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- Airfare Hike Case; Supreme Court Vs Airlines Ticket Price Regulations | Tushar Mehta
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि एक ही दिन, एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली एक एयरलाइन कुछ अलग हवाई किराया लेती है, जबकि दूसरी एयरलाइनल अलग किराया लेती है। इसे सही किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार यात्रियों को राहत दे।
दरअसल जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सुनवाई की। उनकी मांग है कि देश में मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाया जाए, जो एयरलाइनों के किराए और एक्स्ट्रा चार्जेस पर निगरानी रखे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बेंच से कहा- हवाई किराया 300% तक बढ़ जाता है। इस पर बेंच ने मजाक में कहा- वकीलों की फीस भी कई बार 400% तक बढ़ जाती है, अब क्या किया जाए।
याचिकाकर्ता का दावा- नियम पहले, पालन नहीं हो रहा
लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि एयरक्राफ्ट एक्ट 1937 के तहत नियम पहले से ही हैं लेकिन समस्या यह है कि पालन नहीं किया गया। जब तक नए नियम नहीं बन जाते, पुराने नियम जारी रहेंगे।
साथ ही कहा गया है कि अगर DGCA को लगता है कि किसी खास स्थिति में, एयरलाइंस बहुत ज्यादा किराया वसूल रही हैं, तो वह निर्देश जारी करेगा।
बेंच ने लक्ष्मीनारायण से केंद्र के फाइल किए गए काउंटर-एफिडेविट का जवाब देने का कहा। साथ ही सॉलिसिटर जनरल की नई व्यवस्था के तहत नियम बनाने के लिए कंसल्टेशन प्रोसेस चलने वाली बात रिकॉर्ड की।
30 अप्रैल की सुनवाई में सरकार को फटकार लगाई थी
इससे पहले 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक पिटीशन पर एफिडेविट फाइल न करने के लिए केंद्र की खिंचाई की थी, जिसमें भारत में प्राइवेट एयरलाइन्स के हवाई किराए और सहायक चार्ज में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने के लिए रेगुलेटरी गाइडलाइंस की मांग की गई थी।
कोर्ट ने केंद्र से एक एफिडेविट के साथ एक एप्लिकेशन फाइल करने को कहा था, जिसमें यह बताने के निर्देश दिए गए थे कि एफिडेविट फाइल क्यों नहीं किया गया है। इसके लिए और समय क्यों मांगा गया है।
अनियमित हवाई किराए पर पहले भी फटकार लगा चुका सुप्रीम कोर्ट
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CJI बोले- बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे: ये मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं
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