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देशभर के स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी अब अभिभावक संभालेंगे। केंद्र सरकार राज्यों के साथ बैठक के आधार पर तैयार पहली स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की गाइडलाइन बुधवार को जारी करेगी। इसका मकसद, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, परीक्षा का तनाव कम करना, ड्रॉपआउट में लाने, शिक्षा व पोषण में सुधार, 12वीं कक्षा में सौ फीसदी एनरोलमेंट पर फोकस करना है। 

अभी तक स्कूल के प्रिंसिपल स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का संचालन करते थे। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, केंद्र और राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठकों के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत समग्र शिक्षा अभियान 3.0 में पॉलिसी रिफॉर्म के तहत स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में संशोधन किया जा रहा है। 

इसमें अभिभावकों के साथ-साथ आम लोग भी शामिल होंगे। स्कूलों खासकर सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों के वेतन आदि की जिम्मेदारी तो सरकार की रहेगी, लेकिन स्कूलों के बेहतर संचालन का जिम्मा अभिभावकों को सौंपा जाएगा। इसमें स्थानीय लोगों व प्रतिनिधि भी जुड़ेंगे। यह पढ़ाई, खेलकूद, कौशल, फीस और शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी सुझाव देगी।

छात्रों के समग्र विकास पर फोकस

सरकार का फोकस स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ छात्रों और शिक्षकों का समग्र विकास भी है। इसमें सीखने और पोषण पर भी ध्यान देना है। विकसित भारत 2047 और अभिभावकों के माध्यम से छात्रों की जरूरतों के आधार पर समाज को स्कूलों से जोड़ा जाएगा।

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