू उपलब्ध कराया था, जबकि असद के पिता नवाब ने कथित रूप से उसे उकसाते हुए कहा था कि आज इसकी कहानी खत्म कर दो। इसके बाद योजना बनाकर सूर्या को मिलने के लिए बुलाया गया। पहले उसे कुर्बानी दिखाने और फिर ईद की पार्टी में आने का बहाना बनाया गया। जैसे ही सूर्या मौके पर पहुंचा, उस पर चाकू से हमला कर दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि चाकू का वार इतना गहरा था कि वह करीब चार इंच तक शरीर में घुस गया था।

घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए असद के पिता नवाब, उसके साथी फरहान और आतिफ समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे षड्यंत्र में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सूर्या की हत्या के बाद खोड़ा क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल बन गया था। पोस्टमार्टम के बाद जब छात्र का शव घर पहुंचा तो परिजन और स्थानीय लोग भावुक हो उठे। अंतिम संस्कार को लेकर कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, राष्ट्रीय हनुमान दल और हिंदू रक्षा दल समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील करना पड़ा। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर डटे रहे। अधिकारियों ने धैर्य और संवाद के जरिए परिजनों तथा स्थानीय लोगों को समझाया। कई दौर की वार्ता के बाद अंतिम संस्कार के लिए सहमति बनी और सूर्या का अंतिम संस्कार गाजीपुर श्मशान घाट में किया गया। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। हत्याकांड के बाद प्रदेश सरकार भी सक्रिय दिखाई दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीडि़त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सूर्या की मां सरोज चौहान को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की। साथ ही परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।

रविवार को सांसद अतुल गर्ग, कैबिनेट मंत्री सुनील कुमार शर्मा, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ और अन्य जनप्रतिनिधियों ने पीडि़त परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को न्याय और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है और कानून के दायरे में रहते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। मुख्य आरोपी के मारे जाने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सूर्या की मां सरोज चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रशासन और मीडिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को न्याय मिलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है और उन्हें विश्वास है कि बाकी आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।

सूर्या हत्याकांड में गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई को कानून व्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का उदाहरण माना जा रहा है। हत्या की वारदात से लेकर मुख्य आरोपी के एनकाउंटर और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तक पुलिस ने जिस तेजी, तकनीकी दक्षता और समन्वय के साथ काम किया, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, अपराधियों के लिए कानून से बच निकलना आसान नहीं है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, ताकि इस बहुचर्चित हत्याकांड में पीडि़त परिवार को पूर्ण न्याय मिल सके।

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