-सात मई तक नई न्यूनतम मजदूरी लागू करने का आदेश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
-ठेकेदारों और सेवायोजकों की जवाबदेही तय, भुगतान की निगरानी के लिए प्रतिनिधि तैनात होंगे
-ओवरटाइम, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर डीएम ने जारी किए सख्त निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि श्रमिकों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभागार में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ की अध्यक्षता में औद्योगिक संगठनों, कारखाना प्रबंधकों और श्रम विभाग के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी औद्योगिक इकाइयों, कारखानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को शासन द्वारा निर्धारित नई न्यूनतम मजदूरी दरों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल से लागू नई मजदूरी दर के अनुसार अकुशल श्रमिकों को 13,690 रुपये प्रतिमाह, अर्द्धकुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये तथा कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये मासिक वेतन दिया जाना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सात मई तक सभी श्रमिकों को बढ़ी हुई दरों के अनुसार वेतन का भुगतान हर हाल में किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी आवश्यक है।
इसलिए प्रत्येक सेवायोजक और कारखाना प्रबंधक यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके अधीन कार्यरत सभी ठेकेदार अपने श्रमिकों को नई दरों के अनुसार भुगतान करें। वेतन वितरण के दौरान नियोक्ता का प्रतिनिधि मौके पर मौजूद रहेगा ताकि भुगतान प्रक्रिया की निगरानी की जा सके। जिलाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी ठेकेदार या संस्थान के खिलाफ न्यूनतम वेतन न देने की शिकायत प्राप्त होती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित ठेकेदार का लाइसेंस निरस्त करने के साथ उसे काली सूची में भी डाला जाएगा। प्रशासन श्रमिक हितों के संरक्षण के लिए किसी भी स्तर पर सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। बैठक में श्रमिकों से अतिरिक्त कार्य लिए जाने के संबंध में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि निर्धारित आठ घंटे से अधिक कार्य कराने पर श्रमिकों को नियमानुसार दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान करना अनिवार्य होगा। यदि कोई संस्थान ओवरटाइम भुगतान करने में सक्षम नहीं है, तो श्रमिकों से अतिरिक्त कार्य नहीं कराया जाएगा।
इसके साथ ही उपनिदेशक कारखाना को निर्देश दिए गए कि सभी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं और श्रमिकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। प्रत्येक संस्थान से इन व्यवस्थाओं का प्रमाण पत्र भी प्राप्त किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। उप श्रम आयुक्त अनुराग मिश्र को श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की विशेष टीम गठित कर वेतन भुगतान की निगरानी करने और आदेशों का पालन न करने वाले नियोजकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में महाप्रबंधक उद्योग आशुतोष सिंह, उप निदेशक कारखाना आलोक कुमार सिंह, सहायक श्रम आयुक्त कृष्ण अवतार सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सख्त पहल से जिले के हजारों श्रमिकों को समय पर और निर्धारित दरों पर वेतन मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक संतोष और कार्यस्थल अनुशासन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
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