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भारत का पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा भौगोलिक रूप से बेहद अनोखा है. यह राज्य अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश के साथ साझा करता है. त्रिपुरा तीन दिशाओं (उत्तर, दक्षिण और पश्चिम) से बांग्लादेश की सीमाओं से घिरा हुआ है. सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह राज्य भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.
त्रिपुरा को तीन तरफ से घेरने वाला देश कौन सा है? जवाब है बांग्लादेश.
नई दिल्ली: भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में सात बहनों यानी ‘सेवन सिस्टर्स’ के नाम से मशहूर राज्यों में त्रिपुरा अपनी एक अलग पहचान रखता है. यह राज्य भौगोलिक रूप से इतना दिलचस्प है कि इसका नक्शा देखने पर यह पूरी तरह बांग्लादेश के अंदर घुसा हुआ नजर आता है. त्रिपुरा भारत का वह एकमात्र राज्य है जो उत्तर, दक्षिण और पश्चिम यानी तीन तरफ से बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा से घिरा हुआ है. इसकी भौगोलिक बनावट इसे सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बनाती है. त्रिपुरा की कुल सीमा रेखा का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा विदेशी जमीन को छूता है. केवल पूर्व की ओर से यह भारत के असम और मिजोरम राज्यों के साथ अपनी सीमा साझा करता है. यही कारण है कि इसे अक्सर ‘लैंडलॉक्ड’ राज्य की श्रेणी में भी रखा जाता है.
त्रिपुरा की भौगोलिक घेरेबंदी
त्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच की यह अनोखी सीमा करीब 856 किलोमीटर लंबी है. आजादी के समय हुए बंटवारे ने इस राज्य को बाकी भारत से लगभग काट ही दिया था. पहले के समय में त्रिपुरा का बंगाल के साथ बहुत गहरा व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध था. विभाजन के बाद यह राज्य भौगोलिक रूप से एक द्वीप की तरह हो गया. इसकी सुरक्षा का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के पास है. यहां की सीमाएं कहीं घने जंगलों से गुजरती हैं तो कहीं नदियों के बीच से निकलती हैं. इस तीन तरफा घेरेबंदी की वजह से त्रिपुरा में घुसपैठ और तस्करी की चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं.
बाकी भारत से जुड़ने के लिए क्या है एकमात्र रास्ता?
तीन तरफ से विदेशी सीमा होने के कारण त्रिपुरा के पास भारत के मुख्य हिस्से से जुड़ने के लिए बहुत संकरा रास्ता है. नेशनल हाईवे 8 जिसे त्रिपुरा की लाइफलाइन कहा जाता है, वह इसे असम के रास्ते बाकी देश से जोड़ता है. अगर यह रास्ता किसी वजह से बंद हो जाए तो त्रिपुरा का संपर्क पूरे भारत से कट सकता है. हालांकि हाल के वर्षों में चटगांव पोर्ट के जरिए त्रिपुरा तक सामान पहुंचाना आसान हो गया है. भारत सरकार अब इस राज्य को पूर्वोत्तर का लॉजिस्टिक हब बनाने पर तेजी से काम कर रही है.
आर्थिक और सांस्कृतिक विकास पर क्या पड़ा असर?
बांग्लादेश से तीन तरफ से घिरे होने के कारण यहां की संस्कृति पर बंगाली प्रभाव बहुत ज्यादा दिखता है. यहां की भाषा, खानपान और त्योहारों में बांग्लादेश और भारत के पश्चिम बंगाल की झलक साफ मिलती है. आर्थिक रूप से पहले यह राज्य बहुत पिछड़ा हुआ था क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन की लागत बहुत ज्यादा आती थी. अब कनेक्टिविटी बढ़ने से त्रिपुरा की रबर इंडस्ट्री और बांस उद्योग को वैश्विक पहचान मिल रही है.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें
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