अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में 3 साल बाद बनने वाला यह दुर्लभ संयोग शिव और शनि की कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस दौरान आने वाले 2 प्रदोष व्रत सभी प्रकार के चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के अन्य दोषों से मुक्ति दिलाते हैं। यहाँ इस संयोग का महत्व और सरल उपाय दिए गए हैं।
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अधिकमास में कब कब रहेगा प्रदोष व्रत:
<strong>पहला प्रदोष: </strong>28 मई 2026 गुरुवार को गुरु प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।
<strong>दूसरा प्रदोष: </strong>11 जून 2026 शुक्रवार को शुक्र प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।
यह संयोग विशेष क्यों है?
<strong>अधिकमास का बल: </strong>अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है।
<strong>शिव-शनि का संबंध: </strong>प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो शनिदेव के गुरु हैं। इसलिए प्रदोष काल में शिव आराधना करने से शनिदेव शांत होते हैं।
<strong>चंद्र और शनि दोषों का अंत: </strong>कुंडली में कमजोर चंद्रमा (मानसिक तनाव) और शनि के कुप्रभाव (काम में रुकावट, आर्थिक तंगी) से मुक्ति के लिए यह सबसे उत्तम समय है।
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दोष मुक्ति के अचूक और सरल उपाय
1. चंद्र दोष मुक्ति के उपाय (मानसिक शांति और समृद्धि के लिए)
<strong>दूध और जल का अर्घ्य: </strong>प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) शिवलिंग पर कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर अर्पित करें।
<strong>सफेद वस्तुओं का दान: </strong>इस दिन किसी जरूरतमंद को चावल, चीनी या सफेद कपड़े का दान करें।
<strong>मंत्र जाप: </strong>'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें।
2. शनि दोष मुक्ति के उपाय (साढ़ेसाती, ढैय्या और कार्यों में सफलता के लिए)
<strong>काले तिल और सरसों का तेल: </strong>प्रदोष के दिन शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं और शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
<strong>शनि चालीसा का पाठ: </strong>शाम के समय शनि चालीसा या हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।
महामृत्युंजय मंत्र: इस संयोग में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से शनि जनित सभी कष्ट समाप्त होते हैं।
<strong>विशेष नोट: </strong>इस पावन समय में किसी भी तरह के तामसिक भोजन (अंडा, मांस, मदिरा) और वाद-विवाद से दूर रहें। व्रत न भी रख पाएं, तो शाम के समय शिव मंदिर जाकर दीपदान जरूर करें।
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