मुजफ्फरपुर में मशरूम की खेती अब स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बन रही है. जहां किसान और युवा कृषि विशेषज्ञ अमरनाथ शर्मा से प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर हो रहे हैं. सरकारी सब्सिडी और सही मार्केटिंग के सहयोग से कम लागत और कम समय में युवा न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं, बल्कि जिले में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहे हैं.
कम निवेश में बेहतर रोजगार विकल्प
अमरनाथ शर्मा बताते हैं कि मशरूम की खेती उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो कम निवेश में अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं. उनका कहना है कि शुरुआत में बड़े स्तर पर निवेश करने के बजाय छोटे यूनिट से काम शुरू करना चाहिए. अगर सही तरीके से मेहनत की जाए तो एक छोटे कमरे से भी अच्छी कमाई की जा सकती है. उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं होती. 10×10 फीट के कमरे या छोटे शेड में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है. इसके लिए मुख्य रूप से भूसा, प्लास्टिक बैग और मशरूम स्पॉन यानी बीज की जरूरत होती है.
तापमान और नमी सबसे महत्वपूर्ण
अमरनाथ शर्मा के अनुसार, मशरूम उत्पादन में तापमान और नमी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने बताया कि 20 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान और 70 से 80 प्रतिशत नमी बनाए रखने पर अच्छी पैदावार मिलती है. इसके लिए कमरे में नियमित पानी का छिड़काव और उचित वेंटिलेशन जरूरी होता है. उन्होंने नए किसानों को बाजार से सीधे जुड़ने की सलाह दी.
यहां करें मार्केटिंग, बढ़ेगा मुनाफा
अमरनाथ शर्मा का कहना है कि अगर किसान होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय सब्जी मंडियों से सीधे संपर्क करें तो उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है. इससे बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा. सिर्फ ताजा मशरूम बेचने के बजाय वैल्यू एडिशन पर भी उन्होंने जोर दिया. उनके मुताबिक ड्राई मशरूम, मशरूम अचार और मशरूम पाउडर की बाजार में अच्छी मांग है. इससे किसानों की आमदनी कई गुना तक बढ़ सकती है.
प्रशिक्षण और सब्सिडी भी
अमरनाथ शर्मा ने बताया कि सरकार और कृषि विभाग द्वारा मशरूम खेती के लिए प्रशिक्षण और सब्सिडी भी दी जाती है. ऐसे में युवा अगर सही जानकारी लेकर इस व्यवसाय में उतरें तो कम समय में आत्मनिर्भर बन सकते है और अच्छी आमदनी भी कर सकते हैं.
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