किसानों के लिए खुशखबरी: ₹4300 प्रति वर्ग मीटर का रेट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुतााबिक, नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि न्यू नोएडा के लिए जमीन जबरन नहीं ली जाएगी, बल्कि किसानों की आपसी सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी. शासन ने किसानों के लिए 4300 रुपये प्रति वर्ग मीटर की मुआवजा दर निर्धारित की है. यह दर उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत है जो लंबे समय से अपनी जमीनों के सही दाम का इंतजार कर रहे थे. प्राधिकरण ने फिलहाल जमीन खरीदने के लिए 1000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट अलग से रख दिया है, ताकि भुगतान में कोई देरी न हो.
80 गांवों की बदलेगी सूरत: गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर शामिल
न्यू नोएडा का विस्तार केवल कागजों तक सीमित नहीं है. इसके लिए कुल 80 गांवों को अधिसूचित किया गया है. इसमें गौतमबुद्ध नगर के 20 गांव और बुलंदशहर के 60 गांव शामिल हैं. इन गांवों की करीब 20,911.29 हेक्टेयर जमीन पर एक आधुनिक शहर बसाया जाएगा. जो किसान अपनी जमीन स्वेच्छा से देना चाहते हैं, वे सीधे नोएडा प्राधिकरण के भूलेख विभाग से संपर्क कर सकते हैं. प्राधिकरण जल्द ही एक विशेष समिति का गठन करेगा जो गांव-गांव जाकर शिविर लगाएगी ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें.
गांव-गांव लगेंगे शिविर, जल्द बनेगा अस्थाई दफ्तर
किसानों की सुविधा के लिए नोएडा प्राधिकरण जल्द ही एक विशेष समिति का गठन करेगा. यह कमेटी गांव-गांव जाकर विशेष कैंप आयोजित करेगी, ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. साथ ही, न्यू नोएडा क्षेत्र में ही ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के पास एक अस्थाई कार्यालय खोलने की तैयारी भी शुरू हो गई है. इस दफ्तर में भूलेख और सिविल विभाग के अधिकारी नियमित रूप से बैठेंगे, जिससे स्थानीय लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा हो सके.
मास्टर प्लान 2041: चार चरणों में विकास
नया नोएडा करीब 20,911.29 हेक्टेयर जमीन पर बसाया जाएगा. मास्टर प्लान 2041 के तहत इस पूरे प्रोजेक्ट को चार अलग-अलग चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है:
- प्रथम चरण (2023–2027): इसमें 3165 हेक्टेयर जमीन को विकसित किया जाएगा.
- द्वितीय चरण (2027–2032): इस दौरान 3798 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास होगा.
- तृतीय चरण (2032–2037): इस फेज में 5908 हेक्टेयर जमीन पर काम होगा.
- अंतिम चरण (2037–2041): प्रोजेक्ट के आखिरी हिस्से में 8230 हेक्टेयर भूमि विकसित की जाएगी.
जमीनी स्तर पर काम शुरू: सैटेलाइट सर्वे और नए दफ्तर
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के पास एक अस्थायी कार्यालय खोलने की तैयारी चल रही है. यहां भूलेख और सिविल विभाग के अधिकारी नियमित रूप से बैठेंगे ताकि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान हो सके. इसके अलावा, क्षेत्र की 18 अक्टूबर 2024 की ताजा सैटेलाइट तस्वीरें खरीदने की प्रक्रिया भी जारी है. स्थानीय सर्वे और एरियल फोटोग्राफी का काम प्राथमिकता पर शुरू कर दिया गया है ताकि मास्टर प्लान के अनुसार जमीन का सही आकलन हो सके.
अतिरिक्त स्टाफ की मांग और प्रशासनिक सक्रियता
नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ (ACEO) सतीश पाल ने जानकारी दी कि डीएनजीआईआर के लिए शासनादेश प्राप्त हो चुका है. चूंकि यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है, इसलिए प्राधिकरण ने शासन से अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मचारियों की मांग की है ताकि काम को समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके.
क्यों खास है ‘न्यू नोएडा’?
‘न्यू नोएडा’ को केवल रिहायशी शहर के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन’ के रूप में देखा जा रहा है. यहां उद्योगों, लॉजिस्टिक हब और कमर्शियल सेंटर्स के लिए बड़े पैमाने पर जमीन आरक्षित की गई है. दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और एक्सप्रेस-वे से इसकी नजदीकी इसे भविष्य का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र बनाएगी.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



