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होमफोटोDelhiखुलेगा दिल्ली का ये अंडरपास, जाम की कर देगा छुट्टी, नोएडा-गाजियाबाद को फायदा

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दि‍ल्‍ली के भैरों मार्ग अंडरपास 5 का काम दोबारा शुरू हो गया है और अब उसके शुरू होने की तारीख भी आ गई है. पीडब्ल्यूडी ने इसे तैयार करने के लिए फरवरी 2027 तक की डेडलाइन बताई है. इस अंडरपास से पूर्वी द‍िल्‍ली के अलावा नोएडा और गाज‍ियाबाद से आने वाले लाखों लोगों को बड़ा फायदा म‍िलने वाला है. इसके साथ ही इससे प्रगत‍ि मैदान कॉरिडोर और सेंट्रल दिल्ली की कनेक्टिविटी सुधरेगी. आइए जानते हैं इसके बारे में जरूरी बातें….

दिल्ली का भैंरो मार्ग अंडरपास-5 अब खुलने जा रहा है. इससे दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद के लोगों को जबर्दस्त फायदा मिलेगा. इससे न केवल जाम की छुट्टी होगी बल्कि लाखों लोगों को फर्राटा भरने में सुविधा होगी और यात्रा का टाइम भी घट जाएगा.

दिल्ली का भैंरो मार्ग अंडरपास-5 अब खुलने जा रहा है. इससे दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद के लोगों को जबर्दस्त फायदा मिलेगा. इससे न केवल जाम की छुट्टी होगी बल्कि लाखों लोगों को फर्राटा भरने में सुविधा होगी और यात्रा का टाइम भी घट जाएगा.

दिल्ली का भैरों मार्ग अंडरपास-5 कई बार डेडलाइन चूकने के बाद अब फरवरी 2027 तक पूरा होने वाला है. पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि काम दोबारा शुरू हो चुका है और पूरे जोर-शोर से चल रहा है.

दिल्ली का भैरों मार्ग अंडरपास-5 कई बार डेडलाइन चूकने के बाद अब फरवरी 2027 तक पूरा होने वाला है. पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि काम दोबारा शुरू हो चुका है और पूरे जोर-शोर से चल रहा है.

यह प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का अहम हिस्सा है. 110 मीटर लंबा अंडरपास-5 चालू रेलवे लाइन के नीचे बन रहा है. यह प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर प्रोजेक्ट का अंतिम चरण है.

यह प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का अहम हिस्सा है. 110 मीटर लंबा अंडरपास-5 चालू रेलवे लाइन के नीचे बन रहा है. यह प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर प्रोजेक्ट का अंतिम चरण है.

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बता दें कि चलती रेलवे लाइन और यमुना नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण प्रोजेक्ट बार-बार प्रभावित हुआ था. 2023 में इसे बनाने के लिए बॉक्स-पुशिंग विधि से प्रीकास्ट बॉक्स भी लगाए गए थे लेकिन वे यमुना की बाढ़ में धंस गए थे.

बता दें कि चलती रेलवे लाइन और यमुना नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण प्रोजेक्ट बार-बार प्रभावित हुआ था. 2023 में इसे बनाने के लिए बॉक्स-पुशिंग विधि से प्रीकास्ट बॉक्स भी लगाए गए थे लेकिन वे यमुना की बाढ़ में धंस गए थे.

इसके बाद इसे फिर से चालू करने के लिए कट एंड कवर विधि अपनाने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन भारतीय रेलवे ने इसकी अनुमति नहीं दी. अब पीडब्ल्यूडी ने कास्ट इन-सिटू तकनीक अपनाई है और रेलवे से इन-प्रिंसिपल NOC भी मिल गया है.

इसके बाद इसे फिर से चालू करने के लिए कट एंड कवर विधि अपनाने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन भारतीय रेलवे ने इसकी अनुमति नहीं दी. अब पीडब्ल्यूडी ने कास्ट इन-सिटू तकनीक अपनाई है और रेलवे से इन-प्रिंसिपल NOC भी मिल गया है.

एक बार पूरा होने पर यह भैरों मार्ग, सेंट्रल दिल्ली, ISBT कश्मीरी गेट, रिंग रोड और सराय काले खां के बीच आवागमन को आसान बनाएगा. प्रगति मैदान, ITO कॉरिडोर की भीड़ कम होगी और पूर्व-मध्य दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.

एक बार पूरा होने पर यह भैरों मार्ग, सेंट्रल दिल्ली, ISBT कश्मीरी गेट, रिंग रोड और सराय काले खां के बीच आवागमन को आसान बनाएगा. प्रगति मैदान, ITO कॉरिडोर की भीड़ कम होगी और पूर्व-मध्य दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतर होगी.

फिलहाल अस्थायी डायवर्जन और बैरिकेडिंग के कारण रिंग रोड, भैरों मार्ग और सराय काले खां पर भारी जाम लगा रहता है.ट्रेनें कुछ दिनों के लिए डायवर्ट करके काम तेजी से पूरा करने की योजना है.

फिलहाल अस्थायी डायवर्जन और बैरिकेडिंग के कारण रिंग रोड, भैरों मार्ग और सराय काले खां पर भारी जाम लगा रहता है.ट्रेनें कुछ दिनों के लिए डायवर्ट करके काम तेजी से पूरा करने की योजना है.

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