दुधवा टाइगर रिजर्व से जुड़े मैलानी और भीरा के जंगल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं. इन्हीं जंगलों के बीच स्थित काली माता मंदिर का वातावरण लोगों को आध्यात्मिक शांति के साथ रोमांच का भी एहसास कराता है.
मां काली का मंदिर
स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर कई वर्षों पुराना है और यहां मां काली की प्रतिमा के साथ हनुमान मंदिर भी है. नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त माता के दरबार में नारियल, चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
यहां आते हैं बाघ!
इस मंदिर को लेकर सबसे खास और रहस्यमयी बात यह है कि यहां आज भी बाघ के आने की चर्चाएं होती हैं. स्थानीय लोगों और पुजारियों का दावा है कि कई बार देर रात मंदिर परिसर के आसपास बाघ के पदचिह्न दिखाई देते हैं. कुछ श्रद्धालुओं ने दूर से बाघ को मंदिर की ओर आते हुए भी देखा है. लोगों की मान्यता है कि यह मां काली का चमत्कार है और बाघ भी माता के दरबार में दर्शन करने आता है. यही वजह है कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि लोगों के लिए रहस्य और श्रद्धा का प्रतीक भी बन चुका है.
मईया पूरी करती हैं मनोकामनाएं
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि यहां पहुंचते ही उन्हें एक अलग तरह की सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है. जंगल की शांति, पक्षियों की आवाज और मंदिर में गूंजती घंटियों की ध्वनि माहौल को बेहद दिव्य बना देती है. कई श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद भंडारे और पूजा का आयोजन भी कराते हैं.
आस्था और प्रकृति का यह अनोखा संगम लखीमपुर खीरी की पहचान बनता जा रहा है. मैलानी और भीरा जंगल के बीच स्थित काली माता मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि विश्वास,और रहस्य का केंद्र बन चुका है. जंगल के बीच मां काली का यह दरबार लोगों को आध्यात्मिक अनुभव के साथ प्रकृति के अद्भुत रूप से भी रूबरू कराता है.
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
बातचीत करते हुए मंदिर की पुजारी अनिल सिंह बताते हैं कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है और यह मंदिर मैलानी और भीरा के बीच में बरगद चौकी के पास स्थित है. इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है और मान्यता है जिस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया था उसे स्थान पर अक्सर सड़क हादसे हो जाते थे, जिस कारण इस मंदिर का निर्माण कार्य कराया गया.
मंदिर का निर्माण कार्य होने के बाद इस स्थान पर तब से अब तक कोई भी सड़क दुर्घटना नहीं हुई है और आज भी बाघ मां काली के दर्शन करने के लिए रात के अंधेरे में आता है और वापस फिर लौट जाता है सुबह उठने पर बाघ के पगचिन्ह मिलते हैं.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



