उत्तर प्रदेश का बांदा जिला मई 2026 में 48.2°C तापमान के साथ देश और दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल हो गया है. नौतपा शुरू होने से पहले ही बाजारों में सन्नाटा और सड़कों पर थर्मल लॉकडाउन जैसे हालात बन चुके हैं. विशेषज्ञों के अनुसार अवैध खनन, जंगलों की कटाई, पहाड़ियों का विनाश और लगातार घटती हरियाली ने बुंदेलखंड को ‘ओपन एयर फर्नेस’ में बदल दिया है. अब 25 मई से शुरू हो रहे नौतपा के दौरान तापमान 50°C पार जाने की आशंका जताई जा रही है, जिससे इंसानों, पशुओं और पर्यावरण पर बड़ा संकट मंडरा रहा है.
जी हां, बांदा की यह खौफनाक तपिश कोई सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि प्रकृति का इंसानी लालच के मुंह पर जड़ा गया एक जोरदार तमाचा है. ‘विकास’ का चोला पहनाकर जिस बर्बादी के लिए सभी अपनी छाती पीट रहे थे, असल में उसी ने इस पूरे इलाके को तपिश की भट्टी में झोंक दिया है. चंद रुपयों के मुनाफे के लिए माफियाओं ने नदियों का जमकर खनन किया और पहाड़ियों को बारूद से उड़ाकर समतल कर दिया. जंगल का तो पूछिये ही मत. कभी छोटी-छोटी पहाडि़यों और जंगलों से घिरे रहने वाले बांदा में फिलहला हरियाली के नाम पर सिर्फ 3 फीसदी इलाका ही बचा है. बांदा की इस बर्बादी के लिए खनन माफिया से भी ज्यादा धृतराष्ट्र बन चुका प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व जिम्मेदार है, जिसमें हंसते-खेलते बुंदेलखंड को एक ‘ओपन-एयर फर्नेस’ में तब्दील कर दिया है.
बांदा में अभी बाकी है नौतपा का टॉर्चर
बांदा में गर्मी से मची तबाही का यह दौर यहीं नहीं रुकने वाला है. 25 मई से ‘नौतपा’ शुरू होने जा रहा है, यानी वो 9 दिन जब सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है और रोहिणी नक्षत्र के कारण नौ दिनों तक ब्रह्मांड की सबसे भीषण आग सीधे जमीन पर बरसती है. जब नौतपा के बिना ही मई के तीसरे हफ्ते में बांदा 48.2°C पर खौल रहा है, तब यह सोचकर ही रूह कांप जाती है कि 25 मई के बाद बांदा का क्या हाल होगा? मौसम विज्ञानियों की मानें तो नौतपा के दौरान बांदा का पारा सारे पुराने रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करते हुए 50°C के पार जा सकता है. यह महज़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि इस अंचल के इंसानों, मवेशियों और बची-कुची वनस्पति के लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा है. नौतपा में चलने वाली लू नहीं, बल्कि आसमान से बरसते अंगारे होंगे जो बांदा को पूरी तरह झुलसा कर रख देंगे.
पहले भी कई बार धधक चुके के कई इलाके
- जून 2019 का 49.2°C तक पहुंच गया था पारा: यह बांदा के इतिहास का झुलसन भरा सबसे भीषण दिन था जब पारे ने 49.2°C को छू लिया था. इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया था. तपिश इतनी भयावह थी कि आसमान से उड़ते हुए पक्षी सीधे जमीन पर गिरकर दम तोड़ रहे थे और सड़कों का डामर पिघलने लगा था.
- अप्रैल 2022 में भी हो चुका है थर्मल ब्लास्ट: आमतौर पर मई और जून को सबसे गर्म माना जाता है, लेकिन अप्रैल 2022 में ही बांदा का तापमान 47.4°C पहुंच गया. इस रिकॉर्ड ने साबित कर दिया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब गर्मियों का चक्र न सिर्फ समय से पहले शुरू हो रहा है, बल्कि शुरुआत में ही जानलेवा रूप अख्तियार कर रहा है.
- अप्रैल 2026 में ध्वस्त हुआ 75 साल पुराना रिकॉर्ड: 2026 की शुरुआत बांदा के लिए काफी झुलसन भरी रही. अप्रैल महीने में यहां का तापमान 47.6°C दर्ज किया गया, जिसने साल 1951 के बाद से पिछले 75 सालों का सबसे उच्चतम रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस घटना ने चेतावनी दे दी थी कि आने वाला मई का महीना बांदा के लिए एक जलती हुई भट्टी लेकर आ रहा है.
- मई 2026: 48.2°C का ताजा वैश्विक रिकॉर्ड: मई 2026 के तीसरे हफ्ते में बांदा ने 48.2°C का आंकड़ा छूकर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे गर्म जगहों में अपनी जगह बना ली. जिले के कई कस्बों में लगातार कई दिनों से तापमान का 47°C से ऊपर बना हुआ है. यानी अब यह सामान्य हीटवेव नहीं, बल्कि एक जलवायु आपातकाल लागू हो चुका है.
- राजस्थान के पारंपरिक गर्म शहरों को पछाड़ना: पहले चुरू, फलोदी और जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी शहर देश में सबसे गर्म माने जाते थे, जहां पारा 48°C से 50°C तक जाता था. लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़ों को देखें तो बांदा ने इन सभी मरुस्थलीय शहरों को पीछे छोड़ दिया है. अब बुंदेलखंड का यह जिला गर्मी के मामले में देश का नया ‘ग्राउंड जीरो’ बन चुका है.
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