कुछ ऐसी फिल्में ऐसी होती हैं, जो न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर पैसा कमाती हैं, बल्कि दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाती हैं. साल 2000 में आई फिल्म ‘धड़कन’ भी ऐसी ही एक मिसाल है. डायरेक्टर धर्मेश दर्शन की यह फिल्म न सिर्फ एक लव ट्रायंगल की इमोशनल कहानी थी, बल्कि इसके म्यूजिक ने भी इतिहास रच दिया था. इस फिल्म की सबसे खास बात यह थी कि ‘धड़कन’ शब्द लगभग हर सुपरहिट गाने में बुना गया था. प्यार, धोखे और बदले की यह कहानी आज भी उतनी ही ताजा लगती है जितनी 26 साल पहले लगती थी.
नई दिल्ली. साल 2000 की शुरुआत बॉलीवुड के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत थी. एक तरफ नई सदी शुरू हो रही थी, तो दूसरी तरफ हिंदी सिनेमा अपनी जड़ों की ओर लौट रहा था. इसी दौरान एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसने प्यार को जुनून और शालीनता के बीच परिभाषित किया. फिल्म का नाम था ‘धड़कन’. यह फिल्म न सिर्फ अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और शिल्पा शेट्टी के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी, बल्कि म्यूजिक की दुनिया में भी एक माइलस्टोन थी, जिसने कई चार्टबस्टर गाने दिए. फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका म्यूजिक था. कंपोजर जोड़ी नदीम-श्रवण ने फिल्म के लिए ऐसा म्यूजिक बनाया जो आज भी शादियों, रेडियो शो और प्लेलिस्ट का एक अहम हिस्सा है. लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि फिल्म का टाइटल ‘धड़कन’ इस फिल्म के हर गाने के बोल में बहुत बारीकी से शामिल किया गया था? यह बॉलीवुड में एक बहुत कम देखने को मिलता है, जहां फिल्म के नाम को टाइटल ट्रैक के अलावा दूसरे गानों में इतनी अहमियत दी गई हो.
आइए उन गानों पर एक नजर डालते हैं जिन्होंने इस फिल्म को अमर बना दिया. पहला गाना, ‘तुम दिल की धड़कन में रहते हो’ फिल्म की सेंट्रल थीम थी. कुमार सानू और अलका याग्निक का गाया यह गाना रोमांस का पर्याय बन गया. इसने तुरंत दर्शकों के मन में फिल्म का नाम पक्का कर दिया. दूसरे गाने, दिल ने ये कहां है दिल से… में ये लाइनें थीं- ‘मेरी धड़कनों को समझो, तुम्हें भी मुझसे प्यार करना चाहिए.’ उदित नारायण और कुमार सानू के अलग-अलग वर्शन ने इसे हर प्यार करने वाले के लिए एक पॉपुलर गाना बना दिया. फिल्म का तीसरा गाना, दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है- नुसरत फतेह अली खान का गाया यह विदाई गाना आज भी एक पॉपुलर वेडिंग एंथम है. बैकग्राउंड कोरस, ‘धड़कन…धड़कन, धड़कन…धड़कन’ ने एक अजीब टेंशन और इमोशन पैदा किया. चौथा गाना, अक्सर इस दुनिया में- इस लिरिक्स के साथ खत्म होता है- ‘आंखों से बात होती है, धड़कन भी साथ होती है.’ इस गाने ने फिल्म के इमोशनल कोशेंट को और मजबूत किया. इस बीच, फिल्म का आखिरी गाना, ना ना करते प्यार- में भी जोशीले लिरिसिस्ट समीर ने बड़ी चालाकी से लिखा है- ‘मेरी धड़कन कह रही है, अब दूर जाना नहीं.’
फिल्म की कहानी देव (सुनील शेट्टी) और अंजलि (शिल्पा शेट्टी) के एकतरफा प्यार से शुरू होती है. देव एक गरीब लड़का है जिसे सिर्फ अंजलि से प्यार है और बड़े सपने हैं. वहीं, अंजलि एक अमीर परिवार की बेटी है. समाज और परिवार के दबाव में अंजलि की शादी राम (अक्षय कुमार) से हो जाती है. राम के रोल में अक्षय कुमार ने एक आदर्श पति का रोल किया है, जो अपनी पत्नी का पास्ट जानते हुए भी उसे अपनाता है और उस पर बदलने का दबाव नहीं डालता. राम का कैरेक्टर गरिमा और सब्र का है. वहीं, सुनील शेट्टी का कैरेक्टर देव, फिल्म के दूसरे हाफ में एक विलेन-कम-हीरो के तौर पर उभरता है, जो धोखे का बदला लेने के लिए 500 करोड़ रुपये का एम्पायर बनाने के लिए वापस आता है.
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सुनील शेट्टी के डायलॉग आज भी मीम्स और मीम्स का हिस्सा हैं. उनका डायलॉग- ‘अंजलि, मैं तुम्हें भूल जाऊं ये हो नहीं सकता और तुम मुझे भूल जाओ ये मैं होने नहीं दूंगा’ बॉलीवुड के इतिहास के सबसे दमदार डायलॉग में से एक माना जाता है. ‘धड़कन’ की कहानी सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं थी, यह क्लास कॉन्फ्लिक्ट की भी कहानी थी. देव का गरीबी से अमीरी तक का सफर बदले की आग से भरा था. जब वह सालों बाद एक सफल बिजनेसमैन बनकर लौटता है, तो उसका मकसद सिर्फ अंजलि को जीतना ही नहीं होता, बल्कि उस समाज को बेइज्जत करना भी होता है जिसने उसे रिजेक्ट कर दिया था.
फिल्म का क्लाइमैक्स इमोशंस का क्लाइमैक्स था. जब देव को एहसास होता है कि अंजलि अब पूरी तरह से राम की हो गई है और उसके लिए इज्जत और प्यार रखती है, तो उसका बदला सैक्रिफाइस में बदल जाता है. यह बदलाव फिल्म को एक सिंपल लव स्टोरी से एक बेहतरीन फिल्म बना देता है. ‘राजा हिंदुस्तानी’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले धर्मेश दर्शन ने ‘धड़कन’ में विजुअल स्टोरीटेलिंग का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया.
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, लोकेशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन उस जमाने के हिसाब से काफी ग्रैंड थे. सुनील शेट्टी का मेकओवर और अक्षय कुमार का शानदार लुक खास तौर पर चर्चा में रहा. फिल्म की एडिटिंग और पेस ऐसी थी कि 2.5 घंटे से ज्यादा लंबी होने के बावजूद दर्शकों को कभी बोरियत महसूस नहीं हुई. हर गाने ने कहानी को आगे बढ़ाया, उसे रोका नहीं. समीर के लिरिक्स ने किरदारों के दर्द और खुशी को पूरी तरह से दिखाया.
रिलीज होने पर ‘धड़कन’ को क्रिटिक्स से मिले जुले रिव्यू मिले, लेकिन दर्शकों ने इसे पसंद किया. फिल्म बहुत सफल रही, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में. सुनील शेट्टी को इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड भी मिला. आज भी जब 90 और 2000 के दशक की शुरुआत के म्यूजिक की बात होती है, तो ‘धड़कन’ का जिक्र अक्सर होता है. सोशल मीडिया के इस जमाने में भी इस फिल्म के क्लिप्स और गाने अक्सर ट्रेंड करते रहते हैं.
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