ग्रामीण अनिल कुमार मिश्रा लोकल 18 से कहते हैं कि गांव में गाय का दूध काफी इंपोर्टेंट होता है. ऐसे में गाय का दूध दुहने के लिए लोग सामान्य तरीके से हाथों का इस्तेमाल करते हैं और आराम से बैठकर गाय के थन से दूध दुहते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ गाय आसानी से दूध नहीं दुहने देती हैं और वह अपने पैरों से दूध दुहने वाले के ऊपर अटैक करती है.
सुल्तानपुरः लोग पशुपालन नहीं करते हैं लेकिन उन्हें दूध सेहत के लिए चाहिए होता है. वहीं जो लोग पशुपालन करते हैं, उन्हें कभी-कभी गाय से दूध निकालने में परेशानी होती है. यही वजह है कि दूध दुहते समय पैर को छानने की प्रक्रिया अपनाते हैं. जिससे फिर वह आराम से बैठकर गाय का दूध दुहते हैं. यह तरीका बहुत ही पारंपरिक है. बहुत लोग इस प्रक्रिया से अंजान होते हैं.
क्या होता छानना प्रक्रिया
ग्रामीण अनिल कुमार मिश्रा लोकल 18 से कहते हैं कि गांव में गाय का दूध काफी इंपोर्टेंट होता है. ऐसे में गाय का दूध दुहने के लिए लोग सामान्य तरीके से हाथों का इस्तेमाल करते हैं और आराम से बैठकर गाय के थन से दूध दुहते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ गाय आसानी से दूध नहीं दुहने देती हैं और वह अपने पैरों से दूध दुहने वाले के ऊपर अटैक करती है. ऐसे में गाय को छाना जाता है यानी कि गाय के दोनों पैरों में रस्सी बांधी जाती है और यह रस्सी तब तक बांधी जाती है जब तक कि गाय का दूध दुह नहीं लिया जाता है.
गांव में आज भी होता है प्रयोग
ग्रामीण इलाकों में यह प्रक्रिया आज भी अपनाई जाती है. इसका फायदा यह होता है कि लतही गाय का आसानी से दूध दुहा जा सकता है और इससे दुहने वाले को खतरा भी नहीं रहता है. अनिल कुमार आगे बताते हैं गाय में यूकैन की प्रक्रिया ज्यादा होती है अगर दूध दुहने के दरमियान गए एक बार उचुक गई तो फिर वह दुहने में काफी दिक्कत करती है ऐसे में अगर पहले से ही गाय को छाना जाएगा तो उससे गाय का बछड़ा भी आसानी से दूध पी लेगा और दूध दुहने वाला भी आसानी से दुह लेगा.
इस तरह बांधें पैर
अगर आप भी अपने लतही गायों से परेशान है और दूध दुहने में गायों के पैर का शिकार हो जाते हैं और उनसे चोट खा जाते हैं तो ऐसे में आप लगभग 2 फीट की एक मजबूत रस्सी लीजिए और गाय के एक पैर में इस रस्सी को परमानेंट बांध दीजिए. जब आपको गाय से दूध दुहना हो तो ऐसे में आप रस्सी को दूसरे पैर में भी बांध दीजिए. इससे गाय आसानी से खड़ी हो जाती है और आपके ऊपर पैरों से अटैक नहीं करती है और आप आसानी से दूध दुह सकते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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