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लोकल 18 से बात करते हुए मऊ के पकड़ी खुर्द के रहने वाले प्रगतिशील किसान रामलेश मौर्य ने बताया कि उद्यान विभाग के सहयोग से उन्हें प्याज का बीज मिला. उन्होंने इस प्याज की खेती को समय के अनुसार थोड़ा लेट शुरू किया. लोगों ने मना किया कि बुवाई का समय चला गया लेकिन ड्रिप व बेड विधि से प्याज की फसल अच्छी हुई.

मऊः  खेती का सही तरकीब पता नहीं होने से किसानो को घाटा उठाना पड़ता है. जिससे उनकी पूरी मेहनत व लागत बेकार हो जाती है. लेकिन वहीं जब कृषि की तकनीकि व बारिकियों के बारे में कहीं से जानकारी मिल जाती है तो किसान बंपर पैदावार कर मालामाल हो जाते हैं. उसी का उदाहरण है मऊ के पकड़ी के रहने वाले रामलेश मौर्य की कहानी, जो समय खत्म होने के बाद भी प्याज की खेती से अपनी किस्मत बदल रहे हैं. आईए जानते हैं क्या है इस खेती करने का सही तरीका.

ड्रिप लगाकर बेड विधि से करें प्याज की खेती

लोकल 18 से बात करते हुए मऊ के पकड़ी खुर्द के रहने वाले प्रगतिशील किसान रामलेश मौर्य ने बताया कि उद्यान विभाग के सहयोग से उन्हें प्याज का बीज मिला. उन्होंने इस प्याज की खेती को समय के अनुसार थोड़ा लेट शुरू किया. खेत खाली नहीं होने से लेट शुरू किया. हालांकि आमतौर पर प्याज की खेती फरवरी महीने से पहले की जाती है. लेकिन उन्होंने फरवरी महीने में इस प्याज के बीज को लगाया. जब वह प्याज की रोपाई कर रहे थे तो उन्हें कई लोगों ने मना किया और कहा कि अब आपकी प्याज नहीं होगी. लेकिन उन्होंने इस प्याज की खेती करने का सही तरीका अपनाया और आज बेहतर प्याज हो रही है और इसकी बाजार में बेहतर सेल भी हो रही है.

उद्यान विभाग से मिला खेती करने का सही तरीका

उद्यान विभाग द्वारा खेती करने का सही तरीका अपनाया और उन्होंने ड्रिप लगाकर बेड विधि से इस खेती को किया और एक साइज की सभी प्याज हो गई हैं जिसका मार्केट में अच्छा रेट भी मिल रहा है. हालांकि बहुत अधिक बड़ी प्याज होती है तो वह सड़ने लगते हैं लेकिन जो उनके खेतों में प्याज की साइज है वह सड़ती नहीं है और एक राशि की एक साइज की सभी प्याज हो गई हैं.

हालांकि उद्यान विभाग ने उन्हें यह बीज दिया था. जो एनपीआर वैरायटी की है जो एक राशि की लाल प्याज हो रही है. हालांकि प्याज की आमतौर पर प्लांटनेशन जनवरी महीने में होती है. लेकिन उन्होंने एक महीना लेट फरवरी महीने में बीज की रोपाई की जिसके वजह से यह फसल इस तरीके की है यदि वह जनवरी महीने में प्लांटनेशन करते तो उनके इस प्याज की राशि दो गुना बड़ी होती.

कम खर्चे में होगी अधिक पैदावार

रामलेश मौर्य बताते हैं कि ड्रिप लगाकर यदि बेड विधि से प्याज की खेती करते हैं और वह लेट होने के बाद भी आपकी प्याज की खेती सही होगी. यही वजह है कि लेट होने के बाद भी उनकी पैदावार अधिक हुई है. इस विधि से खेती करने में लागत कम और पैदावार अधिक होता है. यही वजह है कि उन्होंने इस विधि को अपनाया है और पैदावार अधिक कर रहे हैं तथा इस प्याज की खेती से बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. हालांकि वह पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती करते हैं इस वजह से कोई अन्य प्रकार की खाद इसमें नहीं डाले हैं केवल फंगीसाइड एक बार छिड़काव किया गया है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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