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Amethi News: अमेठी के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए अटल लैब और खास क्लब के जरिए रोजगार और हुनर की नई राह तैयार की जा रही है. इन लैब में बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि खेती, पर्यावरण, आधुनिक तकनीक और छोटे उद्योगों से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जा रही है. कई स्कूलों में बच्चे अचार, मुरब्बा, अगरबत्ती और धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनाना भी सीख रहे हैं, जिससे उनका व्यावहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भर बनने की क्षमता बढ़ रही है.

अमेठी: रोजगार आज के समय में जीवन की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक बन गया है. हर कोई चाहता है कि पढ़ाई के साथ-साथ उसे ऐसा हुनर भी मिले जिससे भविष्य में आत्मनिर्भर बना जा सके. इसी दिशा में सरकार और शिक्षा विभाग लगातार नए प्रयास कर रहे हैं. अब अमेठी जिले के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए ऐसा ही एक खास बदलाव देखने को मिल रहा है.
जिले के स्कूलों में अटल लैब और विशेष क्लब के जरिए बच्चों को नए हुनर सिखाए जा रहे हैं. इसका मकसद सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि बच्चों को रोजगार से जोड़ने वाली शिक्षा देना भी है. यहां बच्चों को खेती के आधुनिक तरीके, पर्यावरण की जानकारी और नई तकनीक से जुड़े उपकरणों की समझ दी जा रही है.

1570 से ज्यादा स्कूलों में चल रही अटल लैब की पहल
अमेठी जिले में चार तहसीलें हैं और यहां करीब 1570 से ज्यादा परिषदीय विद्यालय संचालित हैं. इन स्कूलों में अटल लैब स्थापित की गई है. इन लैब में बच्चे वैज्ञानिक तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं और व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर रहे हैं. यहां बच्चों को यह भी सिखाया जा रहा है कि खेती में आधुनिक उपकरण कैसे काम आते हैं और किस तरह नई तकनीक से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. इसके साथ ही बच्चों को छोटे-छोटे उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

बच्चे सीख रहे हैं आत्मनिर्भर बनने के कौशल
कई स्कूलों में बच्चे अचार, मुरब्बा, अगरबत्ती और धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनाना सीख रहे हैं. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. कई छात्र इस काम में काफी आगे भी निकल चुके हैं और अब वे खुद छोटे स्तर पर इन चीजों का निर्माण करने लगे हैं. इससे बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी काफी खुशी और फायदा मिल रहा है.

बढ़ रहा बच्चों का विकास
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार तिवारी ने बताया कि यह एक बहुत ही अच्छा और अभिनव प्रयास है. इसका उद्देश्य बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखना नहीं है बल्कि उन्हें व्यवहारिक ज्ञान देना भी है.
उन्होंने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि पढ़ाई के अलावा तय समय में बच्चों को इन गतिविधियों से जरूर जोड़ा जाए. इससे बच्चे आगे चलकर अपने लिए रोजगार के नए रास्ते खुद बना सकेंगे. उन्होंने कहा कि इस पहल से बच्चों को आने वाले समय में रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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